नरक चतुर्दशी 2019: छोटी दिवाली कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि

    Narak Chaturdashi 2019 Date: इस तारीख को है छोटी दिवाली, जानें शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि

    नरक चतुर्दशी 2019: कब, क्यों और कैसें मनायी जाती है छोटी दिवाली, शुभ मुहूर्त, कथा, कहानी और पूजा विधि (Information in Hindi)

    Narak Chaturdashi Fast 2019 Date In Hindi: हर साल नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है यह नरक चौदस (Narak Chaudas), रूप चतुर्दशी (Roop Chaturdashi), और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है, यह त्यौहार हिंदुओं के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली के 1 दिन पहले पड़ता है और इस दिन दिन को लोग छोटी दीपावली (Choti Dipawali) के रूप में भी सेलिब्रेट करते हैं तथा नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) के दिन मृत्यु के देवता यमराज के पूजा की जाती है ताकि अकाल मृत्यु से मुक्ति मिले और मनुष्य का स्वास्थ्य बेहतर रहे।

    साथ ही इस दिन यमराज की विधि विधान पूजा करने से नरक में जाने का भय खत्म हो जाता है, और मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, आथार्त उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
    Narak Chaturdashi Choti Diwali Kab Hai Katha Mahurat Images Pics Photos
    Narak Chaturdashi Choti Diwali Kab Hai Katha Mahurat Images Pics Photos

    आइए अब आपको नरक चतुर्दशी की कथा (Narak Chaturdashi Katha) पूजा विधि (Pooja Vidhi) और छोटी दिवाली (Choti Diwali) क्यों मनायी जाती है इसके बारे में भी जानकारी देते हैं।

    नरक चतुर्दशी पूजन विधि | Narak Chaturdarshi Pooja Vidhi In Hindi

    1. सबसे पहले आप सुबह सवेरे सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान करें और तिल के तेल से शरीर पर मालिश करें तथा चिरचिरा के औषधीय पौधे को लेकर सिर के ऊपर से चारों ओर तीन बार घुमाएं।

    2. नर्क के भय से मुक्ति पाने के लिए अहोई अष्टमी के दिन एक लोटे में पानी भरकर रखें और नरक चतुर्दशी के दिन इस पानी को नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें।

    3. स्नान करने के बाद यमराज की प्रार्थना करने के लिए दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर खड़े हो जाएं और अपने द्वारा किए गए पापों की क्षमा मांगे।

    4. शाम के समय सभी देवी देवताओं के पूजन के बाद तेल के दीए को घर के चौखट पर बाहर की ओर मुख करके रखें।

    5. इस दिन भगवान कृष्ण और शिव जी की पूजा का भी विधान है।

    नरक चतुर्दशी कथा | Narak Chaturdashi Katha Story:

    नरक चतुर्दशी कथा : नरकासुर

    एक पौराणिक कथा के अनुसार कृष्ण काल में नरकासुर नाम का एक राक्षस हुआ करता था जिसने अपने शक्तियों से देवताओं, साधु-संतों और स्त्रियों पर बहुत अत्याचार किया और उसने देवताओं की 16000 पत्नियों को बंधक बना लिया। सभी देवता भयभीत होकर भगवान श्री कृष्ण के पास पहुंचे और आपबीती बताई, जिसके बाद श्री कृष्ण ने नरकासुर का संहार करने का आश्वासन दिया।

    क्योंकि नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप प्रदान था इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी सत्यभामा को नरकासुर के संहार में शामिल कर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उसका वध किया और उसकी कैद से 16000 स्त्रियों को आजाद कराया। जिसके बाद उनके पतियों ने इन्हें स्वीकारने से इंकार कर दिया जिसके बाद यह सभी स्त्रियां मृत्यु की ओर अग्रसर हुई तो श्री कृष्ण ने ने इन सभी 16000 स्त्रियों को अपनी पटरानी बना लिया।

    नरकासुर का वध इस दिन होने के कारण लोगों ने इसके अगले दिन अपने घरों में दिए जलाए और तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

    नरक चतुर्दशी कथा:

    एक दूसरे पौराणिक कथा की माने तो बहुत समय पहले धर्म-कर्म का काम करने वाला रंतिदेव नाम का एक राजा था उसने अपने जीवन में बहुत से धर्म-कर्म के काम किए लेकिन जब उसका अंतिम समय निकट आया तो यमराज के दूत उसे नर्क ले जाने आए।

    नर्क जाने की बात सुनकर वह हैरान हो गया और उसने यमदूत उसे अपना अधर्म और पाप पूछा तो उन्होंने बताया कि आपने अपने जीवन में कोई पाप तो नहीं किया है लेकिन एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण बिना भिक्षा पाए भूखा वापस लौट गया इसी कारण उसे नरक लोक ले जाया जा रहा है, तो उसने क्षमा मांगते हुए कुछ समय मांगा उसकी विनती को स्वीकार करते हुए उसे अपनी गलती स्वीकार करने का समय दे दिया गया।

    और वह अपनी इस दुविधा को लेकर ऋषिवर के पास पहुंचे और उन्होंने अपनी आपबीती बताई तो ऋषिवर ने उन्हें एक उपाय बताया जिसके अनुसार उसने कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन व्रत रखा और ब्राह्मणों को भोजन कराया जिससे नर्क से मुक्ति मिल गई इसीलिए यह दिन नर्क और पाप से मुक्ति दिलाने के लिए भी मनाया जाता है।

    नरक चतुर्दशी 2019 अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त:

    अभ्यंग स्नान समय शुरू: 27 अक्टूबर 2019 (रविवार) 5 बजकर 15 मिनट से
    अभ्यंग स्नान समय समाप्त: 27 अक्टूबर 2019 (रविवार) 6 बजकर 29 मिनट तक
    कुल अवधि: - 1 घंटे 13 मिनट

    अन्तिम शब्द - Narak Chaturdashi Choti Diwali 2019

    दोस्तों अब तो आप नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली कब है तथा नरक चतुर्दशी की कथा कहानी एवं यह क्यों और कैसे मनाई जाती है पूजा विधि के बारे में जान ही गए होंगे, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करे।

    यह अभी जानकारियाँ पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे सरल भाषा में लोगों को समझाने के लिए लिखा गया है।
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