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उत्‍पन्ना एकादशी 2020: कब और क्यों मनाते है, जानिए महत्व, कथा और पूजा विधि

    Utpanna Ekadashi Date 2020: कब, क्यों और कैसे मनाते है उत्‍पन्ना एकादशी, जानिए महत्व, कथा और पूजा विधि

    उत्‍पन्ना एकादशी २०२०: पौराणिक मान्‍यताओं और हिन्दू धर्म में उत्‍पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) को विशेष स्थान प्राप्त है, उत्‍पन्ना एकादशी के दिन एकादशी माता का जन्‍म हुआ था, इसलिए इस दिन को उत्‍पन्ना एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे उत्तपति एकादशी (Utpatti Ekadashi) भी कहा जाता है।

    नारायण की शक्ति मानी जाने वाली माता एकादशी ने इस दिन उत्‍पन्न होकर अतिबलशाली और अत्‍याचारी राक्षस मुर ('मुरसुरा') का वध किया था। मान्‍यता के अनुसार एकादशी का व्रत शुरू करने वालों को उत्पन्ना एकादशी से ही उपवास शुरू करना चाहिए।

    हम आपको बता दें की हर महीने दो एकादशी होने के कारण साल में 24 एकादशी होती है, माना जाता है कि इस एकादशी व्रत रखने से अगले पिछले सभी पापों से छुटकारा मिलने में मदद मिलती है।

    Utpanna Ekadashi 2020 Date
    Utpanna Ekadashi 2020 Date

    आइए अब आपको उत्पन्ना एकादशी कब है, इसका शुभ महूर्त (Shubh Muhurat) और पूजा विधि (Puja Vidhi), इसकी कहानी (Story) एवं कथा हिंदी में, बताते हैं।


    उत्‍पन्ना एकादशी कब है २०२० में शुभ महूर्त

    उत्‍पन्ना एकादशी भारत के उत्तरी और दक्षिणी हिस्‍सों में अलग-अलग दिन मनाई जाती है, उत्तर भारत में यह एकादशी मार्गशीर्ष में पड़ती है जो इस बार 2020 में 11 दिसम्बर को है। जबकि दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में उत्पन्ना एकादशी 'कार्तिक' के महीने में मनायी जाती है।

    इस दिन माँ एकादशी का निर्जला व्रत रख उनकी विधिवत पूजा की जाती है, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती हैं।


    उत्‍पन्ना एकादशी क्यों मनाते है? (महत्‍व)

    हिन्‍दू धर्म में उत्‍पन्ना एकादशी मनाने का मुख्य मकसद इस दिन देवी एकादशी (जो भगवान विष्णु की एक शक्ति है) के जन्मदिन को याद करना है, साथ ही इस दिन भगवान विष्‍णु द्वारा मुरसुरा नामक असुर के संहार और श्री नारायण की जीत की खुशी में भी इस एकादशी को मनाया जाता है।

    इस एकादशी के दिन श्री हरि विष्‍णु और माँ एकादशी की विधि-विधान से पूजन की जानी चाहिए।

    आइए अब आपको उत्‍पन्ना एकादशी की विधिवत पूजा कैसे करे इसके बारें में भी बताते है।


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    उत्‍पन्ना एकादशी की पूजा विधि | Puja Vidhi Steps:

    • व्रत से पहले की रात (दशमी की रात) को भोजन नहीं करना चाहिए.

    • उत्‍पन्ना एकादशी के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करने चाहिए.

    • इस दिन भगवान गणेश और श्रीकृष्‍ण की विधिवत पूजा करनी चाहिए.

    • और भगवान को तुलसी की मंजरियां, पुष्प, अक्षत और दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री अर्पित करनी चाहिए.

    • पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुन आरती करनी चाहिए.

    • इस दिन अन्‍न का त्याग कर केवल फलों का ही भोजन करना चाहिए.

    • व्रत एकदाशी के अलग दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए.

    इस दिन उत्पन्ना एकादशी की पूजा कर ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना चाहिए, यह दान आपकी क्षमता के अनुसार कुछ भी हो सकता है जैसे पैसे, धन, भोजन, कपड़े आदि।


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    उत्‍पन्ना एकादशी की कथा (Utpanna Ekadashi Story)

    पौराणिक कथा के अनुसार विष्णुकाल में मुर नामक एक बड़ा बलवान और भयानक दैत्य था, जिससे सभी देवता अपनी हार स्वीकार कर चुके थे, और देवताओं द्वारा भगवान विष्णु के आह्वान पर भगवान विष्णु राक्षस मुर से युद्ध करने को राज़ी हुए।

    किन्तु मुर से जीत पाना उतना आसान नहीं था, बताया जाता है की भगवान विष्णु और मुर के बीच का युद्ध लगभग 10 हजार वर्ष तक चलता रहा किंतु राक्षस मुर नहीं हारा।

    युद्ध से थककर भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम में हेमवती नामक सुंदर गुफा में विश्राम करने चले गए, 12 योजन लंबी इस गुफा में केवल एक ही द्वार था. विष्णु भगवान धकान के कारण वहां योगनिद्रा की गोद में सो गए।

    तभी भगवान विष्णु का पीछा करते करते मुर भी वहाँ पहुँच गया और भगवान को योगनिद्रा देख मारने को हुआ तभी भगवान के शरीर से एक देवी प्रकट हुई और देवी ने राक्षस मुर से युद्ध कर उसका वध कर दिया।

    नारायण जब योगनिद्रा की गोद से जागे, और देवी से प्रसन्न होकर कहा कि आपका जन्म एकादशी के दिन हुआ है, अत: आपका नाम "उत्पन्ना एकादशी" होगा. आप मेरे भक्तों द्वारा मेरे साथ ही पूजी जाएंगी।


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    अंतिम शब्द

    दोस्तों अब तो आप समझ ही गए होंगे की उत्पन्ना एकादशी कब की और कैसे मनाया जाता है और कथा एवं पूजा विधि क्या है, अगर आपको हमारी Utpanna Ekadashi के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने मित्रों और सगे सम्बंधियों के साथ भी जरूर शेयर करे।

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