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होलिका दहन 2021 डेट: कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कहानी

Holika Dahan: होली से एक दिन पहले फागुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, इस साल 2021 में होलिका 28 मार्च को रविवार के दिन जलाई जा रही है। आइये इसके बारें में विस्तार से जानते है...

    Holika Dahan 2021 Date: होलिका दहन कब है? शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी कहानी (Story)

    Holika Dahan Date and Time 2021: होली का त्यौहार हिंदुओं के धार्मिक त्योहारों में से एक है, होली भारत समेत नेपाल और कई दूसरे देशों में भी काफी हर्षोल्लास से मनाई जाती है और होली से पहले होलिका दहन का भी काफी महत्व है।

    होलिका दहन और होली के पीछे कई कहानियां जुडी हुई है जिनमें से होलिका दहन को लेकर एक कहानी (Story) विष्णु भक्त पहलाद की है।

    आज के इस लेख में हम आपको 2021 में होलिका दहन कब है? और इसका शुभ मुहूर्त क्या है? यानि होली कब और कितने बजे जलानी है और पूजन विधि क्या है।

    Holika Dahan 2021 Kab Hai Date
    Holika Dahan 2021 Kab Hai Date in Hindi

    2021 में होलिका दहन कब है? (Holika Dahan Date)

    हर साल रंग वाली होली से एक दिन पहले फागुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, इस साल 2021 में होलिका दहन 28 मार्च को रविवार के दिन है।

    होलिका जलाने का शुभ मुहूर्त रविवार 28 मार्च को शाम 06:37 बजे से रात 08:56 है।

    आपको बता दें कि होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उत्तम होता है भद्रा काल के कारण इस बार होलिका जलाने के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, परंतु इस साल भद्रा काल दोपहर के समय समाप्त हो रहा है इसीलिए सूर्यास्त के बाद आप होलिका जला सकते हैं।


    Holika Dahan Date: Sunday, 28 March 2020

    Holika Dahan Time: 06:37 PM से 8:56 PM तक


    होलिका दहन तिथि और शुभ मुहूर्त:

    होलिका दहनतारीख (Date)समय (Time)
    होलिका दहन 2021 तिथि:28 मार्च (रविवार)-
    होलिका दहन शुभ मुह्रर्त:28 मार्च 2021 (रविवार)शाम 06 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 56 मिनट तक
    भद्रा पुंछा:28 मार्च (रविवार)10:13 से 11:16 तक
    भद्रा मुख:28 मार्च (रविवार)सुबह 11:16 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक
    पूर्णिमा तिथि आरंभ:28 मार्च 2021सुबह 3 बजकर 27 मिनट से
    पूर्णिमा तिथि समाप्त:29 मार्च 2021रात 12 बजकर 17 मिनट तक


    होलिका दहन पर प्रहलाद की कथा/कहानी (Holika Dahan Story in Hindi)

    पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अति बलशाली असुर राजा हुआ करता था जो भगवान नारायण को अपना कट्टर शत्रु मानता था और उसने खुद को ही भगवान घोषित कर दिया था एवं राज्य में केवल अपनी पूजा करने की घोषणा कर दी थी।

    जिसके फलस्वरूप उस राक्षस ने अपने राज्य में भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा करने पर मृत्युदंड देने का एलान कर दिया।

    लोग उसके द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों से अत्यंत दुखी थे वह ऋषि-मुनियों को मारता जा रहा था।

    ऐसे में श्री हरि विष्णु जी ने असुर हिरण्यकश्यप का अंत करने के लिए धरती पर उसके पुत्र प्रहलाद के रूप में अपना भक्त भेजा।

    हिरण्यकश्यप यह देख अत्यंत दुखी हुआ कि उसका पुत्र उसके दुश्मन का भक्त है और उसके लाख मना करने के बावजूद भी वह उसके शत्रु की ही आराधना करता रहा।

    जिसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने का निर्णय लिया और कई बार उसे मारने की कोशिश भी की परंतु उन्हें हमेशा भगवान स्वयं उसे बचाते रहे।

    अंत में हिरण्यकश्यप अपनी बहन होलिका से अपने पुत्र प्रह्लाद की हत्या करने को कहा क्योंकि होलिका को भगवान शिव से एक ऐसी 'चादर' प्राप्त थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे नहीं जला सकती थी।

    इस बात को ध्यान में रखते हुए होलिका ने भक्त पहलाद को अपनी गोद में लिया और खुद वह चादर ओढ़ कर चिता की आग पर बैठ गई।

    परंतु संयोग से और भगवान शिव की वह चादर उड़कर भक्त पहलाद पर आ गई जिसके परिणाम स्वरूप भक्त पहलाद की जान बच गई लेकिन होलिका चिता की अग्नि में जल कर भस्म हो गई।

    इसीलिए हर साल होलिका दहन के दिन होलिका जला कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा का जश्न और होलिका जैसे दुर्भावना के अंत का जश्न मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है, होलिका दहन के साथ ही आपको सभी तरह की बुराइयों, अहंकार और नकारात्मकता को भी होलिका दहन में भस्म कर देना चाहिए।


    पूतना दहन

    कई स्थानों पर होलिका दहन के दिन पूतना को जलाकर होली मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के मामा कंस की असुरी पूतना ने बाल कृष्ण को अपना विष भरा स्तनपान करा कर उन्हें मारने की कोशिश की थी।

    जिसमें पूतना मारी गई थी और इसी विष पान के कारण भगवान श्री कृष्ण का वर्ण नीला हो गया था।


    होलिका और भक्त प्रहलाद की पूजा कैसे करें? (Holika Puja Vidhi)

    • 1. पूजा करने के लिए होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें।

    • 2. सभी पूजन सामग्री जैसे चावल, पुष्प, गुड, हल्दी, बताशे, गुलाल, नारियल रोली आदि का प्रयोग कर होलिका की पूजा करें।

      आप चाहे तो नए फसलो जैसे गेहूं की बालियों को भी सामग्री के रूप में अर्पित कर सकते हैं।

    • 3. पूजा करते समय सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और ॐ गणेशाय नमः मंत्र का जाप करें।

      इसके बाद होलिका की पूजा करने के लिए ॐ होलीकाय नमः मंत्र का उच्चारण करें।

      एवं इसी प्रकार प्रहलाद की पूजा करते समय ॐ प्रहलादाए नमः का पालन करें।

    • 4. इसके बाद आप भगवान विष्णु की भी पूजा करें और अब सूत लपेटते हुए 7 बार होलिका की परिक्रमा करें।

    • 5. होलिका पूजन के बाद जल से अघर्य देना चाहिए।


    अंतिम शब्द

    तो दोस्तों अब तो आप Holika Dahan 2021 की Date And Time तथा Holika Dahan की Story in Hindi एवं इसका Shubh Mahurat और पूजन विधि (Pujan Vidhi) भी आपको पता चल गया।

    अगर आपको होलिका दहन की यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें।

    आप सभी को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं।

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