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Holika Dahan Date 2020: होलिका दहन कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कहानी

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    Holika Dahan: 2020 में होलिका दहन कब है Date जानिए शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी कहानी हिंदी में

    Holika Dahan Date and Time 2020 Hindi: होली का त्यौहार हिंदुओं के धार्मिक त्योहारों में से एक है, होली भारत समेत नेपाल और कई दूसरे देशों में भी काफी हर्षोल्लास से मनाई जाती है और होली से पहले होलिका दहन का भी महत्व है।

    होलिका दहन और होली के पीछे कई कहानियां छुपी हुई है जिनमें से होलिका दहन को लेकर एक कहानी विष्णु भक्त पहलाद की है आज के इस लेख में हम आपको 2020 में होलिका दहन कब है और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है होलिका दहन पर प्रह्लाद की कहानी बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप होलिका दहन कब करना है और कितने बजे होली जलानी है और पूजन विधि क्या है यह भी पता चल सके।

    Holika Dahan 2020 Kab Hai Date Shubh Mahurat and Pooja Vidhi Story
    Holika Dahan 2020 Kab Hai Date Shubh Mahurat and Pooja Vidhi Story in Hindi

    तो चलिए शुरू करते है और जानते है: Holika Dahan Date and Time 2020 Hindi, Holika Dahan Story, Holika Dahan Shubh Mahurat and Puja Vidhi


    कब है होलिका दहन जानिए शुभ मुहूर्त | Holika Dahan Date and Shubh Mahurat

    हर साल होलिका दहन होली से एक दिन पहले मनाई जाती है, और हर साल फागुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन होता है, इस साल 2020 में होलिका दहन 9 मार्च को सोमवार के दिन है।

    आपको बता दें कि होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उत्तम होता है भद्रा काल के कारण इस बार होलिका जलाने के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, परंतु इस साल भद्रा काल दोपहर के समय समाप्त हो रहा है इसीलिए सूर्यास्त के बाद आप होलिका जला सकते हैं।


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    Holika Dahan Date: Monday 09 March 2020

    Holika Dahan Time: 6:22 PM से 8:49 PM तक


    होलिका दहन तिथि और शुभ मुहूर्त:
    होलिका दहन 2020 तिथि (Date) समय (Time)
    होलिका दहन 2020 तिथि: 09 मार्च 2020 (सोमवार) -
    होलिका दहन शुभ मुह्रर्त: 09 मार्च 2020 (सोमवार) शाम 06 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 49 मिनट तक
    भद्रा पुंछा: 09 मार्च 2020 (सोमवार) सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक
    भद्रा मुखा: 09 मार्च 2020 (सोमवार) सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक
    पूर्णिमा तिथि आरंभ: 09 मार्च 2020 (सोमवार) सुबह 3 बजकर 3 मिनट से
    पूर्णिमा तिथि समाप्त: 09 मार्च 2020 (सोमवार) रात 11 बजकर 16 मिनट तक

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    होलिका दहन पर प्रहलाद की कथा/कहानी | Holika Dahan Story Hindi

    होलिका दहन के पीछे कई धार्मिक कथाएं हैं जिनमें से विष्णु भक्त प्रहलाद की कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है आइए अब आपको हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद से जुड़ी होलिका की कहानी के बारे में बताते हैं।


    पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अति बलशाली असुर राजा हुआ करता था जो भगवान नारायण को अपना कट्टर शत्रु मानता था और उसने खुद को ही भगवान घोषित कर दिया था एवं राज्य में केवल अपनी पूजा करने की घोषणा कर दी थी।

    जिसके फलस्वरूप उस राक्षस ने अपने राज्य में भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा करने पर मृत्युदंड देने का एलान कर दिया लोग उसके द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों से अत्यंत दुखी थे वह ऋषि-मुनियों को मारता जा रहा था, ऐसे में श्री हरि विष्णु जी ने असुर हिरण्यकश्यप का अंत करने के लिए धरती पर उसके पुत्र प्रहलाद के रूप में अपना भक्त भेजा।

    हिरण्यकश्यप यह देख अत्यंत दुखी हुआ कि उसका पुत्र उसके दुश्मन का भक्त है और उसके लाख मना करने के बावजूद भी वह उसके शत्रु की ही आराधना कर रहा है जिसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने का निर्णय लिया और कई बार उसे मारने की कोशिश भी की परंतु उन्हें हमेशा भगवान स्वयं उसे बचाते रहे परंतु अंत में उन्होंने अपनी बहन होलिका से अपने पुत्र पहलाद की हत्या करने को कहा क्योंकि होलिका को भगवान शिव से एक ऐसी चादर प्राप्त थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे नहीं जला सकती थी।

    इस बात को ध्यान में रखते हुए होलिका ने भक्त पहलाद को अपनी गोद में लिया और खुद वह चादर ओढ़ कर चिता की आग पर बैठ गई परंतु संयोग से और भगवान शिव की वह चादर उड़कर भक्त पहलाद पर आ गई जिसके परिणाम स्वरूप भक्त पहलाद की जान बच गई लेकिन होली का चिता की अग्नि में जल कर भस्म हो गई।

    इसीलिए हर साल होलिका दहन के दिन होलिका जला कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा का जश्न और होलिका जैसे दुर्भावना के अंत का जश्न मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है, होलिका दहन के साथ ही आपको सभी तरह की बुराइयों, अहंकार और नकारात्मकता को भी होलिका दहन में भस्म कर देना चाहिए।


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    कई स्थानों पर होलिका दहन के दिन पूतना को जलाकर होली मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन कंस की असुरी पूतना ने बाल कृष्ण को अपना विष भरा स्तनपान करा कर उन्हें मारने की कोशिश की थी, जिसमें पूतना मारी गई थी और इसी विष पान के कारण भगवान श्री कृष्ण का वर्ण नीला हो गया था।


    कैसे करें होलिका और भक्त प्रहलाद की पूजा | (Holika Puja Vidhi)

    होलिका दहन करने से पहले होली की विधिवत पूजा की जानी चाहिए।


    1. पूजा करने के लिए होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें।

    2. और सभी पूजन सामग्री जैसे चावल, पुष्प, गुड, हल्दी, बताशे, गुलाल, नारियल रोली आदि का प्रयोग कर होलिका की पूजा करें और आप चाहे तो नए फसलो जैसे गेहूं की बालियों को भी सामग्री के रूप में अर्पित कर सकते हैं।

    3. पूजा करते समय सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और ॐ गणेशाय नमः मंत्र का जाप करें, इसके बाद होलिका की पूजा करने के लिए ॐ होलीकाय नमः मंत्र का उच्चारण करें,

      एवं इसी प्रकार प्रहलाद की पूजा करते समय ॐ प्रहलादाए नमः का पालन करें।

    4. इसके बाद आप भगवान विष्णु की भी पूजा करें और अब सूत लपेटते हुए 7 बार होलिका की परिक्रमा करें।

    5. होलिका पूजन के बाद जल से अघर्य देना चाहिए।

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    अंतिम शब्द | होलिका दहन कब है

    तो दोस्तों अब तो आप होलिका दहन कब है (Holika Dahan 2020 Date And Time), होलिका दहन की कहानी (Holika Dahan Story in Hindi) और होलिका दहन क्यों मनाया जाता है तथा इसका शुभ मुहूर्त क्या है (Holika Dahan 2020 Shubh Mahurat) और पूजन विधि (Holika Dahan Pujan Vidhi) भी आपको पता चल गया।

    अगर आपको होलिका दहन के बारे में दी गई यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि वह भी होलिका दहन का सही समय जान सके और होली कब जलानी है यह भी उन्हें पता चल सके।

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