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Mangal Pandey Martyrs Day 2020: मंगल पांडे बलिदान दिवस 8 April

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    Mangal Panday Martyrs Day 2020: मंगल पांडे बलिदान दिवस कब मनाया जाता है जानिए जीवन परिचय

    Mangal Panday Martyrs Day 2020 Date Hindi: देश को आजाद कराने के लिए कई वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी जिससे वे शहीद कहलाए तो कुछ ने देश के लिए अपना बलिदान दे दिया। आज देश को आजाद कराने वाले देश भक्तों की कुर्बानी को शहीदी दिवस और बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में 1857 की क्रांति को याद किया जाता है और 1857 की ज्वाला को भड़काने वाले क्रांतिवीर मंगल पांडे थे जिन्होंने पहली बार अंग्रेजों का विरोध किया।

    आज के इस लेख में हम मंगल पांडे के बलिदान दिवस (Mangal Panday Martyrs Day) पर आपको आजादी की चिंगारी जलाने वाले मंगल पांडे जी कौन थे और क्रांतिवीर मंगल पांडे का बलिदान दिवस कब मनाया जाता है और मंगल पांडे का जीवन परिचय (Mangal Pandey Biography in Hindi) के बारे में Information देने जा रहे हैं।

    Revolt 1857 Hero: Mangal Panday History and Biography in Hindi
    Revolt 1857 Hero: Mangal Panday History and Biography in Hindi

    मंगल पांडे बलिदान/शहीदी दिवस | Mangal Pandey Martyrs Day in Hindi

    भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा मंगल पांडे का बलिदान दिवस हर साल 8 अप्रैल को मनाया जाता है आपको बता दें कि मंगल पांडे ने भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम यानी 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


    वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैण्ट्री की 34वें रेजीमेंट में पैदल सेना के 1446वें नंबर के सिपाही थे।


    1857 की क्रांति की आग ऐसी धधकी की इसके 100 साल बाद ही भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद करा लिया गया।


    आइए अब आपको मंगल पांडे की जीवनी यानी बायोग्राफी के बारे में बताते हैं।

    Mangal Pandey Biography in Hindi | मंगल पांडे का जीवन परिचय

    भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में एक "भूमिहार ब्राह्मण" परिवार में 19 जुलाई 1827 को मंगल पांडे का जन्म हुआ था। मंगल पांडे के पिता का नाम दिवाकर पांडे और उनकी माता जी का नाम अभय रानी था।

    इतिहास में कई जगह उनका जन्म स्थान फैजाबाद के सुरूरपुर गांव उल्लेखित है। जमीदार परिवार से होने के बाद भी उन्होंने मात्र 18-22 साल की उम्र में ही ब्रिटिश आर्मी जॉइन कर ली।


    उन्होंने ने ही कहा था "यह आजादी की लड़ाई है.... गुजरे हुए कल से आजादी...... आने वाले कल के लिए...."


    मंगल पाण्डेय द्वारा सन् 1857 की क्रांति के दौरान आजादी के लिए एक ऐसा विद्रोह देखने को मिला जिसने सम्पूर्ण भारत में क्रांति की ज्वाला भड़काई। अंग्रेजी हुकुमत के ख़िलाफ़ बगावत करने के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा गद्दार और विद्रोही कहा गया, परन्तु हर भारतीय के लिए आज भी वे एक महान नायक (Hero) हैं।


    Mangal Pandey को आज ही के दिन को अंग्रेजों द्वारा फांसी के तख्ते पर लटका दिया था।


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    1857 का विद्रोह | History of 1857 Revolt in Hindi:

    1857 का विद्रोह बंदूक के कारण हुआ जो स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांति के रूप में उभर कर आया, आपको बता दें कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में सिपाहियों को जो बंदूके दी गई थी उस एनफील्ड पी-53 राइफल में गोली भरने के लिए कारतूस को दांत से काटकर खोलना पड़ता था और कारतूस का बाहरी आवरण चर्बी का बना होता था जिससे कारतूस पानी के सीलन से बचा रहता था।


    ब्रिटिश इंडियन आर्मी में ज्यादातर भारतीय सैनिक हिंदू और मुसलमान थे जब उन्हें यह पता चला कि कारतूस पर लगी चर्बी गाय और सुअर के मांस से बनी हुई है, (तो ऐसे में गाय हिंदुओं की पवित्र पशु थी और सूअर से मुसलमान घृणा करते थे) यह बात सुनकर सैनिकों में विद्रोह फैल गया उस समय मंगल पांडे बैरकपुर में 34वी रेजीमेंट बटालियन में सिपाही के तौर पर तैनात थे यह जानकारी उन्हें वहां पानी पिलाने वाले एक हिंदू सैनिक से मिली।


    जिसके बाद मंगल पांडे से रहा नहीं गया और उन्होंने 29 मार्च 1857 को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। और बाकी सिपाहियों को भी समझाया कि अंग्रेज उनका धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं ऐसे में उन्हें ब्रिटिश इंडियन आर्मी को छोड़ देना चाहिए यह बात जब रेजीमेंट मेजर को पता चली तो मेजर ह्यूजेसन ने मंगल पांडे को पकड़ने के लिए कुछ सैनिकों को भेजा।


    और जब एक लेफ्टिनेंट घोड़े पर बैठकर मंगल पांडे की तरफ आया तो मंगल पांडे ने उस पर गोली चला दी जिससे बचते हुए वह घोड़े से कूद गया इसके बाद मंगल पांडे ने उस पर तलवार से हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया और जब उसकी सहायता के लिए दुसरे ब्रिटिश अधिकारी आए तो उन्हें भी मंगल पांडे ने मार दिया।


    जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया और ईश्वरी प्रसाद से उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कहा गया परंतु उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। परन्तु बाद में जब उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के अंग्रेजी सैनिक गिरफ्तार करने आए तब उन्होंने अपने सभी साथी खुलकर विरोध करने को कहा, परन्तु उनमें से कोई भी आगे नहीं आया इस पर मंगल पांडे ने खुद को ही अपनी बंदूक से निशाना लगाया और पैर के अंगूठे से ट्रिगर दबाया, जिसमें मंगल पांडे के कपड़े जल गए और उन्हें गिरफ्तार करके उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया।


    न्यायालय द्वारा उन्हें 18 अप्रैल के दिन फांसी की सजा निर्धारित की गई है परंतु अंग्रेजों ने विद्रोह भड़कने के डर से मंगल पांडे को 08 अप्रैल 1857 के दिन ही फांसी देने को कहा परंतु बैरकपुर छावनी का कोई भी जल्लाद मंगल पांडे के पवित्र खून से अपने हाथ नहीं रंगना चाहता था इसीलिए मंगल पांडे को फांसी देने के लिए जल्लाद कोलकाता से बुलाए गए और उन्हें फांसी दे दी गई।


    और बाद में ईश्वरी प्रसाद को दिया आज्ञा का पालन ना करने के जुर्म में फांसी दे दी गई जिससे अंग्रेजों को यह लगा कि अब वह लोग उन्हीं से भय खाएंगे परंतु परिणाम इससे उल्टा हुआ लोगों के बीच अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ विद्रोह और बढ़ गया। उस समय तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई और कई दूसरे स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे ऐसे में देश भर में यह चिंगारी आग बनकर उभरी और 100 साल के भीतर ही देश को आजाद करा लिया गया।


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    Mangal Pandey FAQs in Hindi | मंगल पाण्डेय से सम्बंधित प्रश्नोत्तर

    मंगल पांडे को क्यों दी गई फांसी?

    29 मार्च 1857 को, 34 वीं रेजीमेंट बटालियन के एक भारतीय सिपाही मंगल पांडे ने कलकत्ता के पास बैरकपुर में दो ब्रिटिश अधिकारियों - ह्यूजेसन और बाऊ को मार दिया था। भारतीय सैनिकों ने मंगल पांडे को गिरफ्तार करने के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, दोषी ठहराया गया तथा फांसी दी गई।

    मंगल पांडे के इस व्यवहार का मुख्य कारण एनफील्ड पी-53 राइफल में इस्तेमाल किए गए एक नए प्रकार के बुलेट कारतूस थे।

    मंगल पांडे को फांसी कब दी गई थी?

    8 अप्रैल 1857

    मंगल पांडे की मृत्यु कब हुई?

    8 अप्रैल 1857

    मंगल पांडे ने 1857 के विद्रोह में क्या भूमिका निभाई?

    मंगल पांडे को ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़े होने और 1857 के भारतीय विद्रोह की चिंगारी को भड़काने के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जिसने भारत में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की नींव रखी। 19 जुलाई, 1827 को एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे पांडे 18 साल की उम्र में ही एक सैनिक के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शामिल हो गए थे।

    अन्तिम शब्द

    तो दोस्तों अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मंगल पांडे का बलिदान/शहादत दिवस कब मनाया जाता है (Mangal Panday Martyrs Day 2020) और इनकी जयंती कब आती है अगर आपको मंगल पांडे की बायोग्राफी और हिस्ट्री (Mangal Pandey Biography in Hindi) के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी के बारे में जानकारी पता चल सके।

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