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MAHA SHIVARATRI 2020: महाशिवरात्रि कब है शिवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त शिव मंत्र पूजा विधि

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    Mahashivratri: 2020 में शिवरात्रि कब की है Date जानिए व्रत पूजन विधि और महाशिवरात्रि कहानी और मन्त्र

    Mahashivratri Date 2020 Information in Hindi: हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार महाशिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ने वाली शिवरात्रि के दिन मनाया जाता है। तो वही अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से महाशिवरात्रि फरवरी या मार्च के महीने में पड़ती है। और इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी 2020 को शुक्रवार के दिन है।

    महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए और भगवान। शिव शंकर को प्रसन्न करने के लिए शिवभक्त पूरी श्रद्धा से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं और विधिवत् पूजा भी करते है।

    Mahashivratri kab hai 2020 Date Time Shivaratri Puja Shubh Muhurat Mantra Puja Vidhi Vrat Vidhi
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    महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के धार्मिक त्योहारों में से एक है, महाशिवरात्रि साल में केवल एक बार ही आती है। साथ ही शिवरात्रि सावन के महीने में मनाई जाती है। 2020 में शिवरात्रि कब की है यह तो आपको पता चल गया, आइए अब आपको महाशिवरात्रि का त्यौहार क्यों और कैसे मनाया जाता है? तथा इसका शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और कहानी एवं मंत्रों के बारे में भी जानकारी देते हैं।


    कैसे मनाए महाशिवरात्रि और रखे व्रत | Mahashivratri Vart

    महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को अपना पूरा समय भगवान शिव-शंभू के चरणों में पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ बिताना चाहिए। इस दिन व्रत रखने का एक खास महत्व है बताया जाता है इस दिन महाशिवरात्रि व्रत रखने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को जरूर पूर्ण करते हैं। भारत में बड़े पैमाने पर शिव भक्तों द्वारा महाशिवरात्रि के दिन भोले शंकर का व्रत किया जाता है।

    • इस दिन सुबह सवेरे उठकर स्नान करके खुद को शुद्ध करें और स्वच्छ कपड़े पहने।

    • इसके बाद भगवान शिव के शिवलिंग पर जाकर दूध शहद का अभिषेक करें और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।

    • व्रत करने वाले भक्त अपने व्रत काल में चावल, आटे अथवा दाल का सेवन ना करें।

    • अगर आप बिना खाए पिए व्रत नहीं रख सकते तो दिन में फल फ्रूट दूध एवं चाय आदि का सेवन कर सकते हैं, आप चाहे तो शाम को कुट्टू के आटे से बनी पूरी सिंघाड़े के आटा और आलू एवं लौकी का हलवा भी ग्रहण कर सकते हैं।

    • अगर आप निराहार व्रत रखते हैं तो काफी अच्छी बात है निराहार व्रत करने वाले भक्तों को शिवरात्रि के दिन स्वच्छ पानी से स्नान कर व्रत रखना चाहिए। शिवरात्रि के दिन पूरी रात जागरण करना काफी महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है बताया जाता है इससे महापुण्य फल प्राप्त होता है।

    यहां जानिए आखिर क्यों आर्य समाज के स्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने महाशिवरात्रि के जागरण में शिव के अस्तित्व पर उठाए थे सवाल?

    महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त क्या है | Mahashivratri Shubh Mahurat

    इस बार महाशिवरात्रि का त्यौहार दो दिन मनाया जाएगा ऐसे में आपको महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त क्या है यह जरूर जान लेना चाहिए। महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त:
    महाशिवरात्रि 2020 तिथि (Date) समय (Time)
    महाशिवरात्रि 2020 तिथि: 21 फरवरी 2020 (शुक्रवार) -
    महाशिवरात्रि निशिता काल पूजा समय: 22 फरवरी 2020 (शनिवार) 12:09 AM से 12:59 AM
    शिवरात्रि पारण समय: 21 फरवरी 2020 (शुक्रवार) 06:53 AM से 03:25 PM
    रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: 21 फरवरी 2020 (शुक्रवार) 06:15 PM से 09:24 PM
    रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय: 22 फरवरी 2020(शनिवार) 09:24 PM से 12:34 AM
    रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: 22 फरवरी 2020 (शनिवार) 12:34 AM से 03:44 AM
    रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: 22 फरवरी 2020 (शनिवार) 03:44 AM से 06:53 AM
    चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ: 21 फरवरी 2020 (शुक्रवार) शाम 05 बजकर 20 मिनट तक
    चतुर्दशी तिथि समाप्त: 22 फरवरी 2020 (शनिवार) रात 07 बजकर 02 मिनट तक

    महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय और मंत्रों का करें जाप

    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    ॐ नमः शिवाय
    अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
    दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
    ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः
    ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
    तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

    महाशिवरात्रि व्रत शिवपूजन पूजन विधि और सामग्री:

    पूजा सामग्री: पुष्प, धतूरा, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, बेलपत्र, शहद, गंगाजल, कपूर, धूप, रुई, चंदन, पंचमेवा, जनेऊ और दक्षिणा आदि।


    1. शिवरात्रि के दिन सुबह सवेरे उठकर स्वच्छ और शुद्ध जल से स्नान करके शरीर को शुद्ध करें और व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।

    2. जिसके बाद मंदिर या घर में स्थापित भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाएं अथवा पंचामृत से स्नान कराएं और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।

    3. भगवान शिव को पुष्प, धतूरा, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, बेलपत्र, शहद, गंगाजल, कपूर, धूप, रुई, चंदन, पंचमेवा, जनेऊ और दक्षिणा आदि एक-एक कर चढ़ाए।

    4. अब भगवान शिवजी को धूप और दीपक दिखाएं।

    5. और इसके बाद कपूर से आरती कर सभी में प्रसाद बांटें।

    6. इसके पश्चात रात्रि के समय चारों पहर भगवान शिव। का पूजन करें। और शिव जागरण कर अगले दिन सुबह उठकर ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।

    क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?

    महाशिवरात्रि मनाए जाने के पीछे मुख्यतः दो मुख्य कहानियां हैं जिनके कारण महाशिवरात्रि का यह महापर्व मनाया जाता है। आइए आपको एक-एक करके दोनों कहानियों के बारे में जानकारी देते हैं।

    शिव और भक्ति का मिलन:
    महाशिवरात्रि की रात को शिव जागरण की परम्परा सदियों से चली आ रही है। जिसके अंतर्गत पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य का जागरण करते हैं। बताया जाता है इस दिन शिव जी की शादी का उत्सव मनाया जाता है। क्योंकि मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि के दिन ही शिव जी का शक्ति के साथ विवाह हुआ था। इस दिन भगवान शिव अपना बैरागी जीवन त्याग कर गृहस्थ बने थे। बताया जाता है इसी कहानी के अनुसार ही शिवरात्रि के 15 दिन बाद ही होली का त्यौहार भी मनाया जाता है।

    शिवलिंग का प्रकट होना:
    एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार यह भी बताया जाता है कि शिवरात्रि के दिन ही भगवान भोलेनाथ के रूप में शिवलिंग 64 अलग-अलग जगहों पर पहली बार प्रकट हुए थे। हालांकि इन 64 में से हम अब तक 12 स्थानों के बारे में ही जान पाए हैं जिन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग। के नाम से जानते हैं जो इस प्रकार है:
    1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
    2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
    3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
    4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
    5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
    6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
    7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
    8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
    9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
    10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
    11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
    12. घृष्णेश्वर मन्दिर ज्योतिर्लिंग
    बताया जाता है यह लिंग ऐसे थे जिनका ना कोई आदी था और ना ही कोई अंत, यह लिंग अग्नी के रूप में प्रकट हुए थे इसलिए इन्हें ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।

    अंतिम शब्द

    दोस्तों अब तो आप समझ ही गए होंगे महाशिवरात्रि कब क्यों और कैसे मनाई जाती है? इसका शुभ मुहूर्त तथा व्रत पूजन विधि क्या है? साथ ही हमने यहां आपको महाशिवरात्रि के लिए कुछ मंत्रों की भी जानकारी दी है। अगर आपको महाशिवरात्रि के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें। ताकि उन्हें भी महाशिवरात्रि की इस कहानी और शिवरात्रि के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
    आप सभी को HaxiTrick.com की तरफ से महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
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