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Navratri 2021: नवरात्रि कब से शुरू हैं? घटस्थापना, कथा, महत्व और पूजन विधि

Chaitra Navratri 2021 Date: इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक रहेगी और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त भी 13 अप्रैल को ही है। आइये इसके बारें में विस्तार से जानते है...

    नवरात्रि 2021 कब से शुरू है? किस दिन होगी अष्टमी और नवमी, जानिए महत्व और पूजन विधि

    Chaitra Navratri 2021 Date: इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होकर 22 अप्रैल तक रहेगी और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त भी 13 अप्रैल को ही है। हिंदू पंचांग कैलेंडर के अनुसार इस साल नवरात्रि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को है, इस दिन अश्विनी नक्षत्र और विश्कुंभ योग बन रहा है इसलिए यह घटस्थापना का शुभ मुहूर्त है।

    घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल 2021 मंगलवार को सुबह 5:58 से सुबह 10:14 तक कुल 4 घंटे 16 मिनट का है इस बीच घटस्थापना करना शुभ होगा इसके अलावा सुबह 11:56 से दोपहर 12:47 के बीच में घट स्थापना अभिजित मुहूर्त है।

    इसके साथ ही प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल 2021 को सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर अगले दिन 13 अप्रैल 2021 को सुबह 10:16 बजे समाप्त होगी। इस साल नवरात्रि मंगलवार के दिन से आरंभ हो रही है इसलिए माता की सवारी अश्व (घोड़ा) मानी जाएगी।

    Navratri 2021 Kab Se Hai Date
    Navratri 2021 Kab Se Hai Date

    आइए अब आपको यह भी बताते है की इस नवरात्रि में किस दिन कौन सी माँ की पूजा की जाएगी और उस दिन उन्हें प्रसन्न करने के लिए कौन सा भोग लगाए? तथा घट स्थापना का शुभ महूर्त और विधि और महत्व क्या है के बारे में जानने की कोशिश करते है।


    नवरात्रि के नौ दिन इन देवियों की होगी पूजा लगाए ये भोग:

    नवरात्रि के 9 दिन इन नौ अलग अलग माताओं की होगी पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के लिए इन चीजों का लगाया जाएगा भोग


    दिनांकनवरात्रिमाता पूजनभोग
    13 अप्रैलपहला दिन: प्रतिपदामाँ शैलपुत्रीघटस्थापना, शुद्ध देसी घी अर्पित
    14 अप्रैलदूसरा दिन: द्वितीयामाँ ब्रह्मचारिणीशक्कर, सफेद मिठाई, फलों, मिश्री आदि
    15 अप्रैलतीसरा दिन: तृतीया,माँ चंद्रघण्टादूध से बने मिष्ठान, खीर आदि
    16 अप्रैलचौथा दिन: चतुर्थीमाँ कुष्मांडामालपुआ का भोग
    17 अप्रैलपांचवा दिन: पंचमीमाँ स्कंदमाता अच्छी सेहत के लिए केले का भोग
    18 अप्रैलछठा दिन: षष्टीमाँ कात्यायनीजीवन में मधुरता के लिए शहद का भोग
    19 अप्रैलसातवां दिन: सप्तमी,माँ कालरात्रिगुड़ या इससे बनी मिठाई
    20 अप्रैलआठवां दिन: अष्टमीमाँ महागौरीनारियल
    21 अप्रैलनौवां दिन: दुर्गा नवमीमाँ सिद्धिदात्रीतिल या अनार का भोग
    22 अप्रैलदसवां दिन: व्रत पारणव्रत पारण-


    चैत्र नवरात्रि का महत्व:

    पौराणिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का जन्म चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हुआ था तथा ब्रह्मा जी द्वारा इस सृष्टि का निर्माण कार्य भी दुर्गा माँ के कहने पर ही शुरू किया गया था।


    हिंदू केलेंडर के अनुसार इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल में पड़ने वाली नवरात्र) से ही हिंदू नए साल की शुरुआत होती है और गर्मियों का मौसम आना शुरु हो जाता है। मौसम में बदलाव आने के कारण कई तरह के रोग/और वायरस उत्पन्न होने लगते हैं और इन दिनों होने वाले हवन, पूजन से शरीर, मन और वातावरण को नए मौसम के ल‌िए तैयार करने के ल‌िए व्रत करने का रिवाज़ भी है।


    इस नवरात्रि का सम्बंध सबसे ज्यादा भगवान विष्णु से है, बताया जाता है की चैत की नवरात्री के तीसरे दिन ही नारायण ने अपने पहले अवतार मत्सय के रूप में भूलोक पर अवतरित हुए थे। और यह भी माना जाता है की भगवान विष्णु के सातवें अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म भी इसी नवरात्रि के दौरान हुआ था।


    नवरात्र घट स्थापना पूजा विधि | Navratri Kalash Sthapna:

    • नवरात्र के पहले दिन (शुक्ल प्रतिपदा) ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।

    • इसके बाद घर में बनें मंदिर या किसी दुसरी जगह पर साफ मिट्टी से बेदी बना लें। वेदी में गेहूँ और जौ मिला कर बो लें।

    • वेदी पर या फिर उसके आस-पास एक मिट्टी, सोने, चांदी या फिर तांबे का कलश स्थापित करें।

    • इसके बाद उस कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुख पर सूत्र बांधें।

    • कलश की स्थापना करने के बाद भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद बनाई हुई वेदी के किनारे पर देवी मां की मूर्ति की स्थापना करें।

    • इसके बाद मूर्ति की अपने हिसाब से पूजन करें।

    • और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तथा देवी अम्बे की आरती करने के बाद प्रसाद सब में बांट दें।

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    शारदीय नवरात्र 2021 की जानकारी (Shardiya Navratri 2021 Date)

    Shardiya Navratri 2021 Date: इस साल की शारदीय नवरात्र 7 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक रहेगी। और दिनांकः 15 अक्टूबर को ही महा नवमी और दशहरा (Dussehra 2021 Date) यानी विजयादशमी मनाई जायेगी।

    वैसे तो साल में कुल 4-5 नवरात्रि आती हैं लेकिन इन सभी में से चैत और शारदीय नवरात्रि का अपना ही महत्व है, मान्यता है कि इसकी शुरुआत भगवान राम ने की थी। लंकापति रावण का वध करने से पहले श्री राम ने 9 दिनों तक मां की विधि विधान पूजा की और फिर दसवें दिन रावण का वध कर दिया था जिसे शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता हैं।


    शारदीय नवरात्रि का महत्व और कथा:

    हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर नामक असुर को ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त था जिसके अनुसार उसका वध किसी भी देव, दानव या पुरुष द्वारा नहीं किया जा सकेगा। इस अहंकार में आकर और उसने तीनों लोगों पर आक्रमण कर दिया।

    ऐसे में सभी देवताओं समेत ब्रह्मा विष्णु महेश ने महिषासुर का अंत करने के लिए देवी माँदुर्गा को जन्म दिया तत्पश्चात देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ, यह युद्ध काफी समय तक चला और अंततः 9 दिनों के भयंकर युद्ध के बाद दसवें दिन मां दुर्गा के हाथों महिषासुर का वध कर दिया गया।

    और मां दुर्गा की इस विषय को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है और हर साल इसे मनाया जाता है।


    दूसरी कथा: अन्य कथा त्रेतायुग में भगवान राम की लंका पर चढ़ाई और आक्रमण से पहले मां दुर्गा की आराधना करना ही माना जाता है बताया जाता है कि उन्होंने शरद मास के इन 9 दिनों तक शक्ति की देवी मां भगवती की पूजा आराधना की थी।

    जिसके बाद मां दुर्गा स्वयं उनके सामने प्रकट हुई और उन्हें युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया तत्पश्चात भगवान राम ने रावण का अंत कर लंका पर विजय प्राप्त की तभी से इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।

    शारदीय नवरात्र बुराई पर अच्छाई के प्रत्येक को दर्शाता है इस त्योहार से जुड़ी खास कथाएं काफी ज्यादा प्रसिद्ध है।


    नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान:

    शारदीय/चैत्र नवरात्रि में आप अपने हिसाब से व्रत रख सकते हैं लेकिन अगर आप नवरात्री के सभी नियमों का पालन करते हुए व्रत रखना चाहते है तो यह आज के जमाने के अनुसार थोड़ा सा कठिन हो सकता है।


    आइये हम आपको नवरात्र में व्रत रखने के कुछ नियमों के बारे मे आपको बता देते है।


    • 👉 नवरात्रि में व्रत रखने वाले व्यक्ति को जमीन पर सोना होता है।

    • 👉 इन दिनों ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।

    • 👉 भोजन के रूप में फलाहार ही करना होता है।

    • 👉 व्रत रखने वाले को क्रोध, लालच, मोह आदि नही करना का चाहिए।

    • 👉 माता की पूजा, आह्वान, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रात:काल में शुभ होते हैं, इसलिए इन्हें सुबह सवेरे ही कर लेना चाहिए।

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    नवरात्रि पर पूजी जानी वाली नौ देवियाँ:

    1. माँ शैलपुत्री
    2. ब्रह्मचारिणी
    3. चंद्रघण्टा
    4. कूष्मांडा
    5. स्कंद माता
    6. कात्यायनी
    7. कालरात्रि
    8. महागौरी
    9. सिद्धिदात्री

    नौरात्रि के इस नौ दिनों उपवास और पूजा करने के बाद नवमी अथवा दसवीं पूजन किया जाता है।

    इस दिन सुबह कन्या पूजन किया जाता है तथा उन्हे भोग लगाया जाता है। नवरात्रि के दिनों मे माता की चौकी लगाई जाती है और जगराते किए जाते है।

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