गुरु गोविंद सिंह बर्थडे 2020: कब, क्यों और कैसे मानते है Guru Gobind Singh Jayanti Gurpurab in Hindi

    गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती गुरपूरब कब क्यों और कैसे मनाते हैं - Guru Gobind Singh Birthday 2010 Gurpurab in Hindi

    गुरु गोबिंद सिंह बर्थडे २०२०: कब क्यों और कैसे मनाते हैं: आने वाला नया साल 2020 गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती (Gurpurab) के साथ ही त्योहारों का आगमन होगा. आपको बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह सिक्खों के दसवें गुरु थे इस साल हम गुरु गोबिंद सिंह जी की 353वी जयंती यानि गुरपूरब मनाने जा रहे हैं. जो इस साल 02 जनवरी 2020, को वीरवार के दिन है.

    गुरु गोबिंद सिंह की जयंती का सिख समुदाय सहित दूसरे धर्मों में भी विशेष महत्व है वैसे तो गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को हुआ था परंतु उनके जन्मदिन (बर्थडे) को दिसंबर या जनवरी महीने में कभी कभी दोनों में मनाया जाता है.

    गुरु गोबिंद सिंह बर्थडे Guru Gobind Singh Birthday Jayanti 2020 Gurpurab in Hindi
    गुरु गोबिंद सिंह बर्थडे Guru Gobind Singh Jayanti 2020 Gurpurab in Hindi

    दोस्तों तो आज के इस लेख में हम आपको Guru Gobind Singh Gurpurab 2020 के बारें में All Information in Hindi यानि गुरपूरब (Gurpurab) या गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती कब क्यों और कैसे मनाते हैं तथा गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवनी हिंदी में बताने वाले हैं, तो चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि When, Why and How Guru Gobind Singh Birthday Celebrated in Hindi, और Who is Guru Gobind Singh Ji Biography in Hindi.

    गुरु गोबिंद सिंह जयंती (बर्थडे) २०२० | Guru Gobind Singh Gurpurab 2020 in Hindi

    1. कब मनाते हैं: वैसे तो गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 में हुआ था परंतु हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार आपका जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 विक्रमी संवत में हुआ था, सिख कैलेंडर नानकशाही के अनुसार 23 पोह की तारीख को गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ है, इस साल गुरू गोबिंद सिंह जयंती (बर्थडे) 2 जनवरी 2020 को मनाई जा रही है और इस दिन वीरवार है.

    2. क्यों मनाते हैं: गुरु गोबिंद सिंह जी के बर्थडे को ही गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती यानि गुरपूरब (Gurpurab) के रूप में मनाया जाता है, इस साल हम गुरु गोबिंद सिंह जी की 353वीं जयंती मनाने जा रहे हैं.

    3. कैसे मनाते हैं: गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती को सिख समुदाय में काफी धूमधाम से मनाया जाता है, इस खास अवसर पर गुरुद्वारों में कीर्तन और सुबह-सवेरे प्रभात फेरीयों का आयोजन किया जाता है, साथ ही इस दिन लंगर आदि का भी आयोजन किया जाता हैं. साथ ही इस दिन खालसा पंथ की झांकियां निकाली जाती हैं और गुरुद्वारों में सेवा और घरों में कीर्तन भी करवाए जाते हैं.

    कौन थे गुरु गोबिंद सिंह जी जीवनी इन हिंदी

    1. कौन थे गुरु गोबिंद सिंह जी गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के पुत्र थे, आपका बचपन का नाम गोबिंद राय था, जो बाद में सिखों के दसवें और आखिरी गुरु बने और आपने सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को भी पूरा किया था. वे एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता भी थे।

    2. जब गोबिंद सिंह जी नौ साल के थे तब इस्लाम ना स्वीकारने पर औरंगजेब ने उनके पिता और सिक्खों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी का सिर कटवा दिया था। श्री गुरु तेघ बहादुर जी के बलिदान के बाद 11 नवम्बर 1675 को वे सिक्खों के दसवें गुरू बने.

    3. ज्यादा जानकारी के लिए पढ़े: गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बारें में जानें, क्यों कहलाते हैं ये ‘हिंद दी चादर’

    4. जन्म गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 26 दिसंबर 1666 को सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के यहां हुआ, उन्हें बचपन में गोबिंद राय के नाम से जाना जाता था.

    5. आरंभिक शिक्षा गुरु गोबिंद सिंह जी की आरंभिक शिक्षा की शुरुआत पटना से दूर सन 1672 में हिमालय के शिवालिक पहाड़ियों में स्थित चक्क नानकी (जिसे अब आनंदपुर साहिब के नाम से जाना जाता है) नामक स्थान से हुई, यहां इन्होंने संस्कृत के साथ-साथ फारसी और अरबी की शिक्षा भी ग्रहण की तथा शस्त्रों का ज्ञान और सैनिक कौशल भी सीखा.

    6. गुरु गोबिंद सिंह जी के 5 ककार गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा सिखों को 'क' शब्द से शुरू होने वाले पांच चीजों (जिन्हें ककार कहा जाता है) को हमेशा धारण करने की अनिवार्यता को बताते हुए यह पांच चीजें बताई जिनके बिना खालसा अधूरा माना जाता है वह है:- केश, कला, कृपाण, कंघा और कच्छा.

    7. गुरु गोबिंद सिंह जी का विवाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन काल में तीन शादियां की उनका पहला विवाह 10 साल की उम्र में 21 जून 1677 को माता जीतो के साथ हुआ, जिनसे इन्हें 3 पुत्र प्राप्त हुए.

      इन तीनों पुत्रों के नाम साहिबजादें जुझार सिंह, साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह था.

      दूसरा विवाह 4 अप्रैल 1684 को 17 वर्ष की आयु में माता सुंदरी से हुआ, माता सुंदरी से इन्हें 1 पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम अजीत सिंह था, जिसके बाद उनका तीसरा और अंतिम विवाह 15 अप्रैल 1700 को अपनी 33 वर्ष की आयु में माता साहिब देवां से हुआ, हालांकि उन्हें इनसे कोई संतान प्राप्त नहीं हुई.

    8. खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना सन 1611 में बैसाखी के दिन की, इस दौरान उन्होंने सिखों की एक सभा में सबसे पूछा कि अपने सिर का बलिदान कौन देना चाहता है, इस पर एक स्वयंसेवक सामने आया तो गुरु गोबिंद सिंह जी उसे पास ही के एक तंबू में ले गए और कुछ देर बाद जब बाहर आए तो उनके तलवार खून से लथपथ थी.

      और फिर गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक बार वही प्रश्न दोहराया और एक और स्वयंसेवक को अपने साथ तंबू में ले गए और खून से सनी तलवार के साथ बाहर आए इसी तरह वह अपने साथ वही प्रश्न कर एक एक करके दो और स्वयंसेवकों को तंबू में ले गए.

      और पांचवे स्वयंसेवक भी जब इसी सवाल के पूछे जाने पर गुरु गोबिंद सिंह जी के साथ तंबू में गया तो कुछ देर बाद गुरु गोबिंद सिंह जी उन सभी स्वयंसेवकों को एक साथ बाहर लेकर आए और उन्होंने इसे पंज प्यारे या पहले खालसा का नाम दिया.

      इन पांच खालसा के बनने के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी को छठा खालसा घोषित किया गया और उनका नाम गुरु गोबिंद राय से गुरु गोबिंद सिंह कर दिया गया


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    10. औरंगजेब से युद्ध 27 दिसंबर सन 1708 को गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों बेटों (साहिबजादों) को दीवार में चुनवा दिया गया, जिसके बाद 8 मई 1705 में मुक्तसर में गुरुजी और मुगलों के बीच हुए भयानक युद्ध में गुरु गोबिंद सिंह जी की विजय हुई, आपने मुगलों या उनके सहयोगियों के साथ 14 युद्ध लड़े। धर्म के लिए उन्होंने अपने समस्त परिवार का बलिदान दे दिया, और अक्टूबर 1706 में जब गुरुजी दक्षिण की ओर गए तो औरंगजेब की मृत्यु की खबर मिली.

    11. गुरु नानक देव जी की मृत्यु कैसे हुई औरंगजेब की मृत्यु के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने बहादुर शाह को बादशाह की गद्दी पर विराजमान करने में काफी सहायता की. गुरु गोबिंद सिंह जी और बहादुर शाह के आपसी संबंधों को देखते हुए नवाब वाजिद खां घबरा गया जिसके फलस्वरूप उसने सिखों के दसवें गुरु के पीछे अपने पठान छोड़ दिए और अंत में 7 अक्टूबर 1708 को इन पठानों के धोखे से किए गए वार के कारण गुरु गोबिंद सिंह जी नांदेड़ साहिब में दिव्य ज्योति में लीन हो गए.

    12. गुरु ग्रंथ साहिब अपने अंतिम समय में गुरु जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को ही सिखों को अपना गुरु मानने को कहा और खुद भी मत्था टेका.

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    गुरु गोबिंद सिंह जी के अनमोल विचार

    • वे इंसानों से प्रेम करना ही ईश्वर की सच्ची आस्था एवं भक्ति मानते थे.

    • वह ऐसे लोगों को खासा पसंद किया करते थे जो केवल सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले हैं.

    • वह अज्ञानता को एक अभिशाप मानते हुए कहा करते थे कि अज्ञानी व्यक्ति एक अंधे के समान होता है जिसे मूल्यवान से मूल्यवान चीजों की कदर नहीं होती.

    • उनका मानना था कि भगवान के नाम के अलावा मनुष्य का कोई मित्र नहीं है और भगवान के सेवक इसी का चिंतन करते हैं.

    • गुरु गोबिंद सिंह जी अपने मानवीय जन्म को ईश्वर द्वारा अच्छे कर्मों को करने और बुरे कर्मों को दूर करने के लिए बताया है.


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    अंतिम शब्द

    दोस्तों अब तो आप समझ ही गए होंगे कि गुरपूरब (Gurpurab) या गुरु गोबिंद सिंह बर्थडे २०२० यानि गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती कब क्यों और कैसे मनाते हैं (When, Why and How Guru Gobind Singh Birthday Gurpurab Celebrated in Hindi) तथा गुरु गोबिंद सिंह जी कौन थे जीवनी हिंदी में (Who is Guru Gobind Singh Ji Biography in Hindi) और गुरु गोबिंद सिंह जी के अनमोल विचार क्या है.

    अगर आपको हमारी गुरु गोबिंद जी के बर्थडे 2020 की यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भी गुरु गोबिंद सिंह जी के त्याग बलिदान और महानता के बारे में पता चल सके.
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