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Holi 2020 Date: रंग वाली होली कब, क्यों और कैसे मानते है जानिए कहानी

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    Holi Date: 2020 में रंग वाली होली कब है, क्यों और कैसे मानते है जानिए कहानी/कथा हिंदी में

    Holi Kab Hai 2020 Me Date: होली कब है? कब है होली??? यह डायलॉग तो आपने जरूर सुना होगा, गब्बर सिंह के इस सावल का ज़वाब आज हम आपको देने जा रहें है अगर आप में से कोई गब्बर के गाँव का है तो उन्हें होली की तारीख़ उन्हें जरूर बता देना।😛😜😝😂

    होली हिंदुओं का पवित्र और धार्मिक त्यौहार है जिसका संबंध सीधे-सीधे भगवान विष्णु से है, होली का त्यौहार भारत ही नहीं अपितु नेपाल और कई दूसरे देशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, होली से एक दिन पहले वाली शाम को होलिका दहन का भी अपना ही एक महत्व है और इसके पीछे एक धार्मिक कथा भी है।

    2020 Me Holi Kab Kyu aur Kaise Manate Hai Kahani Katha Mahatva
    2020 Me Holi Kab Kyu aur Kaise Manate Hai Kahani Katha Mahatva

    होली रंगों का त्योहार है इसलिए इसे रंग महोत्सव या फगवा भी कहा जाता है और साथ ही इस त्यौहार पर सभी गिले-शिकवे भुला कर लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं आज के इस लेख में हम आपको 2020 में रंग वाली होली कब है होली क्यों मनाते हैं और होली कैसे मनाई जाती हैं यह बताने जा रहे हैं।


    कब मनाया जाता है होली का त्यौहार | Holi 2020 Date

    रंग वाली होली (धुलेंडी) हर साल चैत्र मास की कृष्ण की प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है, तो वहीं रंग वाली होली से एक दिन पहले होलिका जलाई जाती जो फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाते है। और हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से ही होलाष्टक भी शुरू हो जाता है।

    इस साल २०२० में होली 10 मार्च 2020 को मंगलवार के दिन मनाई जा रही है, और होलिका दहन सोमवार के दिन 09 मार्च को होगा।

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    पूरे भारत में (बृज, बरसाना, द्वारका, वृंदावन, उत्तर प्रदेश, के कई अलग-अलग हिस्सों, बिहार, बंगाल, राजस्थान) एवं नेपाल में होली 10 मार्च 2020 को है और 2021 में होली 29 मार्च को है तो वहीं होलिका दहन 28 मार्च को है।


    होलिका दहन तिथि और शुभ मुहूर्त:
    क्रमांक होली प्रकार होली तिथि (Date)
    1. लड्डु होली व होली की द्वितीय चौपाई 03 मार्च 2020
    2. रंगीली गली में लठामार होली 04 मार्च 2020
    3. नंदगांव की लठामार होली 05 मार्च 2020
    4. फूलों की होली 06 मार्च 2020
    5. गोकुल में छड़ीमार होली 07 मार्च 2020
    6. होलिका दहन 09 मार्च 2020
    7. अबीर गुलाल होली 10 मार्च 2020
    8. नंदगांव में हुरंगा 11 मार्च 2020


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    होली क्यों मनाई जाती है | Why Holi is Celebrated in India

    होली मनाने के पीछे वैसे तो कई कारण है और होली को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित है जिनमें से भक्त प्रहलाद की कहानी सबसे ज्यादा प्रमुख मानी जाती है। साथ ही होली का त्यौहार फसल पकने की खुशी लेकर आता है। भारत में गेहूँ की फ़सल पकने की ख़ुशी में होली का त्यौहार मनाया जाता है।

    त्रेता युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार में होली में रंगोत्सव का रंग चढ़ाया, बताया जाता है कि भगवान श्री कृष्ण होली के दिन ही राधा के गांव बरसाने उन्हें और गोपियों को रंग लगाने और उनके साथ होली खेलने जाया करते थे।


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    होली की सामाजिक मान्यता:

    होली का त्यौहार बसंत की बहार लेकर आता है और इसके आने पर सर्दी ख़त्म हो जीती है। भारत के कुछ हिस्सों में होली का पर्व बसंत की फसल पकने प्रतीक माना जाता है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुसी में होली मानते है। होली को वसंत महोत्सव या रंग महोत्सव भी कहा जाता हे।


    होली पर भक्त प्रह्लाद की कथा/कहानी | Holi Story in Hindi

    पौराणिक कथाओं और धार्मिक पुस्तकों के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नामक एक असुर राजा हुआ करता था, जिसे यह वरदान प्राप्त था कि उसे ना ही कोई इंसान मार सकता है और ना ही कोई जानवर अपने वरदान के घमंड में आकर उसने भगवान विष्णु से अपने भाई की मृत्यु का बदला लेने की ठानी और लोगों से अपनी पूजा करने को कहा और भगवान श्री हरि नारायण की पूजा करने वालों को मारना और सताना शुरू कर दिया और भगवान के रूप में अपनी पूजा करने को कहा।

    परंतु जब हिरण्यकशिपु के पुत्र ने जन्म लिया तो वह जन्म से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था और अपने पिता के लाख मना करने के बावजूद भी उसने नारायण भक्ति नहीं छोड़ी और इस क्रोध में आकर हिरण्यकश्यप उन्हें अपनी बहन होलिका की मदद से भक्त प्रह्लाद को मारने का पर्यत्न किया परंतु वह असफल रहा और होलिका की आग में जलकर मृत्यु हो गई।

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    होलिका को भगवान शिव का वरदान प्राप्त था की उसे अग्नि नहीं जला सकती, परन्तु जब होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर चिता की आग पर बैठी तब भक्त प्रहलाद ने भगवान विष्णु का ध्यान किया, और प्रह्लाद बच गया परन्तु होलिका आग में जलकर भस्म हो गई।

    असुर हिरण्यकश्यप के अत्याचारों को देखते हुए भगवान विष्णु ने धरती पर नरसिंह रूप में अवतार लिया और हिरण कश्यप नामक असुर का वध कर भक्त प्रहलाद को साक्षात दर्शन दिए।


    होली पर राक्षसीं पूतना की कथा/कहानी | Holi Story in Hindi

    भगवान श्री कृष्ण जब छोटे थे तब उनके मामा कंस उन्हें मारना चाहते थे और उन्होंने बाल गोपाल को मारने के लिए कई असुर भी भेजे, जिनमें से पूतना नामक राक्षसी भी थी। राजा कंस ने जब पूतना को श्री कृष्ण की मृत्यु करने के लिए भेजा तो पूतना ने जब भगवान श्री कृष्ण को स्तनपान कराने के लिए गोद में उठाया और स्तनपान कराना शुरू किया तभी श्रीकृष्ण ने पूरे जोर से स्तनपान करना स्टार्ट किया और पूतना दर्द से कराह उठी और उसकी मृत्यु हो गई।

    बताया जाता है कि पूतना अपने स्तन से भगवान श्री कृष्ण को विष पिला रही थी, भगवान श्री कृष्ण द्वारा पूतना के विष को पीने के कारण ही श्री कृष्ण का रंग नीला पड़ गया, श्री जिसके अगले दिन वृंदावन के वालों ने गोपियों के साथ मिलकर रासलीला की।


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    भगवान कामदेव और उनकी पत्नी रति की कहानी

    होली को लेकर प्राचीन काल की एक और कहानी का उल्लेख मिलता है जिसका संबंध भगवान शिव, भगवान कामदेव और रति से है। एक बार की बात है जब भगवान शिव ध्यान मुद्रा की गहरी अवस्था में थे। उनकी संगति और अंतरंग स्पर्श की तलाश में, देवी पार्वती ने कामदेव से कहा कि वह उनके लिए जुनून (राजो गुना) की विधि का आह्वान करें।

    माता के आदेश का पालन करते हुए, प्रेम के देवता ने शिव पर एक तीर चलाया और शिवजी ध्यान मुद्रा से जाग गए और ध्यान भंग करने के कारण उन्होंने तुरंत कामदेव को जलाकर भस्म कर दिया।

    इस घटना से दुखी होकर, भगवान शिव को शांत करने के लिए कामदेव की शोकग्रस्त पत्नी रति ने चालीस दिनों की अवधि के लिए एक गंभीर साधना की। जिसके परिणामस्वरुप उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव कामदेव के प्राण लौटा देते है। इस दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था इसलिए इस खुशी को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है।


    कैसे मनाते हैं होली का त्यौहार

    प्राचीन काल से ही होली का त्यौहार रंगों के त्यौहार के रूप में जाना जाता है उस समय भी होली रंगो से ही मनाई जाती थी परन्तु उस समय होली के रंग टेसू या पलाश के फूलों से बनाए जाते थे और उन्हें गुलाल कहा जाता था जिसमें किसी भी तरह के रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता था और यह त्वचा के लिए काफी लाभकारी मानी जाती थी।

    आज भी होली रंगों से ही मनाई जाती है लेकिन आज रंगों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल त्वचा को नुकसान से अधिक कुछ नहीं देते।

    होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है यह दिन बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है और इस दिन लोग सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और मिठाइयां खाते हैं, इस दिन गुजिया खाने का भी विशेष महत्व है लोगों के घरों में होली के अवसर पर गुजिया तैयार की जाती हैं साथ ही इस त्यौहार पर चिप्स, पकोड़े आदि भी बनाए जाते हैं।

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    बच्चों के लिए यह त्यौहार काफी खुशी भरा होता है इस दिन बच्चे पिचकारी में रंग भर कर एक दूसरे पर रंग डालते हैं साथ ही गुब्बारों में रंग भर कर भी होली खेलना बच्चों को काफी पसंद आता है।

    इस दिन बरसाना, वृंदावन और मथुरा की होली काफी सुर्खियां बटोरती हैं यहां रंग वाली होली के साथ-साथ लठमार और लड्डू जैसी कई अन्य तरह की होली भी मनाई जाती है।

    मथुरा-वृंदावन में होली की धूम 16 दिनों तक रहती है, यह स्थान राधा कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है, जहां होली मनाते हुए उनके दिव्य प्रेम को याद किया जाता है।


    होली के विभिन्न प्रकार:

    लठमार: ब्रज के बरसाना गांव में लठमार होली खेली जाती है ब्रज की होली को भगवान राधा कृष्ण के प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है क्योंकि भगवान कृष्ण नंद गांव के रहने वाले थे और राधा बरसाने की गोपी थी, इसीलिए यहां हर साल नंदगांव के लड़के बरसाने में होली खेलने आते है तो वहां की लड़कियां उन पर लाठियां बरसाते है लड़कों को लड़कियों से बचकर गोपियों पर रंग लगाना होता हैं।



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    धुलेंडी: हरियाणा में देवर-भाभी के बीच भी कुछ लट्ठमार होली जैसे ही नजारा देखने को मिलता है इस दिन भाभिया देवरो को पीटती हैं और देवर उन पर रंग डालने के लिए तैयार रहते हैं।

    अंतिम शब्द | Holi Kab Kyu aur Kaise Manate Hai

    दोस्तों अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि 2020 में होली कब है या 2021 की होली कब है (Holi 2020 Date) तथा होली क्यों मनाई जाती है और होली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है यह भी आपने जान लिया तथा देश में मनाई जाने वाली होली के विभिन्न प्रकारों के बारे में भी आपको जानकारी मिली।

    अगर आपको होली के बारे में दी गई यह जानकारी और होली की कहानी और कथा अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी व्हाट्सएप और फेसबुक पर जरूर शेयर करें ताकि उन्हें भी होली के बारे में यह महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सके।

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