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बंदी छोड़ दिवस 2020: दिवाली के दिन क्यों मनाते है? गुरु हरगोबिंद जी का इतिहास और कहानी

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    Bandi Chhor Diwas 2020 Date: बंदी छोड़ दिवस और गुरु हरगोबिंद साहिब का इतिहास और कहानी (Story)

    बंदी छोड़ दिवस कब है? २०२० डेट: सिखों और हिंदुओं का संबंध काफी पुराना रहा है ऐसे में जब बात हिंदुओं के पवित्र त्यौहार दीवाली की आती है, तो सिक्खों में भी दिवाली का अपना ही एक महत्व दिखाई देता है। सिक्ख समुदाय (Sikhism) के लोग दिवाली के दिन को 'बंदी छोड़ दिवस' (Bandi Chhor Diwas) के रूप में मनाते हैं। इस साल 2020 में यह पर्व 14 नवम्बर को मनाया जा रहा है।

    हालांकि बंदी छोड़ दिवस (ਬੰਦੀ ਛੋੜ ਦਿਵਸ) (Day of Liberation) के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते और भारत में बहुत कम लोगों को सिखों द्वारा राष्ट्रीय हित एवं विभिन्न धर्मों के लिए दी गई कुर्बानियों के बारे में पता है।

    आज हम आपको बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Diwas 2020) के बारे में बताने जा रहे हैं जैसा कि नाम से ही पता चलता है: बंदी यानी कैदी, छोड़ यानी रिहा करना, दिवस यानी दिन, मतलब की ऐसा दिन जिस दिन कैदियों की रिहाई की गई हो।

    परंतु ऐसे कौन से कैदी थे जिनकी रिहाई के दिन को सिख समुदाय में इतनी धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है आइए जानते हैं इसके बारे में।

    Bandi Chhor Diwas & Guru Hargobind Ji in Hindi
    Bandi Chhor Diwas & Guru Hargobind Ji in Hindi

    बंदी छोड़ दिवस और गुरु हरगोबिंद साहिब का इतिहास (Story & History)

    श्री गुरु अर्जन देव जी की शहीदी के बाद गुरु हरगोबिंद जी (Guru Hargobind Ji) ने लोगों की परेशानियां एवं शिकायतें सुनने शुरू कर दी परंतु मुगल सल्तनत द्वारा इसे बगावत समझा गया और श्री हरगोबिंद साहिब जी को ग्वालियर के किले में कैद कर लिया गया इसी किले में 52 अन्य राजा भी कैदी बनाकर रखे गए थे।

    गुरु हरगोबिंद साहिब जी को बंदी बनाने के साथ ही जहांगीर मानसिक रोग से ग्रस्त हो गया और उसे रात को अजीबोगरीब सपने आने लगे जिसमें उसे उसकी मृत्यु के लिए शेर आते दिखाई देते।

    ऐसे में वह रातों को सो नहीं पाता था उसने लंबे समय तक अपना इलाज कराया परंतु हकीम और वेदों के इलाज से भी उसे इस रोग से मुक्ति ना मिल सकी।

    अंत में वह थक हार कर साईं मियां पीर जी की शरण में गया साईं जी ने उन्हें समझाया कि रब के प्यारों को तंग करने का ही यह फल है और बताया कि गुरु हर गोबिंद सिंह साहिब जी जिसे तूने कैद में रखा है वह रब का बंदा है और तूने उनके पिताजी को भी शहीद करवाया।

    ऐसे में जहांगीर कि इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए साईं ने उसे सलाह दी कि वह गुरु जी को रिहा कर दे जहांगीर ने भी उनकी बात मान कर गुरु हरगोविंद साहिब जी को रिहा करने का फैसला लिया।

    परंतु गुरु जी ने अकेले रिहाई की बात को नकार दिया और कहा कि वह किले से बाहर तभी जाएंगे जब सभी 52 राजाओं को भी उनके साथ रिहा किया जाए।

    बादशाह जहांगीर राजाओं को छोड़ना नहीं चाहता था इसीलिए उसने यह तरकीब लगाई और गुरु जी से कहा कि जो भी आप का दामन पकड़ कर बाहर जा सकता है उसको रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि वह चाहता था कि कम से कम राजा ही वहां से बाहर जा सके।

    ऐसे में गुरु जी ने सभी 52 राजाओं को रिहा करने के लिए एक विशेष 52 कलियों वाला चोगा तैयार कराया और सभी राजाओं ने चोगे की एक-एक कली को पकड़ लिया और गुरुजी के साथ वे सभी 52 राजा रिहा हो गए।

    तभी से गुरु जी को 'बंदी छोड़ दाता' भी कहा जाता है।

    गुरुजी की रिहाई के बाद अमृतसर साहब पहुंचने पर वहां दीपमाला की गई और वह दिन दिवाली का ही था तथा तभी से लेकर आज तक दिवाली के त्यौहार को अमृतसर में काफी धूमधाम से मनाया जाता है और सिख समुदाय के लोग के बीच इसका काफी ज्यादा महत्व भी है।


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    Happy Bandi Chhor Diwas Ki Hardik Shubhkamnaye 2020
    Happy Bandi Chhor Diwas Ki Hardik Shubhkamnaye 2020

    बंदी छोड़ दिवस कब मनाया जाता है?

    हर साल सिक्ख समाज के लोग दिवाली को बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Diwas) के रूप में मनाते हैं इस बार बंदी छोड़ दिवस 14 नवंबर 2020 को शनिवार के दिन मनाया जा रहा है।


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    बंदी छोड़ दिवस क्यों मनाया जाता है?

    सिखों के छठवें गुरु श्री हरगोविंद साहेब और उनके द्वारा 52 राजाओं की मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से रिहाई को बंदी छोड़ दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। सिख समुदाय के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक मानते हैं और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को दीए और लाइटों से जगमग किया जाता है, तथा इस दिन गुरुद्वारों में शब्द कीर्तन तथा अरदास की जाती है।


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    कैसे मनाया जाता है बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Diwas Celebration)

    बताया जाता है कि जब सिखों के छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से रिहा होकर आए तो बाबा बुड्ढा जी की अगुवाई में गुरु जी के अमृतसर साहिब में पहुंचने पर वहां दीपमाला की गई और तभी से बंदी छोड़ दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

    इस दिन सिखों द्वारा गुरुद्वारों में कीर्तन तथा अरदास की जाती है और दिवाली की तरह ही इस त्यौहार को दीए जलाकर रोशन करके मनाते हैं। नगर कीर्तन और गुरु ग्रंथ साहिब का अखण्ड पाठ के अलावा, यह पर्व आतिशबाजी के साथ मनाया जाता है। श्री हरमंदिर साहिब, तथा पूरे परिसर को हजारों झिलमिलाती लाइटिंग से सजाया जाता है।


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    अन्तिम शब्द

    भारत में सिक्ख समाज के लोग अल्पसंख्यक हैं फिर भी वह कभी भी खुलकर सामने नहीं आते और ना ही विरोध करते हैं साथ ही उनके महान इतिहास को भी किताबों में काफी कम जगह दी जाती है और भारत के लोगों को भी इनके बारे में काफी कम जानकारी है।

    परंतु सिख धर्म के महान लोगों ने मानवता के लिए कई भयानक युद्ध लड़े हैं और उनकी कुर्बानियों को भी नकारा नहीं जा सकता।

    आप से गुजारिश है कि कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें ताकि उन्हें सिक्खों द्वारा दी गई धर्म और राष्ट्र हित एवं मानवता के लिए कुर्बानियों के बारे में पता चल सके और वे भी सिखों के इस त्यौहार बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Diwas 2020) के बारे में जान सके।



    आप सभी को HaxiTrick.com की तरफ से बंदी छोड़ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। Happy Bandi Chhor Diwas!
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