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गणेश चतुर्थी एवं विसर्जन की पूरी जानकारी, कथा एवं महत्व जाने यहाँ

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    Ganesh Chaturthi 2020: गणेश उत्सव, कथा और विसर्जन के बारें में पूरी जानकारी हिंदी में

    गणेश चतुर्थी का त्यौहार हिंदू धर्म में विनायक माने जाने वाले गणपति बप्पा (भगवान गणेश जी) के जन्मोत्सव का पर्व है, वे भगवान शिव और पार्वती के पुत्र है जिनका जन्म भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था।

    गणेश उत्सव हिन्दुओं का बहुत प्रिय त्यौहार है यह पूरे भारत में बेहद भक्ति भाव और खुशी से मनाया जाता है। वहीं महाराष्ट्र में तो इसका काफी ज्यादा महत्व है।

    वैसे गणेश भगवान 108 नामों से विश्वविख्यात हैं अगर इनके 12 संकट मोचन नामों की बात करें तो यह है: सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लंबोदर, विकट, विनायक, धूम्रकेतु, गण अध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन, और विनाशक, गणेश जी (Lord Ganesha) के 12 नाम में से कुछ नाम आप पहले से ही जानते होंगे।

    Ganesh Chaturthi Information In Hindi
    Ganesh Utsav Information in Hindi

    अगर बात करें गणेश चतुर्थी की तो इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, जो गणपति बप्पा का जन्मदिन है इसलिए आज हम विनायक चतुर्थी कब, क्यों और कैसे मनाई जाती है गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी की कथा (Story) के बारे में पूरी जानकारी (Information) देने जा रहे हैं।

    आइए अब आपको इस साल 2020 में गणेश चतुर्थी कब है? इसके बारे में बताते है।

    गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?

    गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहते हैं यह हिंदी पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी भादो महीने के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाया जाता है जो हर साल अगस्त या सितम्बर महीने में पड़ती है। इस साल 2020 में यह 22 अगस्त को शनिवार के दिन मनाई जा रही है।


    मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसलिए उनके जन्मोत्सव को गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म दोपहर के समय हुआ था इसीलिए गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर के समय विघ्नहर्ता की पूजा करना शुभ माना जाता है।

    इसलिए आप भी 22 अगस्त के दिन गणपति की पूजा शुभ मुहूर्त में ही करें।


    इस साल 2020 में गणपति स्थापना एवं पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग ढाई घंटे का है जिसमें आप दिन के समय 11:06 से दोपहर के 1:42 के बीच भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं।


    २०२० में गणेश विसर्जन कब है?

    गणपति बप्पा की 10 दिनों तक आराधना करने के बाद 1 सितंबर 2020 को मंगलवार के दिन बहते जल में विसर्जित कर उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण दिया जाता है।

    गणपति विसर्जन करते समय बड़े धूमधाम से गणपति बप्पा की प्रतिमा एवं मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए ले जाया जाता है।

    इस दौरान आप गणेश चतुर्थी के बेस्ट गाने/आरती/भजन डीजे पर बजाकर गणेश विसर्जन के उत्सव को और शानदार बना सकते हैं।


    Ganesh Chaturthi का त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव जी के पुत्र गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, इसे आप गणेश जयंती भी कह सकते हैं।


    गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

    सभी देवताओं में सबसे अधिक बुद्धिमान देव गणेश जी के जन्म दिवस को गणेश चतुर्थी या गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने गणेश जी को जन्म नहीं देते हुए उनकी आकृति बनाकर उसमें प्राण डाले थे और जन्म के समय वे सभी की तरह सामान्य स्वरूप में ही थे।

    भारत में महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है इसके साथ ही नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया और चीन में भी गणेश चतुर्थी की धूम देखने को मिलती है।


    गणेश चतुर्थी का महत्व: भारतीय संस्कृति में गणेश जी को सुख समृद्धि लाने और विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी और गणेश विसर्जन कर लोग भगवान गणेश की पूरी श्रद्धा और भक्ति से पूजा करते हैं इससे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और सिद्धियां प्राप्त होती हैं।


    गणेश जी का मंत्र:
    ॐ गण गणपतए नमः
    ॐ गणेशाय नमः
    वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा
    निर्विघ्नम कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।

    गणेश जी की जन्म की कहानी?

    हिंदू धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार श्री गणेश का जन्म देवी पार्वती के शरीर से उतरी मेल से हुआ था और जब वो स्नान के लिए गई तो गणेश को उनकी पहरेदारी के लिए बाहर खड़ा किया गया।

    लेकिन जब भगवान शिव जो पार्वती के पति है जब अपने घर वापस लौटे तो अपने पिता से अनजान गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोकने का पर्यास किया।


    जिसके फलस्वरूप इससे क्रोध में आकर शिवजी ने अपने पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन जब देवी पार्वती को इस बात का पता चला तो वह भगवान शिव से नाराज हो गई।

    और सच्चाई का पता चलने के बाद भगवान शिव ने गणेश के प्राण वापस लाने का वादा किया और बहुत खोजने के बाद उन्हें एक हाथी के बच्चे का सिर/धड़ मिला और उन्होंने वही सिर गणेश को लगाकर उन्हें जीवनदान दे दिया।


    तभी से उन्हें 'गजानन' कहा जाता है।

    लेकिन बहुत सी कहानियों के अनुसार देवताओं के भगवान शिव से अनुरोध करने पर भगवान शिव और पार्वती ने गणेश को बनाया था जिससे वे राक्षसों का वध कर सके और यही कारण है कि उन्हें 'विघ्नहर्ता' भी कहा जाता है।


    कैसें मनाया जाता है गणेश उत्सव?

    भगवान गणेश बुद्धि और समृद्धि के प्रतीक हैं वहीं लोग Ganesh Chaturthi के दिन गणपति बप्पा की मिट्टी की प्रतिमा बनाते हैं या फिर बाज़ार खरीद कर लाते हैं और विधि-विधान से शुभ महूर्त में पूजा कर इसे अपने घर में स्थापित करते हैं।

    तथा 10 दिन तक उनकी भक्ति-आराधना करते हैं और उनके बाद अनंत चतुर्दशी आथार्त गणेश विसर्जन के दिन उन्हें नदी या बहते जल विसर्जित कर दिया जाता है। इससे पहले बाजारों में Lord Ganesha की बहुत सारी प्रतिमाएं बिकनी शुरू हो जाती है, लोग अपने फ्रेंड गणेशा के लिए उनकी पसंदीदा चीजें खरीदते हैं।


    भारत के वीर मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेश चतुर्थी को एक सार्वजनिक समारोह के रूप में घोषित किया था।


    गणेश चतुर्थी के दौरान क्या ना करें?
    गणेश चतुर्थी के दौरान कभी भी भूल से भी चंद्रमा के दर्शन ना करें ऐसा करने से आप पर कोई गलत आरोप या कलंक लग सकता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी के गजानन रूप को देख चंद्रमा की हंसी निकल गई थी।


    Ganesh Chaturthi की कथा

    दोस्तों इस सृष्टि की शुरुआत में जब देवताओं ने भगवान शिव जी से यह प्रश्न किया कि हम सभी में से किस की पूजा सबसे पहले की जाए। तो भगवान शिव जी ने सभी को एक कार्य दिया जिसमें उन्हें पृथ्वी की 3 परिक्रमा करके सबसे पहले आना था और जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वही इस सृष्टि का प्रथम पूज्य माना जाएगा।

    उस समय सभी देवी देवताओं के पास अपने अच्छे वाहन हुआ करते थे इसलिए वह सभी तेज और अच्छे वाहनों पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने निकल पड़े।


    परंतु भगवान गणेश का वाहन चूहा (मूषक राज) था और उनका शरीर काफी भारी और स्थूल था तो गणेश जी का इस पृथ्वी की परिक्रमा को पूरा करना एक असंभव कार्य था।

    तब भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और चतुराई का इस्तेमाल करते हुए अपने माता और पिता की तीन प्रक्रिया पूरी की और हाथ जोड़कर कहा की मेरे लिए तो मेरे संसार आप दोनों ही है।


    तो भगवान शिव ने उनकी बुद्धिमानी की प्रशंसा की और कहा कि इस संसार में तुमसे बड़ा बुद्धिमान और कोई नहीं है। अपने माता-पिता की परिक्रमा कर तुमने तीनों लोकों की परिक्रमा पूरी कर ली है इसीलिए अब किसी भी कार्य का आरंभ करने से पहले तुम्हारा पूजन करना जरूरी है।

    तभी से हर कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है उसके बाद ही सभी देवी देवताओं को पूजा जाता है।


    अनंत चतुर्दशी: गणेश विसर्जन कब और क्यों किया जाता है?

    भादो मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्थी कहा जाता है और इसे गणेश विसर्जन के रूप में मनाया जाता है इस दिन गणेश भगवान की विदाई की जाती है तथा उन्हें बहते जल में विसर्जित किया जाता है साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है और अनंत भगवान की पूजा की जाती है।


    गणेश विसर्जन क्यों करते है?
    पुरानी कथाओं के अनुसार जब पांडव अपना राजपाट को जुए में हार चुके थे और वन वन भटक रहे थे, तब श्री कृष्ण भगवान ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी जिसके बाद उनके सभी कष्ट दूर हो गए।


    और अनंत चतुर्दशी को गणेश जी की मूर्ति विसर्जन का भी अपना एक महत्व है लोगों द्वारा ऐसा माना जाता है कि उनकी प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान पुनः कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं।



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    वही मेरा मानना यह है कि अगर आप अपने हाथ से नदी या नहर किनारे से लाई मिट्टी द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा बनाते हैं तभी आप इसे दोबारा नदी में विसर्जित करें। अन्यथा आप अगर बाजार से बड़ी-बड़ी मूर्तियां खरीदते हैं तो उसमें बहुत से केमिकल मिले होते हैं जो नदी और नहरों के पानी को दूषित करते हैं अतः मेरी सलाह यही है कि आप इको-फ्रेंडली गणेश विसर्जन ही करें।


    मेरे विचारों द्वारा किसी की धार्मिक आस्था या विश्वास को ठेस पहुंचाना नहीं है अपितु इसे आप एक सलाह के रूप में ले सकते हैं.


    अन्तिम शब्द

    आज हमने आपको गणेश उत्सव क्यों और कब मनाया जाता है गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) और Ganesh Chaturthi के बारे में पूरी जानकारी Hindi में देने की कोशिश की है।

    अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी और भगवान गणेश से जुड़ी कथाएं (Lord Ganesha Stories) आपको पसंद आई, तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों से जरूर शेयर करें।

    आप सभी को HaxiTrick.Com की तरफ से गणेश चतुर्थी व अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    The End
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