गणेश उत्सव कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है? 2019

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    Ganesh Chaturthi Utsav Kab, Kyu, Aur Kaise Manaya Jata Hai - Photos

    Ganesh Chaturthi Utsav Kab, kyu Aur Kaise Manate Hai: दोस्तों आज हम आपको गणेश चतुर्थी के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं यानी कि आज हम आपको गणेश चतुर्थी क्या है क्यों और कब मनाई जाती है इसके बारे में हिंदी में बताने वाले हैं. दोस्तों यह त्यौहार हिंदू धर्म में विनायक माने जाने वाले भगवान गणेश जी का है जो भगवान शिव जी और पार्वती के पुत्र थे.

    वैसे गणेश भगवान 108 नामों से विश्वविख्यात हैं अगर इनके 12 संकट मोचन नामों की बात करें तो यह है सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लंबोदर, विकट, विनायक, धूम्रकेतु, गण अध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन, और विनाशक, भगवान श्री गणेश के 12 नाम में से कुछ नाम आप पहले से ही जानते होंगे.


    अगर बात करें गणेश चतुर्थी की तो इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, आइए अब आपको Ganesh Chaturthi Kyu Manayi jati hai, Vinayak Chaturthi Kaise Manate Hai, Anant Chaturdashi Visarjan Kaise Manaya Jata Hai और इस साल गणेश चतुर्थी कब है? इसके बारे में बताते है.

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    गणेश चतुर्थी कब और क्यों मनाई जाती है - Ganesh Chaturthi In Hindi

    दोस्तों श्री गणेश भगवान का जन्म भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था, गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का बहुत प्रिय त्यौहार है यह पूरे भारत में बेहद भक्ति भाव और खुशी से मनाया जाता है वहीं महाराष्ट्र में तो इसका काफी ज्यादा महत्व है.


    गणेश चतुर्थी का त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव जी के पुत्र गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, इसे आप गणेश जयंती भी कह सकते हैं.


    भगवान गणेश बुद्धि और समृद्धि के प्रतीक हैं वहीं लोग गणेश चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की मिट्टी की प्रतिमा बनाते हैं या फिर खरीद कर लाते हैं और उसे अपने घर में रखते हैं तथा 10 दिन तक उनकी भक्ति करते हैं और उनके बाद अनंत चतुर्दशी आथार्त गणेश विसर्जन के दिन उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है इससे पहले बाजारों में भगवान गणेश बहुत सारे प्रतिमाएं बिकनी शुरू हो जाती है, लोग अपने फ्रेंड गणेशा के लिए उनकी पसंदीदा चीजें खरीदते हैं.


    गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है - Katha/Story In Hindi

    भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ: हिंदू धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार श्री गणेश का जन्म देवी पार्वती के शरीर से उतरी मेल से हुआ था और जब वो नहाने गई तो गणेश को उनकी रक्षा के लिए बाहर खड़ा किया गया,

    लेकिन जब भगवान शिव जो पार्वती के पति है जब अपने घर वापस लौटे तो अपने पिता से अनजान गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोकने का पर्यास किया.


    जिसके फलस्वरूप इससे क्रोध में आकर शिवजी ने अपने पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया लेकिन जब देवी पार्वती को इस बात का पता चला तो वह भगवान शिव से नाराज हो गई.

    और सच्चाई का पता चलने के बाद भगवान शिव ने गणेश के प्राण वापस लाने का वादा किया और बहुत खोजने के बाद उन्हें एक हाथी के बच्चे का सिर/धड़ मिला और उन्होंने वही सिर गणेश को लगाकर उन्हें जीवनदान दे दिया.


    लेकिन बहुत सी कहानियों के अनुसार देवताओं के भगवान शिव से अनुरोध करने पर भगवान शिव और पार्वती ने गणेश को बनाया था जिससे वे राक्षसों का वध कर सके और यही कारण है कि उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है.


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    दोस्तों इस सृष्टि की शुरुआत मैं जब देवताओं ने भगवान शिव जी से यह प्रश्न किया कि हम सभी में से किस की पूजा सबसे पहले की जाए तो भगवान शिव जी ने सभी को एक कार्य दिया जिसमें उन्हें पृथ्वी की 3 परिक्रमा करके सबसे पहले आना था और जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वही इस सृष्टि का प्रथम पूज्य माना जाएगा.

    तो उस समय सभी देवी देवताओं के पास अपने अच्छे वाहन हुआ करते थे इसलिए वह सभी तेज और अच्छे वाहनों पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने निकल पड़े.


    परंतु भगवान गणेश का वाहन चूहा था और उनका शरीर काफी भारी और स्थूल था तो गणेश जी का इस पृथ्वी की परिक्रमा को पूरा करना एक असंभव कार्य था, तब भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और चतुराई का इस्तेमाल करते हुए अपने माता और पिता की तीन प्रक्रिया पूरी की और हाथ जोड़कर कहा की मेरे लिए तो मेरे संसार आप दोनों ही है.


    तो भगवान शिव ने उनकी बुद्धिमानी की प्रशंसा की और कहा कि इस संसार में तुमसे बड़ा बुद्धिमान और कोई नहीं है, अपने माता-पिता की परिक्रमा कर तुमने तीनों लोकों की परिक्रमा पूरी कर ली है इसीलिए अब किसी भी कार्य का आरंभ करने से पहले तुम्हारा पूजन करना जरूरी है, इसीलिए हर कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है उसके बाद ही सभी देवी देवताओं को पूजा जाता है.


    अनंत चतुर्दशी कब और क्यों मनाते हैं - Ganesh Visarjan

    दोस्तों भादो मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्थी कहा जाता है और इसे गणेश विसर्जन के रूप में मनाया जाता है इस दिन गणेश भगवान की विदाई की जाती है तथा उन्हें विसर्जित किया जाता है साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है और अनंत भगवान की पूजा की जाती है.


    पुरानी कथाओं के अनुसार जब पांडव अपना राजपाट जुए में हार चुके थे और वन वन भटक रहे थे, तब श्री कृष्ण भगवान ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी जिसके बाद उनके सभी कष्ट दूर हो गए.


    और अनंत चतुर्दशी चतुर्दशी को गणेश जी की मूर्ति विसर्जन का भी अपना एक महत्व है लोगों द्वारा ऐसा माना जाता है कि उनकी प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान पुनः कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं



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    गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी कब है 2019

    दोस्तों हर साल गणेश चतुर्थी को भारतीय कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद यानी भादो के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जो इस बार यह दिन 2 सितंबर 2019 को है,

    तो वहीं अनंत चतुर्दशी को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो इस बार 12 सितंबर 2019 को पड़ रही है, जिसे गणेश विसर्जन के रूप में मनाया जाता है और गणेश भगवान की मिट्टी की प्रतिमा को नदियों में विसर्जित किया जाता है.



    वही मेरा मानना यह है कि अगर आप अपने हाथ से नदी या नहर किनारे से लाई मिट्टी द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा बनाते हैं तभी आप इसे दोबारा नदी में विसर्जित करें अन्यथा आप अगर बाजार से बड़ी-बड़ी मूर्तियां खरीदते हैं तो उसमें बहुत से केमिकल मिले होते हैं जो नदी और नहरों के पानी को दूषित करते हैं अतः मेरी सलाह यही है कि आप इको फ्रेंडली गणेश चतुर्थी विसर्जन बनाएं.


    मेरे विचारों द्वारा किसी की धार्मिक आस्था या विश्वास को ठेस पहुंचाना नहीं है अपितु इसे आप एक सलाह के रूप में ले सकते हैं.


    अन्तिम शब्द - Information About Ganesh Chaturthi In Hindi

    दोस्तों आज हमने आपको गणेश चतुर्थी उत्सव क्यों और कब मनाया जाता है गणेश चतुर्थी विसर्जन, अनंत चतुर्दशी और All Information About Ganesh Chaturthi Utsav In Hindi में देने की कोशिश की है,

    अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी और भगवान गणेश से जुड़ी कथाएं आपको पसंद आई है, तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों से जरूर शेयर करें और आप सभी को मेरी तरफ से गणेश चतुर्थी व अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं.

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