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रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? कहानी और इतिहास तथा राखी का महत्व

रक्षाबंधन का त्यौहार भारत के प्रमुख हिंदू त्यौहारों में से एक है जिसे भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है यह पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा क आइये इसके बारें में विस्तार से जानते है...

    रक्षाबंधन का त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है? Why we celebrate Raksha Bandhan (Story, History and Importance in Hindi)

    Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai: रक्षाबंधन का त्यौहार भारत के प्रमुख हिंदू त्यौहारों में से एक है जिसे भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है यह पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल 2021 में राखी 22 अगस्त को रविवार के दिन मनाई जा रही है।

    इसमें बहने अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती है और उनकी लंबी उम्र की कामना भी करती हैं वही भाई भी इसके बदले उनकी उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं इसीलिए इस त्यौहार को रक्षाबंधन कहा जाता है कई लोग इसे राखी का त्यौहार भी कहते हैं।

    Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai
    Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai Story Hindi Me

    आइए अब आपको रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाते है? या Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai, रक्षाबंधन का महत्व (Importance) और रक्षाबंधन से जुड़ी कहानियां Raksha Bandhan Story के बारे में Hindi में बताते है।

    रक्षाबंधन क्या है? 2021 में रक्षाबंधन कब और कितनी तारीख को है?

    रक्षाबंधन हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से एक ऐसा त्यौहार है जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है और रक्षाबंधन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है रक्षा + बंधन जिसका अर्थ रक्षा का बंधन होता है।

    सनातन धर्म या हिंदू कैलेंडर के अनुसार रक्षाबंधन का त्यौहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो सावन का आखिरी दिन होता है इस साल 2021 में रक्षाबंधन का त्यौहार अगस्त की 22 तारीख को रविवार के दिन है।


    रक्षाबंधन की ऐतिहासिक कहानी (Raksha Bandhan Historical Story in Hindi)

    रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की कहानी:
    इतिहास के पन्नों में दर्ज मध्यकालीन युग की कहानी के रूप में चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं की कहानी से रक्षाबंधन का एक नया जन्म माना जाता है यह उस समय की बात है जब भारत पर मुगलों का राज हुआ करता था तथा राजपूतों और मुगलों के बीच कड़ा युद्ध चल रहा था।

    इस दौरान चित्तौड़ की रानी कर्णावती को बहादुर शाह जफर से खतरा महसूस होने पर उन्होने उन्होंने सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी और हुमायूँ ने भी रानी कर्णावती को अपनी बहन मानकर उनकी रक्षा के लिए चित्तौड़ में अपनी सेना की टुकड़ी भेजी जिससे बहादुर शाह जफर को पीछे हटना पड़ा।


    सिकंदर और पुरू की कहानी:
    इसके बाद दूसरी स्टोरी की बात करें तो जब सिकंदर की लड़ाई भारत के हिंदू शासक पुरू से हो रही थी तब सिकंदर की पत्नी ने अपने पति की रक्षा के लिए उसके शत्रु पुरू (पोरस) को राखी बांधी थी और उसे अपना भाई बना लिया था।


    और उपहार के रूप में सिकंदर की पत्नी ने पोरस से सिकंदर की जान बख्श देने का वचन मांगा था। और पुरू ने भी भाई के कर्तव्य का निर्वाहन करते हुए अपनी बहन को यह वचन दिया था कि वह सिकंदर के प्राण नहीं लेगा और उसने अपनी बहन के वचन का मान रखते हुए सिकंदर को जीवनदान दे दिया था।


    इस तरह से भारत में राखी का महत्व और ज्यादा बढ़ गया और राखी हिंदू धर्म के साथ-साथ कई दूसरे धर्मों में भी मनाई जाने लगी।

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    रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाएं - Mythology Tales of Rakhi in Hindi

    रक्षाबंधन की पौराणिक कथाओं में सबसे ज्यादा प्रचलित तीन कहानियां हैं:
    पहली कहानी इंद्रदेव की है,
    दूसरी कहानी माता लक्ष्मी और राजा बलि की
    तो वहीं तीसरी कहानी महाभारत में द्रौपदी और कृष्ण की है।

    आइये आपको एक-एक करके इन तीनों रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में विस्तार से बताते हैं।


    इंद्र देव की कथा:

    एक बार की बात है जब देवताओं और असुरों के बीच 12 साल से युद्ध चल रहा था तब असुरों का बल देवताओं पर हावी हो रहा था और इससे देवराज इंद्र भी काफी चिंतित थे।

    जब इस बात का इल्म देवराज इंद्र की पत्नी शची को हुआ तो उन्होंने कड़ी तपस्या कर एक रक्षा सूत्र उत्पन्न किया जिसे उन्होंने युद्ध पर जाने से पहले अपने पति देवराज इंद्र के हाथ की कलाई पर बांध दिया और इसके परिणाम स्वरूप असुरों की पराजय हुई और देवराज इंद्र और देवताओं की जीत हुई।

    इसीलिए यह कहा जा सकता है कि रक्षाबंधन की शुरुआत भाई बहन नहीं बल्कि पति-पत्नी से शुरू हुई थी जहां पत्नी ने अपने पति की रक्षा हेतु उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था और यह अब तक की सबसे पुरानी कथा मानी जाती है।

    और जिस दिन इन्द्राणी ने अपने पति के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधा था वह दिन श्रवण की पूर्णिमा का दिन था।


    माता लक्ष्मी और राजा बलि की स्टोरी

    पौराणिक युग में असुर राज बलि के दान धर्म से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उससे वर मांगने को कहा इस पर राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने साथ पाताल लोक में बसने को कहा और उनके साथ ही रहने का वर मांगा।

    और भगवान विष्णु उनके साथ पाताल लोक चले गए ऐसे में बैकुंठ में माता लक्ष्मी अकेली पड़ गई और भगवान विष्णु को दोबारा वैकुंठ लाने के लिए वह राजा बलि के यहां एक गरीब महिला का रूप धर कर रहने लगी।

    जब वह 1 दिन फूट-फूट कर रोने लगी तो राजा बलि ने उनसे पूछा कि उनके रोने का क्या कारण है तो उन्होंने बताया कि उनका कोई भाई नहीं है ऐसे में राजा बलि ने उनका भाई बनकर उनकी इच्छा पूरी की और माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।

    जिसके बाद राजा बलि ने उनसे इस अवसर पर कुछ मांगने को कहा इस पर माता लक्ष्मी ने विष्णु जी को अपने वर के रूप में मांग लिया और मांगे गए वर के अनुसार राजा बलि को विष्णु जी को लक्ष्मी को सौंपना पड़ा और इस तरह से रक्षाबंधन पर वर मांगने और उसके बदले उपहार देने की परंपरा चली आ रही है।



    महाभारत मे रक्षाबंधन की कथा

    महाभारत युग में भी रक्षाबंधन के महत्व की कहानी मिलती है यह कहानी भगवान कृष्ण और द्रोपदी की है।

    MahaBharat युग में जब लोगों की रक्षा करने हेतु भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का अंत किया तब युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण की तर्जनी उंगली में गहरी चोट लग गई और रक्त स्राव होने लगा।

    जिसे देख द्रोपदी ने तुरंत अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण के घाव पर बांध दिया और रक्त स्राव रुक गया इस पर भगवान श्री कृष्ण द्रौपदी पर काफी प्रसन्न हुए और इसका कर्ज उन्होंने द्रोपदी के चीरहरण के समय उनकी लाज बचा कर अपना चुकाया था।

    तो दोस्तों अब तो आपको पता चल ही गया होगा की रक्षा का यह सूत्र कितना ताकतवर है इसीलिए पौराणिक काल और सहस्त्र वर्षों से रक्षाबंधन का त्यौहार भाई बहन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता रहा है।


    रक्षाबंधन का महत्व - Importance of Raksha Bandhan in Hindi

    हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए रक्षाबंधन या राखी का महत्व काफी ज्यादा है और अनमोल भी है और भाई-बहन का सबसे प्यारा त्यौहार है। यह सावन मास की पूर्णिमा को अलग-अलग स्थानों पर भिन्न-भिन्न रस्मों रिवाजों के साथ ही विशिष्‍ट नामों से मशहूर है और बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।


  • रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले दोस्ती का त्यौहार मनाया जाता है जिसमें हम अपने दोस्तों को दोस्ती का धागा बांधते हैं जिसे फ्रेंडशिप बैंड कहा जाता है और इस दिन को इंग्लिश में Friendship Day भी कहा जाता है।

    • होली जाने के लगभग 4 से 5 महीने बाद सीधा रक्षाबंधन का ही त्यौहार आता है।

    • इस दिन बहनें सुबह तैयार होकर राखी की थाली तैयार करती है और अपने भाइयों के दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है।

    • और तिलक और आरती करके उनकी लंबी उम्र की कामना भी करती हैं।

    • वही भाई भी अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं और उन्हें भेंट में कोई ना कोई उपहार भी देते हैं।

    • इस दिन घरों में लज़ीज़ पकवान जैसे घेवर और सेवई बनाई जाती है।

    • शादीशुदा बहने अपने भाई के घर जाकर उन्हें राखी बांधती है लेकिन जो बहनें अपने भाइयों से बहुत ज्यादा दूर होती है और उन तक नहीं पहुंच सकती तो वह उन्हें Post या कोरियर के माध्यम से राखी भिजवाती है ताकि उनके भाइयों की कलाई रक्षा बंधन के दिन सूनी ना रह जाए।

    रक्षाबंधन की सबसे मशहूर और छोटी सी कविता कुछ इस प्रकार है

    फूलों का तारों का सबका कहना है।
    एक हजारों में मेरी बहना है।

    अन्तिम शब्द

    फ्रेंड्स आपको हमारी आज की रक्षा बंधन का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और रक्षाबंधन का क्या महत्व (Importance) होता है इसके बारे में यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं।


    और दोस्तों अगर आपको Raksha Bandhan Kyo Manaya Jata Hai या Kyu Manate Hai और रक्षाबंधन से जुड़ी कहानियां - Stories of Rakhi Festival अच्छे लगे तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर Share करें।

    लेकिन सही मायनों में रक्षाबंधन का त्यौहार तभी सफल हो सकता है जब आप अपनी बहन के साथ साथ दूसरों की बहन को भी वही इज्जत और सम्मान देंगे जो इज्जत व सम्मान आप अपनी बहन को देते हैं।
    HaxiTrick परिवार की तरफ से आप सभी को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें!
    धन्यवाद!
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