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अक्षय आंवला नवमी 2020 कब है? जाने व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

    Akshay Amla Navami 2020: कब, क्यों और कैसे मनाते है अक्षय आंवला नवमी? पूजा विधि , कथा (Story) और महत्व

    Akshay Amla Navami Date 2020: हिंदू धर्म में हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई जाती है, इस बार आंवला नवमी 23 नवंबर को सोमवार के दिन पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने की प्रथा है। इसी तिथि (Date) को आंवला नवमी भी कहा जाता हैं।

    अक्षय नवमी से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार इस दिन आंवले की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं, और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को सुबह और शाम आंवला अर्पित करने की भी मान्यता है।

    Akshay Amla Navami 2020
    Akshay Amla Navami 2020

    आंवले की उत्पत्ति:
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले की उत्पत्ति परमपिता ब्रह्मा जी के आंसू की बूंदों से हुई है। आंवले को विश्व की शुरुआत का पहला फल मानकर पूजा की जाती है।

    एक पौराणिक मान्यता के माने तो कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवले का जन्म हुआ था, इसलिए अक्षय नवमी को आंवला नवमी की भी कहा जाता है। इस एक विशेष दिन पूजा-अर्चना करने से जन्म-जन्मान्तर तक अच्छे फल की प्राप्ति होती है।


    आइए जानते हैं अक्षय आंवला नवमी २०१९ कब है, इसकी पौराणिक कथा क्या है, तथा किस तरह पूजा करें अथार्त पूजन विधि क्या है?

    आंवला नवमी की पूजा विधि (Puja Vidhi)

    • आंवला नवमी की सुबह महिलाओं को नहा-धोकर तैयार हो जाना चाहिए।

    • और इसके बाद किसी आंवले के पेड़ और उसके आसपास की जगह पर भलीभांति साफ़ करना चाहिए।

    • आंवला नवमी की पूजा के लिए महिलाओं को साफ किए गए आंवले के पेड़ के नीचे पूर्व दिशा की तरफ मुख कर के जल और दूध अर्पित करना चाहिए।

    • पूजा सम्पन्न होने पर आंवले के पेड़ के चारों तरफ सूत लपेटकर इसकी परिक्रमा करें।

    • अंत में आंवले के पेड़ की आरती करें, और भगवान विष्णु से अपने परिवार की सुख-शांति और संपन्नता की कामना करते हुए आशीर्वाद मांगें।

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    मान्यता यह भी है कि इस दिन का खाना आंवले के पेड़ के पीछे बैठकर बनाना चाहिए, जिससे सेहत अच्छी बनी रहे है। और खाने में अपने-आप गिरने वाली आंवले की पत्तियां एक प्रकार से प्रसाद के सामान होती है।

    इस दिन आंवले का सेवन बेहद शुभ और लाभकारी होता है, साथ ही आंवला नवमी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने एवं दान करने से धन-धान्य बना रहता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।


    आंवला नवमी की कथा (Amla Navami Story)

    एक पौराणिक कथा के अनुसार काशी नगर में एक निःसंतान वैश्य रहा करता था, वैश्य की इच्छा के विरुद्ध एक दिन वैश्य की पत्नी पुत्र प्राप्ति के मोह में आकर एक पड़ोसी महिला के कहने पर किसी दूसरी स्त्री की कन्या को कुएं में गिराकर उसकी बलि भैरवजी को चढ़ा देती है।

    लेकिन इस हत्या का परिणाम विपरीत होता है, जिससे वैश्य की पत्नी कोढ़ ग्रस्त हो जाती है और उस कन्या की आत्मा उसे परेशान करने लगी, और तंग आकर अपने पति को सारी बातें बता दी।

    वह अपने किए पर पछतावा और शर्म महसूस कर रही थी, इसलिए वैश्य ने उससे गंगा मैया की शरण में जाकर भगवान का भजन करने व गंगा स्नान करने की सलाह दी, जिसके बाद वैश्य की पत्नी गंगाजी की शरण में जाकर भगवान का भजन कर गंगा स्नान करने लगी।

    वहीं गंगाजी ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि अथार्त आज के दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने को कहा। जिसके बाद महिला ने इस दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना कर आंवले का फल ग्रहण किया, जिससे वह कोढ़मुक्त हो गई।

    रोगमुक्त होने के बाद भी महिला ने आंवले के पेड़ का पूजन व व्रत किया जिससे उसे कुछ दिनों बाद संतान प्राप्ति हुई, तभी से हिंदू धर्म में इसका प्रचलन बढ़ा और यह परंपरा शुरू हो गई।

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    अन्तिम शब्द

    अब तो आप अक्षय आंवला नवमी कब है, इसकी पौराणिक कथा(Story) क्या है, तथा किस तरह पूजा करें अथार्त पूजन विधि क्या है, इसके बारे में समझ ही गए होंगे, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी आवश्य शेयर करे।

    नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं पौराणिक मान्यताओं पर आधारित हैं। HaxiTrick.Com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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