Chhatrapati Shivaji Jayanti 2020: छत्रपति शिवाजी महाराज की History और Biography

    Chhatrapati Shivaji Jayanti 2020: जानिए छत्रपति शिवाजी महाराज की बायोग्राफी और इतिहास Hindi

    Shivaji Maharaj Jayanti 2020 Information in Hindi: वीर मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज को कौन नहीं जानता, छत्रपति शिवाजी ने मुगलों से अपना लोहा मनवाया और हर साल शिवाजी महाराज जी के जन्मदिन को शिव जयंती या फिर शिवाजी जयंती (Shivaji Jayanti) के रूप में हर साल 19 फरवरी को भारत में विशेषकर महाराष्ट्र में बड़े ही धूमधाम से मनायी जाती है।

    Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti History and Biography 2020 in hindi
    Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Biography and History 2020 in hindi

    शिवाजी जयंती की शुरुआत महात्मा ज्योतिबा फुले ने साल 1870 में पुणे में घटी पहली घटना के साथ की जिसके बाद से शिव जयंती का विस्तार बड़े पैमाने पर हुआ। तथा बाल गंगाधर तिलक ने भी शिव जयंती की सहायता से ब्रिटिश सेना के विरोध के दौरान लोगों को एकजुट करने के लिए किया। जिसके बाद बाबासाहेब आंबेडकर ने भी शिवजयंती को बीसवीं शताब्दी में मनाया और वे इस शिव जयंती कार्यक्रम के दो बार अध्यक्ष भी रहे।


    इस साल हम छत्रपति शिवाजी महाराज की 390वी जयंती मनाने जा रहे हैं, आइए अब आपको भारत के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी (Information) देते हैं। और उनके इतिहास (Chhatrapati Shivaji Maharaj History & Biography in Hindi) के बारे में भी आपको अवगत कराते हैं।


    Short Note on Chhatrapati Shivaji Maharaj in Hindi

    1.नामछत्रपति शिवाजी महाराज
    2.जन्म19 फरवरी, 1630 शिवनेरी दुर्ग
    3.माता-पिताशाहजी – जीजाबाई
    4.राज्याभिषेक6 जून 1674
    5.घरानाभोंसले
    6.मृत्यु 3 अप्रैल, 1680 रायगढ़

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    Chhatrapati Shivaji Maharaj History and Biography in Hindi

    1. शिवाजी भोसले: Chhatrapati Shivaji Maharaj एक महान भारतीय देशभक्त, योद्धा, राजा, मराठा कबीले के सदस्य, हिंदू हृदय सम्राट, एवं बहादुर, बुद्धिमान और दयालु शासक और रणनीतिकार थे। उनके द्वारा ही साल 1674 ईस्वी में मराठा साम्राज्य की नींव पड़ी।

    2. जन्म: भोसले घराने से ताल्लुक रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग पुणे हुआ। उनके पिताजी का नाम शाहजी भोंसले तथा उनके माता जी का नाम जीजाबाई (राजमाता जिजाऊ) था। शिवाजी राजे का जीवन अपनी माता के मार्गदर्शन में बीता।

    3. बचपन: बताया जाता है कि बचपन में शिवाजी अपने हम उम्र के बच्चों के साथ युद्ध करने और किला भेदने के खेल खेला करते थे जिनमें वह नेता बना करते थे इसीलिए जवानी में आकर उन्हें किला जीतने और आक्रमण करने की अच्छे समझ हो गई।

    4. शिक्षा दीक्षा: शिवाजी ने वैसे तो अधिक शिक्षा नहीं ली परंतु उनकी माता और दादोजी कोंडदेव ने उन्हें जो कुछ भी सिखाया बताया उन्होंने वह मन लगाकर सीखा। उन्हें हिंदू धर्म, घुड़सवारी, राजनीति और सेना की जानकारी दादोजी कोंडदेव ने ही दी, शिवाजी बचपन से ही काफी बुद्धिमान थे।


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    6. विवाह: का विवाह लगभग 12 वर्ष की आयु में 14 मई सन 1640 ई. को सइबाई निंबाळकर के साथ लाल महल, पुना में हुआ। जिनसे उनकी चार संतानें हुई जिसमें से बड़े बेटे का नाम संभाजी था। उन्होंने अपने जीवन काल में आठ विवाह किए।

    7. छत्रपति शिवाजी द्वारा किए गए युद्ध: छत्रपति शिवाजी ने अपने जीवन का पहला युद्ध मात्र 15 साल की उम्र में लड़ा जिसमें उन्होंने तोरना किले पर हमला कर उसे जीत लिया। इसके बाद उन्होंने कोडाना और राजगढ़ किले पर भी फतह हासिल की, जिससे बीजापुर के सुल्तान ने उनके पिता शाहजी राजे को बंधक बना लिया।

      जिसके बाद बीजापुर के दो सरदारों की मध्यस्थता के बाद शाहजी राजे को इस शर्त पर रिहा किया गया कि वह शिवाजी महाराज को बीजापुर पर कोई भी आक्रमण नहीं करने देंगे जिसके बाद शिवाजी ने बीजापुर के खिलाफ कोई भी युद्ध नहीं किया।

    8. शिवाजी महाराज को मारने की कोशिश: जब बीजापुर का शासक आदिलशाह शिवाजी को बंधक ना बना सका तो उसने अपने सेनापति अफजल खान से उसे जिंदा या मुर्दा पकड़ कर लाने का आदेश दिया। इसके बाद अफजल खां ने शिवाजी से सुलह करने का झूठा नाटक कर शिवाजी को बिना हथियार के एक जगह पर बुलाया और वहां धोखे से उन पर वार करने की कोशिश की परंतु शिवाजी महाराज पूरी तरह से तैयार होकर आए थे और उन्होंने इस विश्वासघात का बदला अपने हाथ में छिपे बघनखे से सेनापति को मार कर लिया।

    9. मुगलो से युद्ध: शिवाजी के दो प्रमुख शत्रु बीजापुर तथा मुगल थे और जब आदिलशाह की मृत्यु हुई तो औरंगजेब ने उनकी इस स्थिति का फायदा लेकर बीजापुर पर हल्ला बोल दिया। परंतु शिवाजी ने इस युद्ध में औरंगजेब का साथ ना देते हुए। उस पर ही धावा बोल दिया और अपनी सेना के साथ औरंगजेब पर आक्रमण कर उन्होंने कई हाथी, घोड़े लुटे और गुण्डा तथा रेसिन के दुर्ग पर भी जमकर लूट की।

      जिससे औरंगजेब शिवाजी से काफी नाराज हुआ और मुगल शासक शाहजहां के कहने पर औरंगजेब ने बीजापुर के साथ संधि कर ली, इसके बाद, औरंगजेब उत्तर भारत की ओर चला गया और इसका फायदा उठाकर शिवाजी ने दक्षिण कोंकण पर अपना अधिकार जमा लिया।


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    11. गोरिल्ला वार के आविष्कारक: शिवाजी महाराज को गोरिल्ला वार का अविष्कारक भी माना जाता है क्योंकि उन्होंने ही इस युद्ध निति को आरंभ किया। गोरिल्ला युद्ध में छापामार युद्ध की तरह ही अर्धसैनिक टुकड़ियों या फिर अनियमित सैनिकों द्वारा शत्रु की सेना पर पीछे से आक्रमण करके लड़ा जाता है।

      उनकी कूटनीति के अनुसार किसी भी साम्राज्य में बिना किसी सूचना के भी आक्रमण किया जा सकता था। जिसे गनिमी कावा के नाम से जाना जाता है। इसमें आक्रमण करने वाले सेना की जीत निश्चित होती थी।

    12. धार्मिक नीति: शिवाजी जबरन धर्मांतरण के सख्त खिलाफ थे उनकी सेना में कई मुस्लिम बड़े पदों पर नियुक्त किए गए थे। इब्राहिम खान और दौलत खान को उनकी नौसेना के खास पदों पर तो वही सिद्दी इब्राहिम को शिवाजी की सेना के तौफखानों का प्रमुख बनाया गया था। वे हिंदू के साथ-साथ दूसरे धर्मों का भी सम्मान किया करते थे।

    13. मृत्यु और उत्तराधिकार: शिवाजी महाराज की मृत्यु 50 वर्ष की आयु में 3 अप्रैल 1680 को हो गई। जिसके बाद शिवाजी के उत्तराधिकारी संभाजी घोषित किए गए और उनके उत्तराधिकारियों ने भी मुगलों के खिलाफ जंग जारी रखी। तथा औरंगजेब के खिलाफ उसके पुत्र शहजादे अकबर के विद्रोह करने पर संभाजी ने अकबर को अपने यहां शरण भी दी।


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    पुरंदर की संधि:

    जब औरंगजेब और शिवाजी के बीच युद्ध हुआ तब औरंगजेब ने शिवाजी से हार नहीं मानी और उसने अंबर के राजा जयसिंह और दिलेर सिंह को शिवाजी के खिलाफ युद्ध के लिए। भेजा जयसिंह ने शिवाजी द्वारा जीते गए सभी किलो पर फतह हासिल की और पुरंदरपुर में भी शिवाजी को हरा दिया।

    जिसके बाद शिवाजी महाराज को मुगलों के साथ पुरंदर का समझौता करना पड़ा और शिवाजी ने सभी जीते हुए 23 किले के बदले मुगलों का साथ दिया और बीजापुर के खिलाफ मुगलों के साथ खड़े रहे।

    समझौते के बाद जब शिवाजी 9 मई 1666 ईस्वी को औरंगजेब से मिलने आगरा के दरबार में अपने पुत्र संभाजी और 4000 मराठों की सैनिक के साथ मुगल दरबार पहुंचे। तो वहां उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया जिसके कारण शिवाजी ने भरे दरबार में औरंगजेब को विश्वासघाती कहा और इस पर औरंगजेब ने शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी को जयपुर भवन में कैद कर दिया।

    परंतु कुछ महीने बाद 13 अगस्त 1666 को शिवाजी वहां से फलों की टोकरी में छुप कर फरार हो गए और 1674 तक उन सभी प्रदेशों पर भी अपना अधिकार जमा लिया जो उन्हें पुरंदर की संधि के दौरान मुगलों को देने पड़े थे।



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    Shivaji Maharaj Rajyabhishek Date:

    शिवाजी का राज्याभिषेक: महाराष्ट्र में स्वतंत्र हिंदू राष्ट्र की स्थापना के बाद शिवाजी का राज्याभिषेक सन 6 जून 1974 को हुआ, परंतु उनके राज्याभिषेक में कई अड़चनें आई, मुस्लिम सैनिकों ने ब्राह्मणों को यह धमकी दी कि अगर वह शिवाजी का राज्याभिषेक करेंगे तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। परंतु उन्होंने अपने दूत भेजकर काशी के ब्राह्मणों उनके राज्य अभिषेक की बात की और वे मान गए।

    परन्तु मुगलों को पता चलने पर उन्होंने उन ब्राह्मणों और दूतों को पकड़ लिया जिसके बाद ब्राह्मणों ने एक युक्ति लगाईं और दूत से कहा कि शिवाजी किस वंश से है तो दूतों ने कहा की यह हम नहीं जानते। जिस पर ब्राह्मणों ने कहा ऐसे में हम बिना वंश जाने किसी का भी राज्याभिषेक नहीं किया जा सकता। और उन्होंने कहा कि अब हम तीर्थयात्रा पर निकल रहे हैं और काशी का कोई भी दूसरा ब्राह्मण राज्य अभिषेक नहीं करेगा। जब तक राज्य के बारे में और उसके वंश के बारे में पूरी जानकारी ना हो।


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    यह सुनो मुगल सरदारों ने ब्राह्मणों को छोड़ दिया और ब्राह्मणों ने 2 दिन बाद आकर अपने सभी शिष्यों के साथ रायगढ़ में शिवाजी का राज्याभिषेक किया। इसी दौरान उन्हें छत्रपति की उपाधि भी मिली। और उन्होंने अपने नाम का सिक्का भी चलवाया।


    शिवाजी महाराज भारत में एक महान हिंदू रक्षक के तौर पर इसलिए भी जाने जाते हैं क्योंकि उन्होंने देश को मुगल शासन से लड़ना सिखाया और अगर आज शिवाजी नहीं होते तो शायद हमारा देश हिंदू देश ना होता उन्होंने हिंदी और हिंदुओं को समाज में नया रूप दिया नई पहचान दी है। यही कारण है कि शिवाजी महाराज को हर मराठा भगवान मानता है।

    तानाजी छत्रपति शिवाजी में सिंगड़ दुर्ग को जीतने के लिए तानाजी को भेजा, तानाजी ने दुर्ग तो जीत लिया लेकिन युद्ध के दौरान तानाजी वीरगति को प्राप्त हो गए।

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    अन्तिम शब्द:

    दोस्तों अब तो आप छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे (Chhatrapati Shivaji Maharaj History and Biography in Hindi) में पूरी तरह जान ही गए हैं और आपको यह भी पता चल गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती कब है (Chhatrapati Shivaji Maharaaj Jayanti 2020 Hindi),

    अगर आपको Chhatrpati Shivaji Jayanti All Information in Hindi और Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Quotes Photo Pic Images Status in Marathi & Hindi 2020 की यह पोस्ट अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करे।
    आप सभी को HaxiTrick.Com की तरफ़ से शिवाजी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

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