राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस 2024: थीम और इतिहास

हर साल 1 July को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है, भारत की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1991 में National Doctor's Day of India मनाने की शुरुआत की गयी थी।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है? जानिए विषय और इतिहास

नेशनल डॉक्टर्स डे 2024: भारत में हर साल 1 जुलाई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस यानि National Doctor’s Day देश के महान डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय जी की जन्म और पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है।

इस साल 2024 में 1 जुलाई को सोमवार के दिन 33वां राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर हमें विभिन्न बीमारियों और कोरोनावायरस जैसी जानलेवा महामारी से बचाने वाले सभी चिकित्सकों का सम्मान करते हुए उनका आभार व्यक्त करना चाहिए।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctors Day)

 

National Doctor’s Day Information in Hindi:
नामराष्ट्रीय चिकित्सक दिवस या राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस
तिथि1 जुलाई
पहली बार1 जुलाई 1991
शुरुआत1991 में भारत की केंद्र सरकार द्वारा
उद्देश्यप्रख्यात चिकित्सक डॉ बिधान चन्द्र रॉय जी को श्रध्दांजलि देने और सभी डॉक्टरों का सम्मान करने के लिए।
थीम (2023)लचीलेपन और उपचारकारी हाथों का जश्न मनाना
किसकी याद मेंडॉ. बिधान चन्द्र रॉय

 

कब और कैसें हुई राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाने की शुरुआत? (इतिहास)

हर साल 1 July को डॉक्टर्स डे मनाने की शुरूआत भारत की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1991 में की गयी थी। जिसका मकसद भारत के सुप्रसिद्ध चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी और बंगाल के दुसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय जी को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर याद करते हुए श्रध्दांजलि अर्पित करना है।

बिधान चंद्र रॉय एक ऐसे व्यक्ति थे जो चिकित्सा को एक पेशे के रूप में नहीं बल्कि इसे समाज के कल्याण और उत्थान का जरिया मानते थे। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना जिले में हुआ था और उनकी मृत्यु 80 साल की उम्र में इसी दिन वर्ष 1962 में हुई।

 

नेशनल डॉक्टर्स डे क्यों मनाते है? (उद्देश्य)

भारत के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र राय जी की याद में प्रतिवर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को डॉक्टरों के महत्व को बताना और अपने कार्य के प्रति उनकी गहरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के भाव के लिए उन्हें सम्मानित करना है।

साथ ही यह दिन उन डॉक्टरों के लिए भी सबक का दिन है जो मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा कर उन्हें ठगते हैं और अपने कार्य के प्रति जरा भी निष्ठा, विश्वास और इमानदारी नहीं दिखाते।

 

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2024 की थीम (National Doctor’s Day Theme)

हर बार राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस किसी खास विषय पर आधारित होता है, इस साल राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2023 की थीम ‘लचीलेपन और उपचारकारी हाथों का जश्न मनाना’ (Celebrating Resilience and Healing Hands) है। हालांकि पिछली साल 2022 में इसे “फैमिली डॉक्टर्स ऑन द फ्रंट लाइन” (Family Doctors on the Front Line) विषय के साथ मनाया गया था।

इससे पहले National Doctors Day 2021 की Theme ‘एक बेहतर, स्वस्थ दुनिया का निर्माण‘ (Building a Fairer, Healthier World) थी, और इससे पहले 2020 की Theme “lessen the mortality of COVID-19” (COVID-19 की मृत्यु दर को कम करें) थी।

तो वहीं वर्ष 2019 में डॉक्टर्स डे का विषय “Zero tolerance to violence against doctors and clinical establishment” (डॉक्टरों और नैदानिक ​​प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा को जीरो टॉलरेंस) था।

 

 

कौन थे डॉ.बिधानचंद्र रॉय? (About Dr. Bidhan Chandra Roy in Hindi)

डॉ.बिधानचंद्र रॉय जी भारत के महान चिकित्सक, स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और 1948 से 1962 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे थे। उनका जन्म और मृत्यु की तारीख 1 जुलाई थी। चिकित्सा के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है।

बिधान चन्द्र राय जी का जन्म बिहार की राजधानी पटना के बांकीपोर में 1 जुलाई, 1882 को हुआ था, वे अपने माता पिता की पांचवी संतान थे।

उन्होंने अपनी पढाई पूरी की और साल 1909 में वे लंदन के सेंट बार्थोलोमेव्स हॉस्पिटल में प्रवेश लिया जहाँ से उन्होंने 2 साल 3 महीने में ही एक साथ फिजिशन और सर्जन की डिग्री हासिल की। इसके बाद वे जब 1911 में भारत लौटे तो उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

1925 में वे राजनीति जगत में आए और 1930 में, उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी हिस्सा लिया। इसके बाद वे आज़ाद भारत के बंगाल राज्य के दुसरे मुख्यमंत्री बने और अपनी मृत्यु तक (लगभग 14 वर्षों तक) इस पद पर रहते हुए कई सराहनीय कार्य किए।

उन्होंने कई विश्वविद्यालय और नगरो का भी स्थापना की। उनके द्वारा बसाए गए नगरों में दुर्गापुर, कल्याणी, बिधाननगर और अशोकनगर जैसे प्रमुख नगर शामिल हैं।

आखिरकार वे मरते-मरते भी जनता की भलाई के लिए ही काम करते रहे और वर्ष 1961 में अपनी सारी संपत्ति और घर बार जनता को सौप कर 1 जुलाई 1962 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।

डॉ रॉय को उनके द्वारा देशहित में किए गए कार्यों के लिए 4 फरवरी, 1961 को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

 

डॉक्टर्स डे कैसे मनाया जाता है?

1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के मौके पर ज्यादातर लोग डॉक्टरों को उनका ध्यान रखने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के लिए फोन या मैसेज करके या फिर फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मदद से उन्हें ‘धन्यवाद‘ कहते हैं।

  • दुनियाभर में डॉक्टरों को भगवान के समान दर्जा दिया गया है, ऐसे में हमें इस दिन सभी चिकित्सकों का आभार प्रकट करते हुए उन्हें धन्यवाद करना चाहिए।

  • आप अपने फैमिली डॉक्टर के घर जाकर उन्हें ग्रीटिंग कार्ड्स, गुलदस्ते, फूल आदि देकर उन्हें थैंकयू कह सकते हैं।

  • स्कूलों में एवं कई शैक्षणिक संस्थानों में भी इस दिन सभी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें डॉक्टरों पर निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता और चित्रकला/ड्राइंग प्रतियोगिता आदि भी कराई जाती है।

  • साथ ही आप अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्रों या नर्सिंग होम में जाकर Doctors को विशेष रूप से धन्यवाद कर सकते हैं और उन्हें अपनी तरफ से पार्टी या फिर कोई गिफ्ट या सरप्राइज भी दे सकते हैं।

कोरोना के दौरान भारत और कई देशों में डॉक्टरों पर फूल भी बरसाए गए और कोरोना वॉरियर्स के लिए ताली और थाली बजाकर उन्हें सम्मान देने का भी आयोजन किया गया।

यहाँ देखें: 2024 के सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दिवस

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