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Engineer's Day 2020 कब और क्यों मनाया जाता है? | जानिए मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया जी के बारें में

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    Engineers Day 2020: अभियंता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? | जानिए मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया जी के बारें में

    इंजीनियर डे 2020: भारत में आज इंजीनियरों की कमी नहीं है देश में अपने बच्चों को इंजीनियर बनाने की ऐसी लहर चली कि अब देश के ज्यादातर युवा इंजीनियर ही है, हालांकि ऐसा हो सकता है कि वह इंजीनियर फील्ड में काम ना कर रहे हो परंतु उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की हुई है।

    अगर मैं सही हूं तो शायद आप भी एक इंजीनियर ही हैं.... खैर छोड़िए परंतु यदि आप एक Engineer हैं तो आपको Engineers Day 2020 (अभियंता दिवस) के बारे में जानकारी होनी चाहिए और यह दिवस क्यों मनाया जाता है यह भी जान लेना चाहिए।

    यदि आप नहीं जानते कि इंजीनियर डे क्यों मनाया जाता है तो आइए आपको राष्ट्रिय अभियंता दिवस की Theme (विषय) के बारे में विस्तार से बताते हैं। और देश के महान अभियंता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (Mokshagundam Visvesvaraya) जी के बारे में भी जानकारी देते है।

    Engineers day kyu manaya jata hai hindi
    Engineers day kyu manaya jata hai hindi

    National Engineer's Day 2020 Information in Hindi

    National Engineer's Day के बारे में जानकारी:
    नाम: राष्ट्रीय अभियंता दिवस (National Engineer's Day)
    स्मृति दिवस: मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया
    तिथि: 15 सितंबर
    उद्देश्य: देश के सभी इंजिनियरों को उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित करना।
    थीम: N/A
    अगली बार: 15 सितम्बर 2021

    कब और क्यों मनाया जाता है Engineer's Day?

    Engineer's Day (अभियन्ता दिवस) 15 सितम्बर भारत के महान इंजिनियर एवं भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी की जयंती के उपलक्ष में मनाया जाता हैं। इस साल हम सर M. Visvesvaraya जी की 160वीं जयंती और 53वां इंजिनियर दिवस मना रहे है। यह दिन उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इंजीनियर्स डे के रूप मे मनाया जाता है।


    एम. विश्वेश्वरैया जी को 1955 में एक अच्छे इंजिनियर के तौर पर सफलतम कार्य करने के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

    इंजीनियर दिवस का उद्देश्य
    इंजिनियर डे मनाकर विश्व के समस्त इंजिनियरों को सम्मानित किया जाता है। इस दिन को मनाने का लक्ष्य हमारे देश के युवाओं को इंजीनियरिंग के करियर के प्रति प्रेरित करना है और जिन इंजीनियरों ने हमारे देश के उत्थान में अपना योगदान दिया गया है उनकी सराहना करना है।


    इंजीनियर दिवस के दिन हमारे देश के प्रसिद्ध इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी के द्वारा किए गए कार्यों के लिए उन्हें याद किया जाता है तथा देशभर में उनके जन्मदिन (Birthday) को भी बड़े धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है।

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    साल 2020 का इंजीनियर दिवस | Engineer’s Day 2020 Celebration in India

    इस साल 2020 में और हर साल इंजीनियर डे 15 सितंबर को ही मनाया जाता है, इस साल हम मोक्षगुंडम विश्वेश्या जी की 159वीं जयंती मना रहे हैं। इस दिन को लेकर इंजीनियरिंग कॉलेजों द्वारा कई रंगारंग कार्यक्रम किए जाते हैं। परंतु इस साल कोरोना वायरस महामारी के चलते सभी स्कूल-कॉलेज बंद है।

    ऐसे में इस साल इंजीनियरिंग कॉलेज तथा ऑफिस में जो रंगारंग कार्यक्रम होते है वो नहीं हो सकेंगे।

    परंतु आजकल बधाई देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है। लोग एक दुसरे को शुभकामना संदेश देने के लिए सोशल मीडिया एवं Whatsapp तथा फेसबुक का इस्तेमाल करते है और एक दुसरे को मेसेज भेजते है।

    इंजिनियर डे के दिन सभी इंजिनियर को बधाई दी जाती है।


    इंजीनियर्स डे का महत्व

    यदि भारत में इंजीनियरों की स्थिति की बात की जाए तो भारत में हर साल तकरीबन 20 लाख से ज्यादा इंजीनियर तैयार होते हैं, जिनमें अलग-अलग क्षेत्र के इंजीनियर शामिल है जैसे कंप्यूटर साइंस, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक, मैकेनिकल एवं केमिकल इंजीनियरिंग आदि।

    साथ ही भारत दुनिया के उन अग्रणी देशों में से एक है जहां आईटी इंजीनियरों की भारी संख्या मौजूद है।

    इसके साथ ही एक रिपोर्ट की माने तो हर साल देश में तमाम तकनीकी शिक्षा संस्थानों में इंजीनियर बनने के लिए पढ़ाई करने वाले छात्रों (करीब 8 लाख़) में से लगभग 60 फ़ीसदी छात्र बेरोजगार ही रह जाते हैं।

    अन्य आंकड़ों की माने तो हर साल औसतन 65% से 75% आईआईटी के छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट नहीं हो पाता।


    यह भी पढ़े: कंप्यूटर सिक्योरिटी डे: जाने कंप्यूटर सुरक्षा दिवस का महत्व

    National Engineer's Day 2020 Themes

    National Engineer's Day हर साल एक ख़ास Theme (विषय) के साथ मनाया जाता है ताकि इस दिन को एक अलग आकर्षण और उत्साह के साथ मनाया जा सके। इस साल की थीम आनी अभी बाकी है।

    हमने पिछले कुछ वर्षों की Themes नीचे दी है:


    • 2019 के लिए थीम: इंजीनियरिंग के लिए बदलाव (Engineering for Change)

    • 2018 के लिए थीम: ज्ञान युग के लिए इंजीनियरिंग चुनौतियां (Engineering Challenges for Knowledge Era)

    • 2017 के लिए थीम: विकासशील भारत में इंजीनियरों की भूमिका (Role of Engineers in a Developing India)

    • 2016 के लिए थीम: युवा इंजीनियरों के लिए कोर सेक्टर में सुधार के लिए कौशल विकास: विजन 2025, (Skill Development for Young Engineers to Reform the Core Sector: Vision 2025)

    • 2015 के लिए थीम: ज्ञान युग के लिए इंजीनियरिंग चुनौतियां, (Engineering Challenges for Knowledge Era)

    • 2014 के लिए थीम: भारतीय इंजीनियरिंग को विश्वस्तरीय बनाना, (Making Indian Engineering World-Class)

    • 2013 के लिए थीम: मितव्ययी इंजीनियरिंग-कम संसाधन के साथ अधिक प्राप्त करना (Frugal Engineering-Achieving More with Fewer Resources)

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    मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया कौन थे? | Mokshagundam Visvesvaraya biography in hindi

    एम् विश्वेश्वरैया भारत के महान इंजिनियरों में से एक थे, इन्होंने ही आधुनिक भारत की रचना की और भारत को नया रूप दिया। उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में देश के लिए असाधारण योगदान दिया। वैसे तो मोक्षागुंडम जी ने अलग-अलग फील्ड में कार्य किया परंतु उन्हें शिक्षा एवं इंजीनियरिंग के लिए किए गए उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।

    जन्म और माता-पिता
    विश्वेश्वरैया का पूरा नाम मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया हैं इनका जन्म 15 सितम्बर, 1860 को मुद्देनाहल्ली गाँव, कोलर जिला, कर्नाटका में हुआ था। इनकी माता का नाम वेंकचाम्मा था जो एक धार्मिक महिला थी। तथा पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री था जो संस्कृत विद्वान और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। जब विश्वेश्वरैया 15 साल के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया था।

    पढाई लिखाई:
    उन्होने चिकबल्लापुर से अपनी प्राइमरी स्कूल की पढाई Complete की, और आगे की पढाई के लिए वे बैंग्लोर चले गए। 1881 में विश्वेश्वरैया जी ने मद्रास यूनिवर्सिटी के सेंट्रल कॉलेज से बीए की परीक्षा पास की।

    इसके बाद मैसूर सरकार से सहायता मिलने के बाद उन्होंने पूना के साइंस कॉलेज में इंजीनियरिंग (Civil Engineering) के लिए Admission लिया। 1883 में LCE और FCE Exam में उनका प्रथम स्थान आया (यह परीक्षा आज के BE के समान है)।

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    मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या द्वारा किए गए कुछ ऐतिहासिक कार्य:
    पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद उन्हें नासिक में असिस्टेंट इंजीनियर की जॉब मिली इस दौरान उन्होंने एक नई सिंचाई प्रणाली ब्लॉक सिस्टम की शुरूआत की और उन्होंने मैसूर स्थित कृष्ण राज सागर बांध के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इसके साथ ही उन्होंने 1903 में पुणे स्थित खड़कवासाला जलाशय पर स्थापित स्वचालित वीर जल बाढ़ को डिजाइन और पेटेंट कराया। उन्होंने बाढ़ सुरक्षा प्रणाली को कुछ इस तरह से तैयार किया कि समस्त भारत में उन्हें एक कुशल अभियंता के तौर पर जाना जाने लगा है।

    उन्होंने बांध के दरवाजों पर भी काफी अधिक कार्य किया और ऐसे दरवाजे लगाए जिससे वह अधिक से अधिक बाढ़ का दबाव झेल सके।

    इतना ही नहीं अपने उद्घाटन के समय कावेरी नदी पर बना कृष्णराजासागरा बांध एशिया का सबसे बड़ा जलाशय था, जिसका निर्माण मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या जी की देखरेख में ही हुआ था।

    विश्वेश्वरैया जी ने मैसूर सरकार के साथ काम करते हुए मैसूर की का काया पलट कर दिया इसीलिए उन्हें मॉडर्न मैसूर स्टेट का जनक भी कहा जाता है।

    उन्होंने मैसूर में विश्वेश्वरय्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के स्थापना करवाई साथ ही उन्होंने आयरन एंड स्टील फैक्ट्री, श्री जयचामाराजेंद्र पॉलिटेक्निक संस्थान, बेंगलुरु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर सेंचुरी क्लब, मैसूर चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं यूनिवर्सिटी, मैसूर साबुन फैक्ट्री के साथ-साथ कई अन्य फैक्ट्रियों एवं शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना भी करवाई।

    अन्य बातें
    एम. विश्वेश्वरैया ने 1912 से 1918 तक मैसूर राज्य के 'दीवान' के रूप में भी काम किया।

    जिस समय वे भारत निर्माण में यह सभी महत्वपूर्ण कार्य कर रहे थे उस समय देश में ब्रिटिश साम्राज्य था परंतु उन्होंने कभी भी अपने कार्य में इसे बाधा नहीं बनने दिया और अपने कामों में जुटे रहे।

    वह हमेशा गरीबी, अशिक्षा एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं को लेकर बड़े परेशान रहा करते थे ऐसे में जब उनकी नियुक्ति मैसूर में हुई तो उन्होंने मैसूर में अपने कार्यकाल के दौरान स्कूलों की संख्या में दुगनी से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी।

    आजकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले कई बच्चे एवं कई इंजीनियर नशे के आदी हो जाते हैं परंतु एम. विश्वेश्वरैया जी एक आदर्शवादी, अनुशासन वाले तथा नशे से दूर रहने वाले एक महान व्यक्तित्व के धनी थे।

    विश्वेश्वरैया जी को समय का बहुत पाबंद माना जाता है बताया जाता है कि वह कहीं भी 1 मिनट भी लेट नहीं होते थे।

    उन्होंने अपने आप को कुछ इस तरह से फिट बनाया हुआ था कि वह 92 साल की उम्र में भी अपने पैरों पर बिना किसी सहारे के चलते थे।


    मृत्यु (Death):
    देश को अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए 102 वर्ष की आयु में 14 अप्रैल 1962 को M. Visvesvaraya का निधन हो गया। इससे पहले उनके 100वें जन्मदिन के अवसर पर भारत सरकार द्वारा उनके सम्मान में उनकी फोटो और नाम वाला स्टाम्प (डाक टिकट) निकाला था।

    Engineers’ Day 2020 - FAQs

    15 सितंबर को क्या है?

    15 सितंबर को भारत रत्न से सम्मानित देश के महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती है। इस दिन को राष्ट्रीय अभियंता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।


    भारतीय इंजीनियरिंग का जनक किसे कहा जाता है?

    भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया "भारतीय इंजीनियरिंग के जनक" कहे जाते हैं।


    प्रथम महिला इंजीनियर का नाम क्या है?

    तमिलनाड़ु की रहने वाली अय्यालासोमयजुला ललिता (Ayyalasomayajula Lalitha) को भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में याद किया जाता है। तो वहीं दुनिया की पहली महिला इंजीनियर एलिसा लेओनिडा जमफिरेसको (Elisa Leonida Zamfirescu) है।


    भारत ने इंजीनियर्स डे कब मनाना शुरू किया?

    1967 से हर साल 15 सितम्बर के दिन को भारत में इंजीनियर्स डे के रूप में मनाया जाता है। इस साल 53वां अभियंता दिवस मनाया जा रहा है।


    विश्व अभियंता दिवस कब मनाया जाता है?

    वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन ने 4 मार्च को 'वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे फॉर ए सस्टेनेबल वर्ल्ड' के रूप में नामित किया है।


    अन्तिम शब्द

    अब तो आप समझ ही गए होंगे की इंजीनियर्स डे कब और क्यों मनाया जाता है? साथ ही आपको M. Visvesvaraya जी के बारे में भी जानकारी मिल गयी है। यदि आपको Engineer’s day 2020 Celebrate की Hindi में दी गयी यह Information अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और दूसरे Engineers के साथ भी अवश्य शेयर करें।

    और आपको अभियंता दिवस के बारे में यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट में बताए।

    The End
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