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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती 2020: जानिए Netaji Subhash Chandra Bose की Biography

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    नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती २०२०: - Netaji Subhash Chandra Bose Biography and History Information in Hindi

    Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Date: इस साल देश नेताजी की उपाधि से सम्मानित भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, देश प्रेमी तथा 'जय हिंद' और 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे नारे देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की 123 वी जयंती मना रहा है, यानी 23 जनवरी 2020 को नेताजी सुभाष चंद्र बॉस का 123 वां जन्मदिन है. जिसे काँग्रेस पार्टी में मानाने का ऐलान कर दिया है.

    साथ ही आज शिव सेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे (बाल ठाकरे) की जयंती भी है.
    Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 23 January 2020 Biography In Hindi
    Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 23 January 2020 Biography In Hindi

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फ़ौज (Azad Hindi Fauz) के सुप्रीम कमांडर और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं, आज के इस लेख में हम आपको सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के अवसर पर सुभाष चंद्र बोस जी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं जिसमें हम आपको नेताजी सुभाष चंद्र बोस कौन थे (Biography of Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi Language) उन्हें नेताजी की उपाधि कैसे मिले तथा सुभाष चंद्र बोस जी की मृत्यु कैसे हुई इन सभी के बारे में बात करेंगे साथ ही आजाद हिंद फौज और नेताजी के राजनीतिक जीवन पर भी कुछ प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे.


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    अब तो आपको पता चल ही गया है की नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की जयंती कब मानते है, आपको एक बार फिर से याद दिला दें कि हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के जन्मदिन के मौके पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती मनाई जाती है. तो चलिए शुरू करते है और जानते है नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की जीवनी यानि बायोग्राफी और इतिहास हिंदी में (History and Biography of Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi Language).


    नेताजी सुभाषचंद्र बॉस की जीवनी | Subhash Chandra Bose Biography in Hindi

    1. जन्म: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म ब्रिटिश भारत हुकूमत के समय ओडिशा के कटक शहर में 23 जनवरी सन 1897 को एक हिंदू कायस्थ परिवार में नौवीं संतान के रूप में हुआ।

    2. माता पिता: सुभाष चंद्र बोस जी के पिता कटक शहर के मशहूर वकीलों में से थे उनका नामजानकीनाथ बोस था, अपने शुरुआती दिनों में वह एक सरकारी वकील थे और साथ ही वह बंगाल विधानसभा के सदस्य भी थे तथा उनकी माता का नाम प्रभावती था।

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    4. शिक्षा दीक्षा: सुभाष चंद्र बोस ने अपनी प्राथमिक शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेण्ट स्कूल से पूरी की, जिसके बाद 1901 में उन्होंने आगे की पढ़ाई हेतु रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में एडमिशन लिया और 1915 में उन्होंने इंटर की परीक्षा में खराब स्वास्थ्य के कारण द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने 1916 में दर्शनशास्त्र (ऑनर्स) की पढ़ाई के लिए प्रेसीडेंसी कॉलेज B.A में नाम लिखवाया.

      हालांकि उन्हें अध्यापकों और छात्रों के बीच हुए झगड़े में छात्रों के नेतृत्व के कारण 1 साल के लिए निलंबित कर दिया गया और उनकी परीक्षा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया.

      जिसके बाद उन्होंने बड़ी जद्दोजहद से स्कॉटिश चर्च कॉलेज में एडमिशन लिया और 12वीं के अंकों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और उन्हें B.A की परीक्षा में साल 1919 में प्रथम श्रेणी प्राप्त हुई और कोलकाता विश्वविद्यालय में वह दूसरे स्थान पर थे।

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    6. सेना में भर्ती: सुभाष चंद्र बोस जी की आंखों में दिक्कत होने के कारण उन्हें 49वीं बंगाल रेजिमेंट की भर्ती मैं अयोग्य घोषित कर दिया गया, परंतु उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी की परीक्षा दी और रंगरूट के रूप में फोर्ट विलियम सेनालय में शामिल हो गए।

    7. आईसीएस में प्रवेश: सुभाष चंद्र बोस जी के पिता की दिली इच्छा थी कि उनका बेटा सुभाष एक ICS (फुल फॉर्म: इंपिरियल सिविल सर्विस) में जाए, परंतु उनकी उम्र के हिसाब से उनके पास परीक्षा पास करने का केवल चांस था और गहन विचार करने के बाद वे परीक्षा कि तैयारी के लिए 15 सितंबर 1919 को इंग्लैंड रवाना हो गए.

      परंतु तैयारी के लिए उन्हें लंदन के किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं मिला जिसके परिणाम स्वरूप उन्होंने मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास (ऑनर्स) की परीक्षा के अध्ययन हेतु किट्स विलियम हॉल में प्रवेश लिया, वहां एडमिशन लेकर उन्होंने आईसीएस की तैयारी शुरू की और साल 1920 में प्रायरिटी लिस्ट में उन्हें चौथा स्थान प्राप्त हुआ.

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      परंतु उनके हृदय मस्तिष्क में कहीं ना कहीं स्वामी विवेकानंद जी एवं महर्षि अरविंद घोष जी के आदर्श विचारों ने अपना घर बनाया हुआ था, जिसके कारण उनका मन अंग्रेजों की गुलामी करने से नकार रहा था, इसलिए उन्होंने 22 अप्रैल 1921 को अपना त्यागपत्र दे दिया, आपको बता दें ICS उस समय Imperial Civil Service के नाम से जानी जाती थी जो ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत थी।

    8. स्वतंत्रता संग्राम: नेताजी सुभाष चंद्र बोस 9 जुलाई 1921 में भारत की आजादी के लिए तेज होती गतिविधियों की खबर पाकर भारत आए और मुंबई में गांधी जी से मुलाकात की. हालांकि वह गांधीजी के अहिंसा के विचारों से बिल्कुल भी सहमत नहीं थे, परंतु उन्होंने ही महात्मा गांधी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था।

      सुभाष बोस अपने जीवनकाल में कुल 11 बार जेल गए.

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    10. आंदोलन: गांधी जी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में जब दास बाबू इस आंदोलन का नेतृत्व बंगाल से कर रहे थे, तब सुभाष चंद्र बोस ने इस आंदोलन में सहभागिता दी.

      1927 में साइमन कमीशन के भारत में आने के विरोध में काले झंडे दिखाए गए तो उस समय कोलकाता से सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा साइमन कमीशन के विरोध का नेतृत्व किया गया।

    11. सुभाष बोस की स्वतंत्रता नीति: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मानना था कि विश्व में अंग्रेजों के दुश्मनों के साथ लड़कर भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाई जा सकती है, जिसके फलस्वरूप वह जब यूरोप में थे तब वह जर्मनी में हिटलर से मिले जो इंग्लैंड का एक प्रकार से दुश्मन था.

      उनके अनुसार दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है और स्वतंत्रता हासिल करने के लिए कूटनीति और सैनिकों का भी साथ होना आवश्यक है।

    12. विवाह: सुभाष चंद्र बोस का विवाह 1934 में ऑस्ट्रिया की महिला टाइपिस्ट एमिली शेंकल (Emilie Schenkl) से हिंदू रीति रिवाज के साथ संपन्न हुआ. यह उस समय की बात है जब सुभाष बोस ऑस्ट्रिया में अपना इलाज करा रहे थे और अपनी बुक के लिए उन्हें एक अंग्रेजी टाइपिस्ट की जरूरत थी, इस तरह उनकी मुलाकात एमिली शेंकल से हुई.

      सुभाष चंद्र की एक बेटी भी है जिनका नाम अनिता बोस फाफ है।

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    14. कांग्रेस के अध्यक्ष: सुभाष चंद्र बोस जी को कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में साल 1938 में महात्मा गांधी जी द्वारा चुना गया परंतु महात्मा गांधी जी को सुभाष चंद्र बोस जी के काम करने का तरीका पसंद नहीं आया और 1939 में जब दोबारा अध्यक्ष पद के चुनाव हुए तो गांधीजी के विरोध के बावजूद भी सुभाष चंद्र बोस जी ने यह चुनाव जीता और अध्यक्ष बने परंतु गांधी जी के विरोध के कारण उन्होंने 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

    15. आजाद हिंद फौज की स्थापना: सुभाष चंद्र बोस जी का मानना था कि आजादी के लिए हमें सैन्य बल की काफी जरूरत पड़ेगी, इसीलिए उन्होंने 21 अक्टूबर 1943 को भारत के आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज गठन किया, और सुभाष चंद्र बोस जी आजाद हिंद फौज के प्रधान सेनापति भी रहे।

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    17. कैसे मिली नेताजी की उपाधि: जब सुभाष बोस ने जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की और इसी रेडियो पर अपने भाषण में गांधीजी को संबोधित करते हुए उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बताया तब उन्होंने गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया.

      जिसके बाद महात्मा गांधी जी ने भी उन्हें नेताजी कहकर सम्मान दिया तभी से सुभाष चंद्र बोस जी को नेताजी की उपाधि मिली और वह नेताजी के नाम से जाने जाते हैं।

    18. मृत्यु: नेताजी की मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है परंतु ऐसा माना जाता है कि जब नेताजी 18 अगस्त 1945 को जापान से हवाई यात्रा के लिए रवाना हुए तो उनका जहाज दुर्घटना ग्रस्त हो गया और इस दुर्घटना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई. परन्तु उनके परिवार जनों के मानना है कि साल 1945 में उनकी मृत्यु नहीं हुई थी वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे।

      हालाँकि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार की मानें तो उनका भी यही कहना है कि नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ही हुई थी।

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    20. भारत की आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस की विश्व यात्रा: सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी के लिए विश्व स्तर पर भ्रमण किया और कई शक्तिशाली लोगो से भी मिले.

      सुभाष चंद्र बोस जी 29 मई 1942 को जर्मनी के सर्वोच्च लीडर हिटलर से मिले, परंतु हिटलर की तरफ से सहायता की उम्मीद ना होने के कारण वे सीधे जापान के ओर बढ़े और पानी के रास्ते द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंडोनेशिया के बंदरगाह पहुंचे. वहां उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री जनरल हिदेकी तोजो ने उन्हें सहयोग देने का भरोसा दिया.

      यहां उन्हें जापान का काफी अच्छा साथ मिला और उन्होंने आजाद हिंद फौज और जापानी सेना के साथ लड़कर भारत पर आक्रमण किया और अंग्रेजों की हुकूमत से अंडमान और निकोबार दीप आजाद कराया परंतु द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान पर गिराए गए परमाणु बम से जापान तबाह हो चुका था. ऐसे में नेताजी ने रूस की सहायता लेने का फैसला किया और रूस जाते समय ही उनकी मृत्यु अंग्रेजों द्वारा करवा दी गई।

    21. सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिए गए नारे:
      1. चलो दिल्ली: चलो दिल्ली कानाराम नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपनी आजाद हिंद फौज की सेना को प्रेरित करने के लिए दिया.
      2. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा
      3. जय हिंद.

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    अंतिम शब्द

    नेताजी द्वारा देश के लिए किए गए कई फैसलों के दूरगामी परिणाम हुए, सुभाष बोस जी ने देश की आज़ादी के लिए दिलों-जान से कोशिश की और देश को स्वाधीनता की और अग्रसर किया, आपको सुभाष चंद्र बोस के बारे में यह जानकारी (Information About Netaji Subhash Chandra Bose History and Biography in Hindi) कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताए.

    अगर आपको नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जयंती (Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 Hindi) पर उनकी जीवनी (Netaji SubhashChandra Bose Jivani) का यह लेख पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर भी शेयर करें.
    The End
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