संत रविदास जी की जयंती 2020 पर जानिए गुरु रविदास जी की जीवनी

    संत गुरु रविदास जयंती 2020: जानिए कब, क्यों और कैसे मनाते है, और संत गुरु रविदास जी की जीवनी

    Sant Ravidas Jayanti 2020 Information in Hindi: आपने मन चंगा तो कठौती में गंगा वाली कहावत तो जरूर सुनी होगी आज उन्हीं महान संत गुरु रविदास जी की जयंती है जिसे भारत में रविदास जयंती (Sant Ravidas Jayanti 2020) के रूप में मनाया जाता है इस साल संत रविदास जी की जयंती 9 फरवरी 2020 को रविवार के दिन मनाई जाएगी।

    यह दिन लोगों को शांति, सच्चाई और भाईचारे का संदेश देता है, भारत की एक बड़ी आबादी संत रविदास जी को भगवान के समान उन्हें पूजती हैं।

    Sant Guru Ravidas Jayanti 9 Fabruary 2020 Images Photos In Hindi
    Sant Guru Ravidas Jayanti 9 Fabruary 2020 Images Photos In Hindi

    आज के इस लेख में हम आपको संत रविदास जी की जयंती (Sant Ravidas Jayanti 2020) पर संत रविदास जी कौन थे, संत रविदास जी की जीवनी बायोग्राफी, जीवन परिचय, इतिहास और संत रविदास जयंती कब मनाई जाती है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।


    गुरु रविदास जयंती कब और कैसें मनाते है | Sant Ravidas Jayanti in Hindi

    Sant Ravidas Jayanti Kab Hai 2020 Mein: गुरु रविदास जी की जयंती को हर साल माघ माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जो इस साल 2020 में 9 फरवरी को रविवार के दिन पड़ रहा है इसीलिए इस साल संत रविदास जयंती 9 फरवरी 2020 को है।

    संत रविदास जी के जन्मदिन को रविदास जयंती के रूप में देश भर में मनाया जाता है इस साल हम संत रविदास जी की 643 वीं जयंती मनाने जा रहे हैं।

    Sant Ravidas जी की जयंती को उनके उपासक बड़े ही धूमधाम से मानते है इस दिन सुबह नगर कीर्तन, सत्संग और लंगर आदि का आयोजन किया जाता है।


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    संत रविदास जी की जीवनी | Sant Ravidas Biography in Hindi

    • 1. कौन थे: गुरु रविदास जी एक महान दार्शनिक, कवि, महान संत, भगवान के उपासक और भारत के महान समाज सुधारकों में से एक थे।

    • 2. जन्म: गुरु रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास स्थित सीर गोवर्धन गांव में हुआ उन्हें रैदास नाम से भी जाना जाता था।

      हालांकि उनके जन्म को लेकर सभी लोगों की अपनी अलग राय हैं कुछ लोगों के अनुसार आपका जन्म 1376-77 के दौरान हुआ तो वही कुछ कागजों में उल्लेख है की रविदास जी ने अपना जीवन 1450 से 1520 के बीच पृथ्वी पर बिताया। इनके जन्म स्थान को श्री गुरु रविदास जन्म अस्थान के नाम से जाना जाता है।

    • 3. माता पिता: संत रविदास जी के पिता का नाम राघवदास था। जो चमड़े के जूते बनाने और मरम्मत करने का काम किया करते थे लोग उन्हें रघु नाम से भी जानते हैं। आप की माता जी का नाम कर्माबाई था।

    • 4. वैवाहिक जीवन: संत रविदास जी का विवाह लोना नामक कन्या से हुआ। तथा इनकी दो संताने थी, एक पुत्र जिसका नाम विजय दास था और एक पुत्री जिसका नाम रविदासिनी था।


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    • 5. शिक्षा दीक्षा: संत रविदास जी के गुरु पंडित श्री शारदानंद जी थे। जिनसे उन्होंने बचपन से ही शिक्षा लेना आरंभ कर दिया था। परंतु बाद में ऊंच-नीच के कारण रविदास जी को उनकी पाठशाला में पढ़ने नहीं दिया गया, परंतु पंडित शारदानंद जी ने रविदास जी को व्यक्तिगत तौर पर पढ़ाना आरंभ किया।

      रविदास जी शुरू से ही काफी होनहार और प्रतिभाशाली थे। उनके गुरु ने शुरू से ही उनमें एक अच्छा अध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक बनने की झलक देख ली थी।

    • 6. व्यवसायिक जीवन: संत रविदास जी अपने पिता के जूते बनाने के व्यवसाय में हाथ बटाया करते थे, परंतु वह साधु-संतों और फकीरों को नंगे पांव देख अक्सर उन्हें मुफ्त में जूते चप्पल दे दिया करते थे। जिससे नाराज होकर उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया।

      घर से निकाले जाने पर उन्होंने एक कुटिया बनाई और जूते चप्पल की मरम्मत का काम शुरू किया और इससे होने वाली आमदनी से अपना गुजर-बसर करने लगे और साधु संतों की संगत में अपना जीवन बिताने लगे। इनके अच्छे व्यवहार और इनके अंदर समाए ज्ञान के कारण। लोग इनके आसपास रहने लगे।

    • 7. रविदास जी के सामाजिक कार्य: संत रविदास जी एक छोटी जाति से संबंध रखते थे जिसके कारण उनके साथ उस समय काफी भेदभाव किया जाता था। उनके साथ लोग जाति, धर्म और रंग के आधार पर भेदभाव करते थे परंतु कुछ लोग उन्हें भगवान द्वारा भेजे गए धर्म रक्षक के रूप में मानते थे ऐसे में उन्होंने इन सभी भेदभावों का डटकर मुकाबला किया।

      अपनी तरफ से लोगों को यह समझाते थे कि इंसान जाति, धर्म। या भगवान पर विश्वास के आधार पर नहीं जाना जाता। इंसान केवल अपने कर्मों से ही दुनिया में पहचाना जाता है।

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    • 8. रविदास जी की मृत्यु: रविदास जी की मृत्यु का षड्यंत्र उनके दिन प्रतिदिन बढ़ते अनुयायियों और भगवान के प्रति उनके प्रेम सद्भावना, मानवता और सच्चाई से जलने वाले कुछ ब्राह्मणों ने रचा। बताया जाता है कि रविदास जी के विरोधियों द्वारा एक सभा का आयोजन किया गया, और उस सभा में रविदास जी को भी बुलाया गया।

      रविदास जी इन ब्राह्मणों की चाल से अच्छी तरह वाकिफ थे। जिससे वह तो बच जाते हैं लेकिन गलती से उनके मित्र भला नाथ को मार दिया जाता है।

      गुरुजी के उपासको और अनुयायियों की माने तो रविदास जी ने अपने 120-126 वर्ष के शरीर को 1540 AD में। वाराणसी में ही त्याग दिया। जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

    • 9. सीख: रविदास जी से आप एकाग्रता, सहनशीलता, कार्य प्रियता, लक्ष्य प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करना, कार्यों को लगन, ईमानदारी और सच्चाई से करना तथा भगवान के प्रति ध्यान लगाना और कई और अच्छी बाते सीख सकते हैं।


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    कैसे बने रविदास जी संत, जानिए पूरी कहानी:

    रविदास जी और उनके गुरु शारदा नंद जी के बेटे में काफी अच्छी मित्रता थी एक बार की बात है जब दोनों लुका छुपी का खेल खेल रहे थे तो खेलते खेलते रात हो गई। और दोनों ने अगले दिन पुनः इस खेल को जारी रखने का फैसला किया और सोने चले गए जब अगले दिन रविदास जी अपने मित्र के साथ खेलने पहुंचे तो पता चला कि उनके दोस्त की तो मृत्यु हो चुकी है।

    यह सुनकर रविदास जी अचंभे रह गए परंतु रविदास जी में बचपन से ही अलौकिक शक्तियों का वास था और जब वह यह बात सुनकर अपने मित्र के पास पहुंचे और कहा कि मित्र उठो यह समय सोने का नहीं है चलो मेरे साथ खेलो। इतना सुनते ही उनका मरा हुआ दोस्त उठ खड़ा हुआ और यह सब देख वहां खड़े सभी लोग हक्के बक्के रह गए।


    संत रविदास जी का भेदभाव पर प्रभाव:

    उनके अनुसार भगवान ने इंसान को बनाया है इंसान ने भगवान को नहीं। इसका तात्पर्य यह है कि भगवान द्वारा बनाए गए इंसानों में भेदभाव कैसे हो सकता है? सभी इंसान एक समान है।

    दूसरों की क्या कहें? उनके जाति वाले भी उन्हें आगे बढ़ने से रोकते थे। और अक्सर उन्हें यह कहा जाता था कि तिलक कपड़े और जनेऊ केवल ब्रह्मण और ऊंची जाति वाले लोग पहन सकते हैं हम शुद्र लोग नहीं।

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    परंतु जब रविदास जी ने उन सभी की बातों का खंडन करते हुए, जब तिलक जनेऊ और धोती पहनी तो ब्राह्मणों ने उनके खिलाफ राजा से शिकायत कर दी और राजा ने जब उन्हें सभा में बुलाया तो रविदास जी ने बड़े प्यार से उत्तर दिया कि शूद्र में भी वही लाल रक्त, ह्रदय और दूसरों की तरह ही समान अधिकार है।

    ऐसा बताया जाता है कि उन्होंने भरी सभा में सबके सम्मुख अपनी छाती चीरकर चारों युगों सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग की तरह ही उनके लिए 4 जनेऊ बना दिए जो सोना, चांदी, तांबा, और कपास से बने थे। यह देख सभा में शामिल सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए और शर्मसार होकर उनके पैरो को छूकर माफी मांगी और उन्हें सम्मानित किया।

    इस पर रविदास जी ने उन्हें माफ करते हुए कहा कि जनेऊ पहनने से कोई किसी को भगवान नहीं मिल जाता और अपना जनेऊ राजा को दे दिया जिसके बाद उन्होंने अपने जीवन काल में ना ही जनेऊ पहना और ना तिलक। लगाया।


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    मन चंगा तो कठौती में गंगा की कहानी

    एक बार की बात है जब संत रविदास जी के एक पड़ोसी मित्र ने उनसे गंगा स्नान पर चलने को कहा, परंतु उनके पास उनके जूते बनाने के कार्य के कारण समय ना होने पर उन्होंने अपने मित्र को एक सुपारी देते हुए कहा कि यह सुपारी आप मेरी तरफ से गंगा मैया को अर्पित कर दें।

    जिसके बाद जब वह पड़ोसी मित्र गंगा स्नान के दौरान संत रविदास जी के नाम पर मां गंगा को वह सुपारी अर्पित करता है तो उन्हें एक कंगन मिलता है। कंगन पाकर वह लालच में आ जाता है और उस कंगन को राजा को देकर बदले में इनाम ले लेता है।

    राजा। उस कंगन को जब रानी को भेट में देते हैं तो रानी को वह कंगन बहुत पसंद आता है और रानी, राजा से इसका दूसरा जोड़े की मांग करती है जिस पर आजा उस व्यक्ति को दुबारा भुलवाता है जिसने उन्हें कंगन दिया था।

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    दूसरा कंगन मांगने पर व्यक्ति परेशान होकर मदद के लिए रविदास जी से मिलता है और सभी सच्चाई बताते हुए अपने लालच करने पर शर्मिंदा होकर उनसे माफी भी मांगता है।

    अपने पड़ोसी मित्र को परेशान देख रविदास जी उसे माफ कर देते हैं और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति से माता गंगा का ध्यान करते हुए अपनी कठौती में हाथ डालकर दूसरा कंगन भी निकाल देते हैं।

    यह देख उनका पड़ोसी मित्र की खुशी का ठिकाना नहीं रहता और वह रविदास जी से इस चमत्कार के पीछे का राज पूछता है तो रविदास जी कहते हैं कि मन चंगा तो कठौती में गंगा।


    अंतिम शब्द

    दोस्तों और तो आप संत रविदास जी के बारे में पूरी तरह से जान ही गए हैं और रविदास जयंती कब, क्यों और कैसे बनाई जाती है (Sant Ravidas Jayanti Kab Hai 2020 Mein) यह भी समझ गए हैं।

    अगर आपको गुरु रविदास जी की जयंती पर उनकी जीवनी (Sant Ravidas Ji Biography in Hindi) कि यह जानकारी पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें तथा गुरु रविदास जी की आपको सबसे अच्छी बात कौन सी लगी यह भी हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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