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World Theatre Day 2021: विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च)

    World Theatre Day 2021: 27 मार्च को मनाया जाता है विश्व रंगमंच दिवस? जानिए उद्देश्य और महत्व

    Viswa Rangmanch Diwas 2021: भारत फिल्मों का देश है और यहाँ हर कोई फ़िल्मी है। भारत में हर हफ्ते करीबन दो-तीन बॉलीवुड फिल्में तथा क्षेत्रीय भाषाओं में भी कई फिल्मे रिलीज हुआ करती थी परंतु अब OTT प्लेटफार्म और कोरोनावायरस महामारी ने सिनेमा कारोबार को बड़ा झटका दिया है। साथ ही बीते सालों में लोगों का Webseries के प्रति झुकाव बढ़ा है।

    किसी भी सिनेमाप्रेमी व्यक्ति के जीवन में फिल्मों और थिएटर का महत्व बताने की आवश्यकता नहीं है परन्तु अब इसकी लोकप्रियता कम होती नज़र आ रही है। ऐसे में इस साल 27 मार्च 2021 को मनाया जाने वाला विश्व थिएटर दिवस काफी ख़ास होने जा रहा है।

    World Theatre Day 27 March 2020 Vishwa Rangmanch Diwas
    World Theatre Day 27 March 2020 Vishwa Rangmanch Diwas

    आइए आपको अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस के बारे में बताते है और जानते है कि World Theatre Day कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है? तथा भारतीय नाट्यशाला का इतिहास और थिएटर का महत्व क्या है।


    विश्व रंगमंच दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

    विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना सन 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान) द्वारा की गई थी तभी से हर साल 27 मार्च को World Theatre Day मनाया जाता है। इसे मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को थिएटर के मूल्यों और महत्व बताना तथा दुनिया भर में रंगमंच को बढ़ावा देना है।


    इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (ITI): दुनिया का सबसे बड़ा प्रदर्शन कला संगठन 'अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI)' है, इसकी स्थापना नृत्य विशेषज्ञों और यूनेस्को द्वारा साल 1948 में की गई थी। आईटीआई का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है। दुनिया भर में आईटीआई के 85 से अधिक केंद्र हैं।


    रंगमंच दो शब्दों के मेल से बना है रंग और मंच, यानि कि ऐसा मंच जिस पर विभिन्न रंगों को लोगों के बीच प्रदर्शित या पेश किया जा सके अथार्त रंगमंच, पश्चिमी देशों में या अंग्रेजी में इसे थिएटर शब्द से संबोधित किया जाता है।


    विश्व थिएटर दिवस क्यों मनाया जाता है?

    इसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों को रंगमंच संस्कृति के विषय में बताना उसके विचारों के महत्व को समझाना और थिएटर के प्रति लोगों में दिलचस्पी पैदा करना तथा रंगमंच से जुड़े लोगों को सम्मानित करना है।


    इसके अलावा:
    • दुनियाभर में अपने सभी रूपों में रंगमंच को बढ़ावा देना।
    • लोगों को थिएटर के मूल्यों से अवगत कराना।
    • खुद के लिए सभी रूपों में रंगमंच का आनंद लेना।
    • रंगमंच के आनंद को दूसरों के साथ बाँटना, आदि।

    World Theatre Day Hindi Image
    World Theatre Day Hindi Image

    World Theatre Day कैसे मनाते है? (Theme/Message)

    विश्व रंगमंच दिवस के दिन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

    इस दिन लोगों को रंगमंच के विषय और संस्कृति के बारे में प्रेरित करने और अवगत कराने के लिए इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट द्वारा थिएटर से संबंधित एक सम्मानित कलाकार को भी बुलाया जाता है जो विश्व थिएटर दिवस के लिए आधिकारिक सन्देश (मैसेज) जारी करता है।

    1962 में पहला अन्तर्राष्ट्रीय सन्देश फ्रांस के जीन काक्टे (Jean Cocteau) ने दिया, तथा 2002 में, भारत के गिरीश कर्नाड को यह मौका मिला। यह मैसेज 50 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद किया जाता है।

    विश्व रंगमंच दिवस 2020 के संदेश को पाकिस्तान के शाहिद नदीम ने लिखा था। वह पाकिस्तान के प्रसिद्ध नाटककार और अजोका थियेटर के प्रमुख हैं।



    भारत की पहली नाट्यशाला और रंगमंच का इतिहास:

    बताया जाता है कि भारत के महाकवि कालिदास जी ने भारत की पहली नाट्यशाला में ही मेघदूत की रचना की थी। भारत की पहली नाट्यशाला अंबिकापुर जिले के रामगढ़ पहाड़ पर स्थित है, इसका निर्माण महाकवि कालिदास जी ने ही किया था।


    भारत में रंगमंच का इतिहास आज का नहीं बल्कि सहस्त्रों वर्ष पुराना है आप इसके प्राचीनता को कुछ इस तरह से समझ सकते हैं कि पुराणों में भी इसका उल्लेख यम, यामी और उर्वशी के रूप में देखने को मिलता है। इनके संवादों से ही प्रेरणा लेकर लोगों ने नाटकों की रचना की जिसके बाद से नाट्यकला का विकास निश्चित हो सका तथा भारतीय नाट्यकला को शास्त्रीय रूप देने का कार्य भरतमुनि ने किया।


    हमारे जीवन में थिएटर का महत्व:

    आज थिएटर दुनिया के तमाम रहस्यों और घटनाओं को हमारे सामने लेकर आया है जिनमें कई डॉक्युमेंट्रीज, वेबसीरीज एवं फिल्मे शामिल है, यह सच्ची घटनाओं को रंगमंच के जरिए पुनः जीवित करने का बेहतरीन जरिया है। जो इसके महत्व को बढ़ाने का काम कर रहा है।


    बीते सालों में थिएटर की एक अलग ही पहचान बनी है लोग आज इसका बड़ा सम्मान करते हैं।


    आज भारत में भी साइंस फिक्शन पर बनी मूवीस की भरमार है साथ ही कई फिल्में विश्व स्तर पर भारत को गौरवान्वित कर रही है, पिछले साल ही रिलीज हुई 'गली बॉय' फिल्म ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट हुई थी।


    भारत और दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस संकट के दौरान फिल्मजगत और थिएटर से जुड़े लोगों ने भी इस महामारी से निपटने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


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