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World Philosophy 2020: विश्व दर्शन दिवस कब, क्यों और कैसे मनाते है? जानिए इतिहास

    World Philosophy Day 2020: विश्व दर्शन दिवस कब, क्यों और कैसे मनाते है? इसकी History

    वर्ल्ड फिलॉसफी डे २०२०: Philosophy ग्रीक शब्द phílosophía से आया है, जिसका अर्थ है 'ज्ञान का प्रेम'। आज 19 नवंबर को पूरी दुनिया में विश्व दर्शन दिवस (World Philosophy Day) मनाया जा रहा है, यह प्रत्येक वर्ष November के 3rd Thursday को मनाया जाता है।

    और इस खास मौके पर आपको यह जरूर जानना चाहिए कि वर्ल्ड फिलासफी डे क्यों और कैसे मनाया जाता है।

    World Philosophy Day 2020 Vishva Darshan Diwas
    World Philosophy Day 2020 Vishva Darshan Diwas

    World Philosophy Day 2020: विश्व दर्शन दिवस कब मनाया जाता है?

    विश्व दर्शन दिवस (World Philosophy Day) हर साल नवंबर महीने के तीसरे गुरूवार को मनाया जाता है, इसकी शुरुआत वर्ष 2002 में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) द्वारा की गई थी।

    इसके बाद वर्ष 2005 में यूनेस्को की जनरल असेंबली में यह घोषणा की गई कि प्रत्येक वर्ष नवंबर के तीसरे गुरुवार को विश्व दर्शन दिवस मनाया जाएगा, तभी से हर साल वर्ल्ड फिलॉसफी डे मनाया जाता है।

    पहली बार यह 21 नवंबर 2002 को मनाया गया था, 2020 में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड फिलोसोफी डे 19 नवंबर को मनाया जा रहा है। तो वहीं अगली साल 2021 में यह 18 नवम्बर को मनाया जाएगा।


    World Philosophy Day Dates:
    • साल - नवम्बर का तीसरा गुरूवार
    • 2018 - नवम्बर 15
    • 2019 - नवम्बर 21
    • 2020 - नवम्बर 19
    • 2021 - नवम्बर 18

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    क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड फिलॉसफी डे?

    World Philosophy Day (विश्व दर्शन दिवस) को मनाने का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रीय संदर्भों में दर्शन (Philosophy) के महत्व को उजागर करना है। इसका लक्ष्य सामाजिक परिवर्तनों का समर्थन करने वाली समकालीन चुनौतियों पर वैश्विक बहस में क्षेत्रीय योगदान प्राप्त करना है।

    इस दृष्टिकोण का उद्देश्य क्षेत्रीय गतिशीलता को बढ़ावा देना है, जो प्रवासन, कट्टरपंथीकरण, पर्यावरण परिवर्तन, या कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करता है।


    इसके कुछ अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य इस प्रकार है:
  • आने वाली पीढ़ियों के लिए फिलॉसफी की पढ़ाई के सार्वभौमीकरण के महत्व को रेखांकित करना।

  • विश्व स्तर पर दर्शन शिक्षण की स्थिति का मूल्यांकन करना तथा समान पहुंच पर विशेष जोर देना।

  • फिलॉसफी के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना।

  • दर्शन के लिए राष्ट्रीय क्षेत्रीय उप क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करना।

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    पृष्ठभूमि/इतिहास:

    साल 2002 से यूनेस्को द्वारा World Philosophy Day (विश्व दर्शन दिवस) मनाने के लिए सभी देशों को आमंत्रित किया गया।

    लेकिन साल 2005 में यूनेस्को के एक सम्मेलन में यह निश्चय किया गया की वर्ल्ड फिलॉसफी डे नवंबर माह के तीसरे गुरूवार को मनाया जायेगा। विश्व दर्शन दिवस ऐसे सभी दार्शनिकों (Philosophers) के सम्मान में मनाया जाता है जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व को स्वतंत्र विचारों के लिए स्थान उपलब्ध कराया।


    इस महत्वपूर्ण दिवस की स्थापना कर यूनेस्को द्वारा मानवीय गरिमा तथा विविधता का सम्मान करने वाले एक फिलोसॉफिकल बहस की विश्व स्तरीय संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयत्न किया गया है।

    यह विशेष दिवस मुख्य रूप से अकादमी के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित तो करता ही है साथ ही यह वैश्विक मुद्दों के समाधान में दार्शनिक ज्ञान (फिलोसॉफिकल नॉलेज) के योगदानों पर भी प्रकाश डालता दिखाई देता है।


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    कैसें मनाया जाता है?

    विश्व स्तर और यूनेस्को के नेतृत्व में वर्ल्ड फिलोसोफी डे एक खास तरीके से मनाया जाता है, इस दिन पेरिस मे स्तिथ UNESCO के मुख्यालय मे Philosophy के महत्वपूर्ण और गम्भीर सावालों पर विचार किया जाता है।


    2020 का यह संस्करण पूरी दुनिया को वर्तमान में चल रही कोरोनावायरस महामारी के अर्थ पर विचार करने के लिए आमंत्रित करने की जरूरत को रेखांकित करता है।

    जरूरत से ज्यादा और पहले से अधिक दार्शनिक प्रतिबिंब का सहारा लेने के लिए हम कई संकटों का सामना कर रहे हैं।


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    दार्शनिक दिवस मनाए जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

    कई विचारकों का कहना है कि 'विस्मय' ही दर्शन का मूल है। तथा यह क्षेत्र स्वयं को ज्ञान के रूप में देखता है, हमें खुद को प्रतिबिंब पर प्रतिबिंबित करना सिखाता है।

    सदियों से हर संस्कृति में फिलॉसफी ने विचारों, अवधारणाओं एवं विश्लेषण को जन्म दिया है।

    विश्व दर्शन दिवस दार्शनिक प्रतिबंध के महत्व को सेलिब्रेट करता है तथा दुनिया भर के लोगों को आपस में अपने दार्शनिक विरासत को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

    UNESCO की माने तो दर्शन उन सिद्धांतों और मूल्यों के वैचारिक आदान-प्रदान करता है जिन सिद्धांतों पर विश्व शांति निर्भर करती है, जैसे: लोकतंत्र, न्याय, समानता और मानवाधिकार।

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