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राष्ट्रीय किसान दिवस 2020: National Farmers Day (चौधरी चरणसिंह जयंती)

    National Farmers Day 2020: भारतीय राष्ट्रीय किसान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? चौधरी चरण सिंह कौन थे?

    Rashtriya Kisan Diwas 2020: जय जवान जय किसान का नारा तो आपको याद ही होगा, आपको एक बार फिर याद दिला दें कि यह नारा वर्ष 1964 में देश के दुसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री जी का स्लोगन था।

    दुनियाभर में किसानों का अपना ही महत्व है, हमारी थाली में परोसा गया भोजन अन्नदाता की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है, जो मिट्टी से अन्न उगाने का परिश्रम भरा कार्य करते है।

    आज देश के उन्ही किसानों को धन्यवाद करने का दिन है, क्योंकि आज राष्ट्रीय किसान दिवस (National Farmers Day) है।
    National Farmers Day - Kisan Divas
    National Farmers Day - Kisan Divas

    किसानों का देश की प्रगति में उतना ही योगदान है जितना एक सैनिक का।

    भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का विचार था कि देश की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और आत्मनिर्भरता केवल सैनिकों और शस्त्रों पर ही आधारित नहीं बल्कि किसानों और श्रमिकों पर भी आधारित है।


    राष्ट्रीय किसान दिवस कब मनाया जाता है?

    वर्ष 2001 से ही भारत में राष्ट्रीय किसान दिवस (National Farmers Day) हर साल 23 दिसम्बर को देश के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जन्म जयंती के उपलक्ष्य पर मनाया जाता है।

    इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य किसानों के योगदानों की सराहना करना और उन्हें सम्मान देना है। देशभर में इस मौके पर किसान जागरूकता हेतु कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस साल चौधरी चरण सिंह जी की 119वीं जयंती मनाई गई।


    कृषि मंत्रालय ने खेती करने वाली महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हर वर्ष 15 अक्टूबर को 'महिला किसान दिवस' (Women Farmers Day) के रूप में मनाने की घोषणा की है।


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    National Farmers Day क्यों मनाया जाता है?

    राष्ट्रीय किसान दिवस भारत के किसान परिवार में जन्मे देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, की जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है, चौधरी चरण सिंह जी का जन्म आज ही के दिन 23 दिसंबर 1902 को हुआ था उन्हें 'किसानों का मसीहा' भी माना जाता था।

    ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए कई सराहनीय कार्य किए थे।

    चौधरी चरण सिंह एक किसान परिवार से सम्बंध रखते थे जिसके परिणामस्वरूप वे किसानों की समस्या और स्थिति भलीभांति समझ पाते थे। आप कह सकते है की भारतीय किसानों की स्थिति में सुधार लाने का श्रेय चौधरी चरण सिंह जी को ही जाता है।


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    Kisan Diwas: किसान का महत्व:

    भारत ही नहीं अपितु विश्व के सभी स्थानों पर अन्नदाता किसान के बिना जीवन की परिकल्पना करना नामुमकिन है, जो भी हम जीने के लिए खाते-पीते है उसका अधिकाँश हिस्सा किसानों के कठिन परिश्रम से ही मिलता है।

    इनमें चाहे दाल चावल हो या रोटी, फल-सब्जियों हो या मेहनत से उगाए गए गन्नो से बनी चीनी सब कुछ किसान ही उपजाते है। किसान के बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना कर पाना असम्भव है।

    भारत कृषि प्रधान देश है यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर करते हैं और यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी भी हैं। देश के विकास में इनका काफी अहम योगदान है जिसकी चर्चा अब नहीं होती।


    फार्मर्स डे कैसे मनाया जाता है?

    किसान दिवस के दिन चौधरी चरण सिंह जी की जयंती को कृषि एवं किसान विकास क्षेत्र में किए गए उनके योगदानों को याद करते हुए बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस मौके पर उनकी समाधि 'किसान घाट' पर पुष्प मालाएं चढ़ाई जाती हैं और सेमिनार का आयोजन किया जाता है।

    समस्त भारतवर्ष में किसान दिवस पर किसानों को जागरूक करने हेतु तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है इस दिन सभी कृषि और इससे संबंधित संगठन किसानों को उनके अधिकारों एवं फसलों के प्रति उनका ज्ञान वर्धन करते हैं।

    इसके साथ ही कृषि विज्ञान से संबंधित कई कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।


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    चौधरी चरणसिंह और उनके योगदान

    पूर्व प्रधानमंत्री से ज्यादा किसान नेता के तौर पर जाने जाने वाले चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ (नूरपुर) में हुआ।

    आजादी से पहले वह स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेते रहे और इस दौरान जेल भी गए।

    परंतु स्वतंत्रता मिलने के साथ ही वह किसानों के हितकारी बन गए और उनके लिए लड़ने लगे।

    वे भारत के पांचवें प्रधानमंत्री के तौर पर 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक इस पद पर नियुक्त रहे तथा 3 अप्रैल 1967 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने परंतु 1 साल बाद इस पद से इस्तीफा दे दिया।

    इसके बाद दोबारा हुए चुनावों में उन्हें भारी सफलता मिली और वह एक बार फिर 17 फरवरी 1970 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।


    चौधरी चरणसिंह के योगदान
    • प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने कृषि मंत्री पद पर रहते हुए 'जमीदारी उन्मूलन विधेयक' को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसे 1952 में पारित किया गया। इससे किसान भूमिधर बन गए।

    • किसानों को पटवारियों के आतंक से आजादी दिलाई और 'लेखपाल पद' का सृजन किया, जिसमें 18 फ़ीसदी सीट हरिजनों के लिए आरक्षित रखी गई।

    • 1954 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के किसानों के हित में 'भूमि संरक्षण कानून' पारित कराया।

    • गृह मंत्री पद पर रहते हुए मंडल और 'अल्पसंख्यक आयोग' की स्थापना की।

    • राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना उन्होंने वर्ष 1979 में वित्त मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री रहते हुए की।

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    अंतिम शब्द

    केंद्र, राज्य एवं कई संगठनों द्वारा किसानों के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रमों से भी किसान की हालत में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला है।

    राजनीतिक पार्टियां किसानों को वोट बैंक की तरह दिखती है सभी ने देश के विकास के लिए नेहरू अटल मनमोहन जैसे नेताओं का मॉडल तो अपना लिया लेकिन वे चौधरी चरण सिंह जी के मॉडल को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।

    जल्द ही हमने किसानों के लिए कुछ बड़े कदम उठाने होंगे जिससे भारतीय किसानों को प्रेरित कर उनकी हालत में सुधार किया जा सके।


    अब तो आप देश की प्रगति में किसानों के योगदानों के बारे में जान ही गए होंगे, और हमें किसानों को सम्मान क्यों करना चाहिए यह भी समझ गए है। इसलिए भारत में केंद्र और राज्यों की सरकारें किसान कल्याण की बहुत सी योजनाएं भी चलाती है।

    अगर आपको Rashtriya Kisan Diwas 2020 की यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर करे।

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