रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2024: गुरूदेव की जीवनी और अनमोल विचार

प्रख्यात कवि, लेखक, संगीत व चित्रकार तथा भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती हर साल 7 मई को मनाई जाती है, 2024 में उनकी 163वीं जयंती है।

Rabindranath Tagore Jayanti कब है? जीवन परिचय (बायोग्राफी) और कोट्स

भारत में रविंद्रनाथ टैगोर जी की जयंती हर साल 7 मई को मनाई जाती है, वे भारत के महान कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार होने के साथ ही नोबल पुरस्कार विजेता भी थे। इस साल 2024 में उनकी 163वीं जयंती मनाई जा रही है, आज वे रबींद्रनाथ ठाकुर, गुरुदेव, रवींद्रनाथ टैगोर आदि नामों से विश्व भर में जाने जाते हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 में कलकत्ता के ठाकुरबाड़ी में हुआ था, और बंगाली कैलेंडर में यह दिन वर्ष 1268 की बैसाख (बोइशाख) माह का 25वां दिन था। इसलिए पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और बांग्लादेश में गुरुदेव का जन्मोत्सव बंगाली कैलेंडर के अनुसार ही मनाया जाता है जो ज्यादातर 7 मई, 8 मई या 9 मई को पड़ता है। 2024 में रबिन्द्रनाथ ठाकुर जी का जन्मदिन 8 मई को तो वहीं 2025 में इसे 7 मई को मनाया जाएगा।

Rabindranath Tagore Jayanti
Rabindranath Tagore Jayanti (Birth Anniversary)

About Rabindranath Tagore in Hindi
स्थानीय नामरविंद्रनाथ टैगोर
जन्म07 मई 1861, कलकत्ता
पिताश्री देवेन्द्रनाथ टैगोर
माताश्रीमति शारदा देवी
पत्नीमृणालिनी देवी
व्यवसायलेखक, कवि, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार
उपाधिगुरुदेव (महात्मा गाँधी जी द्वारा मिली)
भाषाहिन्दी, बंगाली, अंग्रेजी
प्रमुख कार्यगीतांजलि, जन गण मन आदि
सम्मानसाहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार
मृत्यु07 अगस्त 1941, कोलकाता

 

रविंद्र नाथ टैगोर जयंती क्यों मनाई जाती है?

बहुमुखी प्रतिभा के धनी भारत के महान साहित्यकार, कलाकार, दार्शनिक, कवि, लेखक, समाज सुधारक एवं देशभक्त तथा भारत और बांग्लादेश के राष्ट्र गान के रचयिता श्री रविंद्र नाथ ठाकुर या टैगोर जी के जन्मोत्सव को उनके द्वारा किए गए कार्यों और कृतियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर मनाया जाता है।

गुरुदेव को 1913 में गीतांजलि काव्य कृति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने वाले प्रथम एशियाई व्यक्ति थे।

साथ ही उन्हें 1915 में राजा जॉर्ज पंचम द्वारा नाइटहुड (शूरवीर की पदवी) से भी सम्मानित किया गया था परंतु उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध जताते हुए इसे वर्ष 1919 में वापस कर दिया।

उनकी जयंती को भारत और विश्व भर में कई अलग-अलग हिस्सों में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों, विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थनों में चित्रकारी, निबंध लेखन, काव्य पाठ जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

 

रविन्द्र नाथ टैगोर जी के अनमोल विचार (Rabindranath Tagore Quotes in Hindi)

  • आपको दुश्मन बनाने के लिए किसी से लड़ने की आवश्यकता नहीं है, बस आप एक बार कामयाब हो जाओ, दुश्मन तो आपको खैरात में मिलेंगे।


  • यदि आप सभी त्रुटियों के लिए द्वार बंद कर देते हैं, तो सच्चाई बंद हो जाएगी।


  • हर बच्चा एक संदेश लेकर आता है कि ईश्वर अभी तक मनुष्य से निराश नहीं हुआ है।


  • “केवल खड़े होकर और समुद्र को निहारने से आप समुद्र को पार नहीं कर सकते।”


  • “प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।”
    -रबीन्द्रनाथ ठाकुर


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    Rabindranath Tagore Quotes in Hindi

  • हम महानता के सबसे करीब तब होते हैं, जब हम विनम्रता में महान होते हैं।


  • सब कुछ हमारे पास आता है जो हमारा है, अगर हम इसे प्राप्त करने की क्षमता पैदा करते हैं।


  • सपनों को कभी बंदी नहीं बनाया जा सकता।


  • फल की लालसा में फूल छूट जाता है।


  • विश्वास वो पंछी है, जो भोर के अँधेरे में भी उजाले को महसूस करता है।

 

 

रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी (Rabindranath Tagore Biography in Hindi)

रविंद्र नाथ टैगोर जी का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता (ब्रिटिश भारत) के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। वे बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी थे, और उन्हें लोग रवि नाम से पुकारते थे। उनकी माता का नाम शारदा देवी तथा उनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर था, जो ब्रम्ह समाज के वरिष्ठ नेता थे।

टैगोर जी को विद्यालय की पढ़ाई और कमरों को लेकर कुछ खास शिकायतें थी, वहां वे खिड़की से बाहर नहीं देख सकते थे। साथ ही काम ना करके आने की सजा डंडे की मार सहना हुआ करती थी इसलिए उन्होंने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी।

इनके परिवार में सभी सुशिक्षित तथा कला प्रेमी थे इसलिए उनकी कला में खास रुचि थी और शुरुआती पढ़ाई उन्होंने अपने घर पर ही थी और बाद में वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लेकिन वे एक साल के बाद ही घर वापस आ गए।


लिखने की शुरूआत

रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी छोटी उम्र से लिखने का काम शुरू कर दिया था और इंग्लैंड से वापस आने के बाद उन्होंने घर के शांतिपूर्ण वातावरण में अपने लिखाई का कार्य शुरू कर दिया और देखते ही देखते उन्हें काफी अच्छी सफलता मिली।

उनके उल्लेखनीय कार्यों में गीतांजलि, पोस्ट मास्टर, गोरा, घरे बाइरे, जन गण मन, रबीन्द्र संगीत, आमार सोनार बांग्ला, नौका डूबी जैसे कृतियाँ शामिल हैं।


विवाह और सांसारिक जीवन

रविंद्रनाथ ठाकुर का विवाह मृणालिनी देवी से वर्ष 1883 में हुआ। अपनी पत्नी मृणालिनी से वार्तालाप करते हुए उन्होंने एक स्कूल खोलने की योजना बनाई जो प्राकृतिक वातावरण से घिरा होगा, चार दीवारों से नहीं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में एक विद्यालय की स्थापना की, शांतिनिकेतन में स्कूल निर्माण के समय जब वे आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तो उन्होंने देश भर में नाटकों का मंचन कर इसके लिए पैसा एकत्रित किया।

उन्होंने Nobel Prize में मिली पूरी धनराशि को इस स्कूल में लगा दिया। पहले यह एक स्कूल था परंतु अब यह विश्व भारती विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।


रवींद्रनाथ टैगोर का निधन कब हुआ? (Death)

रबींद्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त 1941 को कोलकाता (भारत) में हुई उस समय वे करीब 80 वर्ष के थे। परन्तु आज भी वे लोगों के दिलों अमर है, उनके जीवन हम सबको एक गहन सीख देता है। उन्होंने अपने जीवन की कम उम्र से मरते दम तक लोगों को प्रेरणा दी और इस धरती को धन्य कर गए।


 

रबींद्रनाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि कैसे मिली?

देश के कई महापुरुषों रविंद्र नाथ टैगोर के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे उनमें से एक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी भी थे। रविंद्र नाथ टैगोर ने ही महात्मा गांधी जी को महात्मा कहकर संबोधित किया जिसके बाद गांधी जी ने ही रवींद्रनाथ टैगोर को ‘गुरुदेव‘ की उपाधि दी।

 

टैगोर जी की प्रसिद्ध रचनाएँ एवं कृतियाँ कौन सी है?

रविन्द्रनाथ की रचनाओं में गीतांजलि, गोरा, चित्रांगदा, नौका डुबाई, मालिनी और बिनोदिनी जैसी कई अन्य कृतियां शामिल है। इसके आलावा उन्होंने अपने जीवन काल में कई उपन्यास, निबंध, लघुकथाएं, नाटक एवं कई हजार गाने भी लिखे हैं।

रविंद्रनाथ टैगोर जी ने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन‘ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला‘ की रचना की। उन्होंने 2000 से ज्यादा गीतों की भी रचना की। दुनिया भर में लोग उनकी कृतियों के दीवाने थे, उनकी अनेक रचनाओं का अनुवाद अंग्रेजी के साथ कई अन्य भाषाओं में भी किया जा चुका हैं।


गुरूदेव द्वारा लिखी लधुकथाओं, कहानियों और उपन्यासों पर सत्यजीत रे तथा कई अन्य निर्देशकों ने फिल्में बनाई है। रबिन्द्रनाथ टैगोर कि कहानी पर आधारित फिल्म है ‘काबुलीवाला’, तो वहीँ ‘नौका डूबी’ पर फिल्म ‘मिलन’ बनाई थी।



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