गगनयान मिशन 2024 क्या है? कब लॉन्च होगा? रोबोट, बजट और उद्देश्य

Gaganyaan Mission क्या है? कब लॉन्च होगा? जानिए इसकी लागत, चरण और व्योमनॉट एवं व्योममित्र के बारें में

चंद्रयान 3 की सफलता के बाद अब इसरो भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ (Gaganyaan Mission) लांच करने की तैयारी में है, उपलब्ध जानकारी के अनुसार गगनयान मिशन का पहला चरण इसी साल 2023 में अक्टूबर के पहले या दूसरे हफ्ते में लांच किया जाएगा। इसके तहत एक स्पेस क्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा जिसका उद्देश्य सारे सिस्टम की जांच करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर निर्धारित स्थान पर वापस सही सलामत लौटे।

इस मिशन की सफलता के बाद दूसरे चरण में एक महिला रोबोट (व्योम मित्र) और तीसरे चरण में इंसान यानि एस्ट्रोनॉट (जिन्हे व्योमनॉट कहा जाएगा) भेजे जाएंगे। यहां हम आपको भारत का गगन यान मिशन कब लांच होगा? (Launch Date) अंतरिक्ष में कब पहुंचेगा? इसकी कीमत या लागत या बजट कितना है? गगन यान में कौन-कौन जाएगा? इसके बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

Gaganyaan Mission 2023-24 information in Hindi
Gaganyaan Mission 2023-24 information in Hindi
Gaganyaan Mission Information in Hindi
अभियानगगनयान मिशन
लॉन्च तिथिअक्टूबर 2023 (बिना चालक दल)
लॉन्चिंग का स्थानसतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा)
बजट10,000 करोड़ रूपये
लॉन्च व्हीकलGSLV MK3
संचालकभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)
मिशन की अवधि1-3 दिन

 

गगनयान मिशन भारत का पहला और एकमात्र मानव अन्तरिक्ष मिशन है, जिसके तहत भारत की स्पेस एजेंसी ISRO वर्ष 2024 तक तीन सदस्यीय चालक दल को तीन दिवसीय अंतरिक्ष मिशन पर भेजेगी। इस अभियान का सीधा-सा प्लान यह है कि एक ऐसा स्पेसक्राफ्ट बनाया जाए जो कुछ अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लगभग 1 हफ्ते तक अंतरिक्ष में रह सके और इसके बाद वापस धरती पर भी सही सलामत लाया जा सके। हालांकि यह काम इतना भी आसान नहीं है, इसलिए इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।

 

भारत का गगनयान मिशन क्या है? (About Gaganyaan Mission in Hindi)

गगनयान मिशन भारत को गौरवान्वित करने वाला एक मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (इसरो) तीन लोगों के दल को अंतरिक्ष में 3-7 दिनों के लिए भेजेगा और उन्हें स्प्लैशडाउन (Splashdown) तकनीक की मदद से पृथ्वी पर वापस भी लेकर आएगा।

इस अभियान के तहत अंतरिक्ष में जाने वाले तीनों एस्ट्रोनॉट्स (जिन्हें व्योमनोट्स कहा जाएगा) और ये 3-7 दिनों तक पृथ्वी की निम्न कक्षा (400 किमी. की ऊँचाई पर) में रहकर पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे, साथ ही वहां जीरो ग्रेविटी के बारे में भी रिसर्च की जाएगी। इस अभियान की लागत तकरीबन 10,000 करोड रुपए है, और इसे 2023-24 तक पूर्ण किए जाने की योजना है। इस मिशन को पूरा कर भारत किसी इंसान को अंतरिक्ष में भेजने का कारनामा करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

गगनयान मिशन के तहत 3 मिशन किए जाने है जिसमे से एक मानवयुक्त (Crewed) मिशन होगा जो 2024 के अंत में लॉन्च हो सकता और 2 मानव रहित (Uncrewed) मिशन होंगे जिन्हें अक्टूबर 2023 और जनवरी 2024 तक लॉन्च किया जा सकता है।


गगनयान मिशन 2023 कब लॉन्च होगा? (Launch Date)

‘गगनयान कार्यक्रम’ के तहत भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में लॉन्च किए जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह मिशन तीन चरणों में पूर्ण होगा। इसमें से पहला मानव रहित मिशन (G1) अक्टूबर 2023 में लांच होगा तो वही दूसरा मिशन (G2) एक महिला रोबोट (व्योम मित्र) के साथ अगले साल 2024 के जून-जुलाई माह में लॉन्च किया जाएगा और 2024 के अंत में तीसरा मानव सहित अंतरिक्ष मिशन (H1) लॉन्च किया जाएगा।

इस मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान 15 अगस्त 2018 को की थी, जिसे पहले दिसंबर 2020-21 में लांच किया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस प्रोजेक्ट में देरी हुई।

 

Gaganyaan की Launching और लैंडिंग कब और कहाँ होगी?

गगनयान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रमोचन वाहन जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट की मदद से लांच किया जाएगा और इसकी स्पीड इतनी तेज होगी कि लॉन्चिंग के केवल 16 मिनट में ही गगन यान पृथ्वी की लो ऑर्बिट में 400 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंच जाएगा।

लगभग 1 हफ्ते तक पृथ्वी की लो ऑर्बिट में रहने के बाद और कुछ परीक्षण करने के बाद गगनयान को धरती पर स्प्लेशडाउन (Splashdown) तकनीक की मदद से बंगाल की खाड़ी (अरब सागर) में उतारा जाएगा, जिसे अंतरिक्ष से धरती पर आने में लगभग 36 मिनट का समय लगने वाला है।

 

 

तीन चरणों में पूरा होगा गगनयान अभियान

इस ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन को अंजाम देना इतना भी आसान नहीं है इसीलिए इसे 3 चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। जिसमें से दो प्रारंभिक प्रक्षेपण मानव रहित होंगे, जो सुरक्षा और विश्वसनीयता के सत्यापन हेतु किए जा रहे हैं।

पहला चरण: मानव रहित

इस कार्यक्रम का पहला चरण मानव रहित होगा, यानी इसमें कोई भी इंसान नहीं जाएगा। यह एक तरह का प्रयोग कहा जा सकता है जिसे मार्गो को चिन्हित करने के लिए किया जाएगा। क्योंकि गगनयान रॉकेट अंतरिक्ष में जाकर पृथ्वी पर सुरक्षित पहुंचना है।


दूसरा चरण: मानव रहित लेकिन रोबोट युक्त

दूसरा चरण भी मानवरहित लेकिन रोबोट युक्त होगा जिसमें मानवीय प्रतिकृति वाला एक रोबोट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसे भी एक तरह का प्रयोग ही कहा जा सकता है जिससे यह आश्वस्त हो जाएगा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से तैयार है।


तीसरा चरण: मानव युक्त

पहले दो चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाने के बाद तीसरे चरण में एक 3 सदस्यीय चालक दल यानी तीन इंसानों को 3 दिनों के मिशन पर अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। और सही सलामत पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा जो वास्तव में एक सफल मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन होगा।


गगनयान कैसे बना है? इसे किसने बनाया है?

इसरो का गगनयान एक 3,735 किलो वजनी स्पेसक्राफ्ट (अंतरिक्ष यान) है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा निर्मित किया गया है। यह तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के लो ऑर्बिट (जो पृथ्वी की सतह से 400KM की ऊंचाई पर मौजूद है) पर ले जाने के लिए बनाया गया है जो एक हफ्ते तक इस Low Orbit में रहकर पृथ्वी की परिक्रमा भी करेगा।

गगनयान दो Module से मिलकर बना है, जिसका पहला हिस्सा सर्विस मॉड्यूल (Service Module) के नाम से जाना जाता है तो वहीं इसके दूसरे हिस्से को क्रू मॉड्यूल (Crew Module) कहते हैं। सर्विस मॉड्यूल में मिशन से जुड़ीं चीजें जैसे कम्युनिकेशन सिस्टम और बाकी सर्विस होगी और क्रू मॉड्यूल में तीनों अंतरीक्ष यात्री और उनकी ज़रूरत का समान होगा।


गगनयान स्पेस कैप्सूल की खासियते

Gaganyaan Space Capsule में Life Support System है, जो आसपास के वातावरण में आसानी से ढल भी सकता है। इसके साथ ही यह अंतरीक्षयान या कैप्सूल Emergency Mission Abort और Emergency Escape जैसे System से भी लैस है, जिसकी मदद से राकेट के लाँच होने के पहले या दूसरे चरण में कोई दिक्कत या परेशानी आने पर Crew Members को धरती पर वापिस भी बुलाया जा सकता हैं।

 

 

अंतरीक्ष में जाने वाले व्योमनॉट एवं व्योममित्र कौन है?

भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाले सभी 3 क्रू मेम्बर ‘व्योमनॉट’ कहे जाएंगे, तो वहीं इस अभियान से पहले जो मानव रहित मिशन होगा उनमें एक रोबोट भेजा जाएगा जिसे ‘व्योममित्र’ नाम दिया गया है।

व्योमनोट कौन है?

जिस तरह से अमेरिका के अंतरिक्ष जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को अंग्रेजी में “एस्ट्रोनॉट” कहा जाता है, उसी तरह इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाले यात्रियों को संस्कृत के शब्द ‘व्योमनोट‘ (Vyomanaut) से संबोधित किया जाएगा। यहां व्योम का हिंदी मतलब अंतरिक्ष है।

इन व्योमनोट्स को एक खास प्रकार का सूट पहनाकर भेजा जाएगा, जिससे रेडिएशन और दूसरे खतरनाक तरंगों से बचा जा सके। फिलहाल इस मिशन पर चालक दल के केवल 3 लोग जा सकते हैं, और ये तीन लोग भारतीय वायु सेना से होंगे जिन्हे बकायदा रूस में अंतरिक्ष यात्री की ट्रेनिंग भी दी गयी है। चुने गए 25 पायलटों में से शॉर्टलिस्ट होकर आए है। इसमें डॉक्टरी एस्ट्रोनॉट में शामिल होगा

 

व्योममित्र (VyomMitra) के बारें में:

इस मिशन में महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं दी गयी हैं इसलिए मानवयुक्त मिशन से पहले जो मानवरहित अभियान होंगा, उसमें महिला की शक्ल वाले ह्यूमनॉइड (रोबोट) भेजे जाएंगे जिन्हें “व्योममित्र” कहा जाएगा।

ह्यूमनॉइड (Humanoid) ऐसे Robots होते है जो आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस की मदद से इंसानों जैसा व्यवहार करते है। और ये कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर जैसें कई अन्य उपकरणों एवं सेन्सर्स की मदद से नियंत्रित किए जाते है। हालांकि इससे पहले अन्य देश इन मिशनों के लिए पशुओं का इस्तेमाल कर चुकें है।

Gaganyaan Vyommitra Video:

Video Credit: Doordarshan (Youtube)

 

गगन यान स्पेस मिशन का बजट कितना है?

गगन यान इसरो का सबसे खर्चीला या सबसे महंगा अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसमे लगभग 10 हज़ार करोड रुपए खर्च होंगे। इसमें मानव युक्त मिशन भी शामिल है, और भारत अपने सभी एस्ट्रोनॉट की सुरक्षा के लिए इस अभियान को तीन चरणों में संपन्न करने की योजना पर काम कर रहा है इसीलिए इसकी कीमत में बढ़ोतरी हुई है।

 

Gaganyaan Mission का इतिहास (History)

गगनयान मिशन आज का नहीं बल्कि यह 16 साल पुराना मिशन है, जिसकी शुरुआत 2006 में इसरो द्वारा रिसर्च करने से शुरू हो गई थी, और साल 2008 तक तो इसका डिजाइन भी बनकर तैयार हो चुका था। जिसके मद्देनजर साल 2007 में इसरो द्वारा 550 किलो वजनी एक स्पेसक्राफ्ट भी डिजाइन किया गया जिसे 10 जनवरी 2007 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से परीक्षण के लिए पीएसएलवी C7 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा गया, और इसका नाम स्पेस कैप्सूल रिकवरी (SRE-1) रखा गया।

यह स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के Low Orbit (जो धरती से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर है) में रहा और वहां 12 दिन बिताने के बाद स्प्लेशडाउन तकनीक का इस्तेमाल कर पैराशूट की मदद से बंगाल की खाड़ी (अरब सागर) में सही सलामत लैंड हुआ।

जिससे स्पेस में Heat (ऊष्मा), Radiation (विकिरण) और Friction (घर्षण) से होने वाले नुकसान से अंतरिक्षयात्रियों और अंतरिक्षयान को सही सलामत पृथ्वी पर लाने का एक ख़ास डाटा मिला, इन 12 दिनों में वैज्ञानिकों ने संचार तंत्र के जरिए कई जानकारियाँ जुटाई।

हालंकि सरकार की तरफ से ISRO का बजट कम होने और 2009 में बजट सेक्शन और राजनीतिक समस्याओं के कारण यह प्रोजेक्ट काफी समय से कतार में रहा। लेकिन 7 साल पहले 2014 में इसरो के Budget में बढ़त होने से गगनयान मिशन को काफी फायदा मिला और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2018 में इस प्रोजेक्ट को 10,000 करोड़ के बजट के साथ आधिकारिक मंजूरी भी मिल गई।

 

गगनयान अंतरिक्ष अभियान का उद्देश्य (purpose) क्या है?

गगनयान मिशन भारत को गौरवान्वित करने वाली परियोजना है क्योंकि यह देश की उन्नत मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करेगी और लंबे समय में भारतीय मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम को जारी रखने का मार्ग प्रशस्त करेगी। अगर भारत इस हुमन स्पेस फ्लाइट मिशन को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेता है तो यह अमेरिका, रूस और चीन के साथ मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा।

इससे सोलर सिस्टम को एक्सप्लोर करने के साथ ही ग्लोबलस्पेस स्टेशन के विकास में सक्रिय रूप से योगदान करने तथा देश हित में वैज्ञानिक प्रयोग क्षमता को भी प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद इसरो अंतरिक्ष में लगातार मानव उपस्थिति की क्षमता हासिल करने पर फोकस करेगी। इसरो के बढ़ते हुए कदमों से देश में एक तरह से स्पेस क्रांति को बढ़ावा मिलेगा।


अंतिम शब्द

वैसे तो इसरो द्वारा इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की जद्दोजहद काफी समय से चल रही है, लेकिन उस समय भारत ऐसी स्थिति में नहीं था कि वह इस तरह के मानव मिशन को अंजाम दे सकें। वर्ष 2018 में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के भाषण में लाल किले की प्राचीर से इसरो के गगन यान मिशन को मंजूरी देते हुए इसकी समय सीमा को 2022 तक तय किया था। लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते इस महत्वाकांक्षी परियोजना के काम-काज पर भी गहरा असर पड़ा और अब इस मिशन को साल 2023-2024 में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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