वीर सावरकर कौन थे, जानिए जीवनी और भारत रत्न का विवाद

    Veer Savarkar Bharat Ratna 2019: विनायक दामोदर सावरकर कौन थे, जीवनी और भारत रत्न का विवाद

    वीर सावरकर: कौन थे, जाने पूरी जानकारी (Information in Hindi)

    Veer Savarkar Bharat Ratna 2019: महाराष्ट्र में इस साल होने वाले चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना संकल्प पत्र पेश किया है जिसमें विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न से नवाजे जाने का भी जिक्र किया गया है जिसे लेकर देशभर में सियासी घमासान जोरों पर है इस फैसले का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसके विरोधी भी हैं।

    लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले वर्ष 2000 में भी अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार में तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण के पास भी वीर सावरकर को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था।

    आपको बता दें कि भारत रत्न भारत के सर्वोच्च नागरिक होने का सम्मान के रूप में दिया जाता है।

    लेकिन बहुत से लोगों को वीर सावरकर के बारे में जानकारी नहीं है की वीर सावरकर कौन है।
    Veer Vinayak Damodar Savarkar Kaun The Bharat Ratna Images
    Veer Vinayak Damodar Savarkar Kaun The Bharat Ratna Images

    इसीलिए आज के इस लेख में हम आपको वीर सावरकर कौन थे भारत रत्न विवाद तथा वीर सावरकर के जीवन परिचय एवं उनके बारे में बताने जा रहे हैं।

    वीर सावरकर कौन थे जीवन परिचय | Veer Savarkar Information in Hindi

    28 मई 1883 को महाराष्ट्र (तत्कालीन बंबई) के नासिक प्रांत के निकट भागुर गांव में जन्मे वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी, राजनेता, लेखक, वकील एवं हिंदुत्व दर्शन शास्त्री के प्रतिपादक भी थे।

    उनके पिता दामोदर पंत सावरकर तथा उनकी माता राधाबाई थी परंतु जब वह केवल 9 साल के थे तभी हैजे की महामारी के चलते उनकी माता मां का स्वर्गवास हो गया और इसके बाद ही प्लेग की महामारी से उनके पिता भी स्वर्ग सिधार गए।

    परंतु उनके परिवार में दो बड़े भाई गणेश (बाबा राव) और नारायण दामोदर सावरकर और एक बहन जिसका नाम नैना बाई था, ने उनका साथ दिया। और माता पिता की मृत्यु के बाद विनायक वीर सावरकर के बड़े भाई गणेश ने परिवार का कार्यभार संभाला जिसका विनायक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा सावरकर ने शिवाजी हाई स्कूल नासिक से 1901 में अपनी दसवीं पास की तथा उन्होंने उन दिनों कुछ कविताएं भी लिखी।

    घर में पैसे की कमी होने के बाद भी बड़े भाई ने उच्च शिक्षा के लिए सावरकर जी को प्रोत्साहित किया और इसी समय में उन्होंने स्थानीय युवकों को संगठित करते हुए एक मित्र मेलों का आयोजन किया और राष्ट्रीयता के प्रचार-प्रसार के साथ क्रांति की ज्वाला जगाई।

    1901 में उनका विवाह यमुना बाई के साथ हुआ तथा उनके ससुर ने उनके विश्वविद्यालय की शिक्षा भार को संभाला और उन्हें पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से B.A. कराया। लेकिन उन्हे उनके राजनीतिक विचारों के चलते फर्ग्यूसन कॉलेज से निकाल दिया गया।

    काला पानी की सज़ा:

    7 अप्रैल 1911 में नासिक षडयंत्र काण्ड के अन्तर्गत सावरकर जी को जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए काला पानी की सजा सुनाई गई और सेलुलर जेल भेज दिया गया। बताया जाता है कि वहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को बिना भरपेट भोजन दिए कठिन परिश्रम कराया जाता था। जहाँ उन्हें कोल्हू के बैल की तरह इस्तेमाल करके सरसों व नारियल आदि का तेल निकलवाया जाता था।

    साथ ही दलदली भूमी व पहाड़ी क्षेत्र को समतल करने का कार्य भी दिया जाता था। और पल भर भी रुकने पर कोड़ों एवं डण्डों से पीटा जाता था।

    सावरकर जी ने ४ जुलाई, १९११ से २१ मई, १९२१ तक लगभग 9 साल 10 महीने पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे, और काले पानी की सज़ा काटी।

    दया याचिका

    बताया जाता है की उन्होने काला पानी की 9 सालों की सज़ा के दौरान 6 बार अंग्रजों को माफ़ीनामा दिया।

    उन्हे 25-25 सालों की 2 अलग अलग सजाए सुनाई गयी थी लेकिन 1920 में वल्लभ भाई पटेल और बाल गंगाधर तिलक के कहने पर अंग्रेजी हुकुमत ने ब्रिटिश कानून ना तोड़ने और विद्रोह ना करने की शर्त पर उन्हे रिहाकर दिया।

    Savarkar Ji ने अपनी आत्मकथा में यह भी लिखा है कि अगर उन्होंने जेल में हड़ताल की होती तो उनसे भारत पत्र भेजने के अधिकार को भी छीन लिया जाता।

    और सावरकर जी यह भली भांति जानते थे कि उम्रभर जेल में रहने से अच्छा भूमिगत रह कर काम करना है। वो ऐसा सोचते थी कि अगर वह जेल के बाहर रहेंगे तो वो जो करना चाहें, वो कर सकेंगे जो अंडमान निकोबार की जेल से रहकर करना असंभव है।

    हिंदू राष्ट्रवादी:

    हिंदू शब्द से बेहद लगाव रखने वाले विनायक दामोदर सावरकर 20वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दूवादी थे। वीर सावरकर ने अपने पूरे जीवनकाल में हिंदुओं, हिन्दी और हिंदुस्तान के लिए ही काम किया।

    काला पानी की सज़ा काटकर आने के बाद उन्होंने हिंदुत्व - हू इज हिन्दू (Hindutva - Who is Hindu) नामक एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने पहली बार हिंदुत्व को एक राजनीतिक विचारधारा के तौर पर इस्तेमाल किया।

    वीर सावरकर के हिंदुओ के प्रति इस लगाव को देखते हुए उन्हे 6 बार अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप मे चुना गया। 1937 में उन्हें हिंदू महासभा का अध्यक्ष चुना गया, और बाद में 1938 में हिंदू महासभा को राजनीतिक दल घोषित कर दिया गया।

    गांधी जी की हत्या की साज़िश का इलज़ाम:

    दरअसल सावरकर पर उनके अंतिम दिनों में जो दाग लगा, उसने उनके कर्मो को अंधकार में झोक दिया। अंडमान निकोबार की जेल में रहते हुए उन्होंने पत्थर को कलम बना कर दीवार पर 6000 कविताएं लिखीं और कंठस्थ किया।

    लेकिन यह सब कुछ करने के बाद भी जब सावरकर का नाम महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा तो सब कुछ समाप्त हो गया।

    यह साल 1948 की बात है जब नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या के छठे दिन विनायक दामोदर सावरकर को गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के शक में मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया। हत्याकांड में उनके खिलाफ केस चला, लेकिन उन्हें फरवरी 1949 में बरी भी कर दिया गया था।

    अंतिम शब्द | Veer Vinayak Damodar Savarkar In Hindi

    हम आपको बता दें कि हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय वीर सावरकर को जाता है। उनकी इस विचारधारा के कारण आजादी के बाद की सरकारों ने उन्हें वह महत्त्व नहीं दिया जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

    आज से ही नहीं बल्कि कई लोगों द्वारा शुरू से ही उन्हें भारत रत्न देने की मांग की जा रही है। दोस्तों अगर आपको विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) कौन थे तथा भारत रत्न के विवाद और उनके जीवन परिचय के बारे में यह जानकारी (Information In Hindi) अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर कर दें।
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