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वीर सावरकर जयंती 2020:जानिए कौन थे विनायक सावरकर और भारत रत्न का विवाद

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    Veer Savarkar Jayanti 2020 Date: स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर कौन थे, जीवनी और भारत रत्न का विवाद

    विनायक दामोदर सावरकर जयंती 2020 Date: आज देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता वीर सावरकर की जयंती (Birth Anniversary) है। Veer Savarkar की जयंती हर साल 28 मई को मनाई जाती है।

    वीर दामोदर सावरकर की जयंती पर बीजेपी के कई बड़े नेताओं समेत प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी उनकी जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कई ट्वीट किए।

    महाराष्ट्र में साल 2019 में होने वाले चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना संकल्प पत्र पेश किया था जिसमें स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न से नवाजे जाने का भी जिक्र किया गया है जिसे लेकर देशभर में सियासी घमासान जोरों पर था, इस फैसले का कुछ लोग समर्थन कर रहे थे तो वहीं कुछ लोग इसके विरोधी भी थे।


    लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले वर्ष 2000 में भी अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार में तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण के पास भी वीर सावरकर को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था।

    आपको बता दें कि भारत रत्न भारत के सर्वोच्च नागरिक होने का सम्मान के रूप में दिया जाता है।

    Veer Vinayak Damodar Savarkar Jayanti 2020
    Veer Vinayak Damodar Savarkar Jayanti 2020

    लेकिन बहुत से लोगों को वीर सावरकर के बारे में जानकारी नहीं है की वीर सावरकर कौन है। (Who is Vinayak Damodar Savarkar in Hindi)

    इसीलिए आज के इस लेख में हम Veer Savarkar Birthday Anniversary पर आपको (Veer Savarkar Biography in Hindi) भारत रत्न विवाद तथा वीर सावरकर के जीवन परिचय एवं उनके बारे में बताने जा रहे हैं।

    जहाँ आपको काला पानी की सज़ा (जेल), वीर सावरकर जी का माफीनामा (Veer Savarkar Apology Letter), सावरकर को वीर की उपाधि किसने दी? (Who Gave Savarkar the Title Veer) और उनकी मृत्यु तथा हिंदुत्व प्रेम के बारे में बताएँगे।


    वीर सावरकर कौन थे जीवन परिचय | Veer Savarkar Biography in Hindi

    28 मई 1883 को महाराष्ट्र (तत्कालीन बंबई) के नासिक प्रांत के निकट भागुर गांव में जन्मे वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी, राजनेता, लेखक, वकील एवं हिंदुत्व दर्शन शास्त्री के प्रतिपादक भी थे।


    उनके पिता दामोदर पंत सावरकर तथा उनकी माता राधाबाई थी परंतु जब वह केवल 9 साल के थे, तभी हैजे की महामारी के चलते उनकी माता मां का स्वर्गवास हो गया और इसके बाद ही प्लेग की महामारी से उनके पिता भी स्वर्ग सिधार गए।


    परंतु उनके परिवार में दो बड़े भाई गणेश (बाबा राव) और नारायण दामोदर सावरकर और एक बहन (जिसका नाम नैना बाई था) ने उनका साथ दिया। और माता पिता की मृत्यु के बाद विनायक वीर सावरकर के बड़े भाई गणेश ने परिवार का कार्यभार संभाला। जिसका विनायक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा सावरकर ने शिवाजी हाई स्कूल नासिक से 1901 में अपनी दसवीं पास की तथा उन्होंने उन दिनों कुछ कविताएं भी लिखी।


    घर में पैसे की कमी होने के बाद भी बड़े भाई ने उच्च शिक्षा के लिए सावरकर जी को प्रोत्साहित किया और इसी समय में उन्होंने स्थानीय युवकों को संगठित करते हुए एक मित्र मेलों का आयोजन किया तथा राष्ट्रीयता के प्रचार-प्रसार के साथ क्रांति की ज्वाला जगाई।


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    1901 में उनका विवाह यमुना बाई के साथ हुआ तथा उनके ससुर ने उनके विश्वविद्यालय की शिक्षा भार को संभाला और उन्हें पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से B.A. कराया। लेकिन उन्हे उनके राजनीतिक विचारों के चलते फर्ग्यूसन कॉलेज से निकाल दिया गया।


    वीर सावरकर जी का माफीनामा - Veer Savarkar Apology Letter

    काला पानी की सज़ा: 7 अप्रैल 1911 में नासिक षडयंत्र काण्ड के अन्तर्गत सावरकर जी को जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए काला पानी की सजा सुनाई गई और सेलुलर जेल भेज दिया गया। बताया जाता है कि वहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को बिना भरपेट भोजन दिए कठिन परिश्रम कराया जाता था। जहाँ उन्हें कोल्हू के बैल की तरह इस्तेमाल करके सरसों व नारियल आदि का तेल निकलवाया जाता था।


    साथ ही दलदली भूमी व पहाड़ी क्षेत्र को समतल करने का कार्य भी दिया जाता था। और पल भर भी रुकने पर कोड़ों एवं डण्डों से पीटा जाता था।

    सावरकर जी ने ४ जुलाई, १९११ से २१ मई, १९२१ तक लगभग 9 साल 10 महीने पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे, और काला पानी की सज़ा काटी।


    Veer Savarkar Apology Letter (माफीनामा): बताया जाता है की उन्होने काला पानी की 9 सालों की सज़ा के दौरान 6 बार अंग्रजों को माफ़ीनामा दिया।

    उन्हे 25-25 सालों की 2 अलग अलग सजाए सुनाई गयी थी लेकिन 1920 में वल्लभ भाई पटेल और बाल गंगाधर तिलक के कहने पर अंग्रेजी हुकुमत ने ब्रिटिश कानून ना तोड़ने और विद्रोह ना करने की शर्त पर उन्हे रिहाकर दिया।

    Veer Savarkar Ji ने अपनी आत्मकथा में यह भी लिखा है कि अगर उन्होंने जेल में हड़ताल की होती तो उनसे भारत पत्र भेजने के अधिकार को भी छीन लिया जाता।

    और सावरकर जी यह भली भांति जानते थे कि उम्रभर जेल में रहने से अच्छा भूमिगत रह कर काम करना है। वो ऐसा सोचते थी कि अगर वह जेल के बाहर रहेंगे तो वो जो करना चाहें, वो कर सकेंगे जो अंडमान निकोबार की जेल से रहकर करना असंभव है।

    सावरकर को वीर की उपाधि किसने दी? - Who Gave Savarkar the Title Veer

    साल 1936 जब एक ब्यान के चलते कांग्रेस पार्टी में उनका विरोध हुआ तो मशहूर पत्रकार, शिक्षाविद, कवि और नाटककार पीके अत्रे ने पुणे में एक स्वागत कार्यक्रम (जिसमें हजारों लोग जुटे थे) के दौरान सावरकर को 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि दी, जो बाद में केवल सिर्फ 'वीर' हो गयी और उनके नाम के साथ सदा-सदा के लिए जुड़ गयी।

    कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा Savarkar का विरोध और उन्हें काले झंडे दिखाने की धमकी पर पीके अत्रे ने सावरकर को निडर बताते हुए कहा था कि जो काला पानी की सजा से नहीं डरा वो इन काले झंडों से क्या डरेगा, और इस तरह से उन्हें यह उपाधि (Title) मिली।


    वीर सावरकर जन्मदिन स्पेशल: हिंदू राष्ट्रवादी प्रेम

    हिंदू शब्द से बेहद लगाव रखने वाले विनायक दामोदर सावरकर 20वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिन्दूवादी थे। वीर सावरकर ने अपने पूरे जीवनकाल में हिंदुओं, हिन्दी और हिंदुस्तान के लिए ही काम किया।

    काला पानी की सज़ा काटकर आने के बाद उन्होंने हिंदुत्व - हू इज हिन्दू (Hindutva - Who is Hindu) नामक एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने पहली बार हिंदुत्व को एक राजनीतिक विचारधारा के तौर पर इस्तेमाल किया।

    वीर सावरकर के हिंदुओ के प्रति इस लगाव को देखते हुए उन्हे 6 बार अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप मे चुना गया। 1937 में उन्हें हिंदू महासभा का अध्यक्ष चुना गया, और बाद में 1938 में हिंदू महासभा को राजनीतिक दल घोषित कर दिया गया।

    हिंदुत्व शब्द किसने गढ़ा? हिंदुत्व ("Hinduness") भारत में हिंदू राष्ट्रवाद का प्रमुख रूप है। इस शब्द को 1923 में विनायक दामोदर सावरकर ने लोकप्रिय बनाया।

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    वीर सावरकर की मृत्यु कैसे हुई थी? - Cause of death

    सावरकर जी की मृत्यु 26 फ़रवरी 1966 को उपवास (Starvation) रखने से हुई, उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के लिए इच्छामृत्यु को चुना था। 1 फरवरी 1966 से ही वे उन सभी चीजों का त्याग कर चुके थे जो उन्हें जिंदा रख सकती थीं इसमें दवाइयां, खाना और पानी जैसी सभी चीजें शामिल थी।


    गांधी जी की हत्या की साज़िश का इलज़ाम: दरअसल सावरकर पर उनके अंतिम दिनों में जो दाग लगा, उसने उनके कर्मो को अंधकार में झोक दिया। अंडमान निकोबार की जेल में रहते हुए उन्होंने पत्थर को कलम बना कर दीवार पर 6000 कविताएं लिखीं और कंठस्थ किया।

    लेकिन यह सब कुछ करने के बाद भी जब सावरकर का नाम महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा तो सब कुछ समाप्त हो गया।

    यह साल 1948 की बात है जब नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या के छठे दिन विनायक दामोदर सावरकर को गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के शक में मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया। हत्याकांड में उनके खिलाफ केस चला, लेकिन उन्हें फरवरी 1949 में बरी भी कर दिया गया था।


    अंतिम शब्द | Vinayak Damodar Savarkar Birth Anniversary

    आज वीर सावरकर जी की जयंती (Veer Savarkar Jayanti 2020) पर हम आपको बता दें कि हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को जाता है। उनकी इस विचारधारा के कारण आजादी के बाद की सरकारों ने उन्हें वह महत्त्व नहीं दिया जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

    आज से ही नहीं बल्कि कई लोगों द्वारा शुरू से ही उन्हें भारत रत्न देने की मांग की जा रही है। दोस्तों अगर आपको वीर सावरकर की मृत्यु कैसे हुई थी? तथा भारत रत्न के विवाद और उनके जीवन परिचय के बारे में यह जानकारी (Information/Biography In Hindi) अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर कर दें।

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