रबींद्रनाथ टैगोर जयंती 2020 जीवनी | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

    रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2020: Information About Rabindranath Tagore Biography in Hindi

    रबींद्रनाथ टैगोर जयंती २०२० कब है डेट: रविंद्र नाथ ठाकुर की जयंती हर साल 7 मई को मनाई जाती है। इस साल 2020 में रविंद्र नाथ टैगोर जी की 159वीं जयंती 7 मई को वीरवार के दिन मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार गुरुदेव की जयंती बैसाख माह के 25वें दिन मनाई जाती है जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल 7 मई को पड़ती है।

    रबींद्रनाथ ठाकुर भारत के महान कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार एवं नोवल पुरस्कार विजेता भी है उनकी रचनाओं एवं कृतियों में गीतांजलि, गोरा, भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन, बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला, चित्रांगदा, नौका डुबाई, मालिनी और बिनोदिनी जैसी कई अन्य कृतियां शामिल है। साथ ही उन्होंने अपने जीवन काल में कई उपन्यास, निबंध, लघुकथाएं, नाटक एवं कई हजार गाने भी लिखे हैं।


    रवींद्रनाथ टैगोर जी की जयंती को भारत और विश्व भर में कई अलग-अलग हिस्सों में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है, इस दिन स्कूलों, विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थनों में चित्रकारी, निबंध लेखन, काव्य पाठ जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

    Rabindranath Tagore Jayanti 2020 Jeevani Biography in Hindi
    Rabindranath Tagore Jayanti 2020 Jeevani Biography in Hindi

    रबींद्रनाथ टैगोर जी की जयंती के अवसर पर आज हम आपको रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी और उनकी रचनाओं एवं कृतियों के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही आपको यहाँ रबींद्रनाथ टैगोर जयंती 2020 कब, क्यों और कैसें मनाई जाती है इसकी जानकारी भी मिल गयी है। आइए अब आपको Ravindranath Tagore Ke Bare Mein (About Rabindranath Tagore Biography in Hindi) बताते है।


    रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

    रबींद्रनाथ नाथ टैगोर कौन थे?
    रबींद्रनाथ टैगोर या रवींद्रनाथ ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के धनी भारत के एक महान साहित्यकार, कलाकार, दार्शनिक, कवि, लेखक और एक महान समाज सुधारक एवं देशभक्त भी थे।

    रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म कब हुआ था?
    रविंद्र नाथ टैगोर जी का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता (ब्रिटिश भारत) के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था जो अब कोलकाता के नाम से जाना जाता है। रविंद्र नाथ टैगोर की माता का नाम शारदा देवी था जो एक घरेलू महिला थी तथा उनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर था जो ब्रम्ह समाज के वरिष्ठ नेता थे। वे देवेंद्रनाथ टैगोर के छोटे बेटे थे।

    रबींद्रनाथ को विद्यालय की पढ़ाई और कमरों को लेकर कुछ खास शिकायतें थी वहां वे खिड़की से बाहर नहीं देख सकते थे साथ ही काम ना करके आने की सजा डंडे की मार सहना हुआ करती थी इसलिए उन्होंने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी।


    रविंद्रनाथ ठाकुर का विवाह मृणालिनी देवी से साल 1883 में हुआ। और मृणालिनी से वार्तालाप करते हुए उन्होंने एक स्कूल खोलने की योजना बनाई जो प्राकृतिक वातावरण से घिरा होगा, चार दीवारों से नहीं।

    उन्होंने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में एक विद्यालय की स्थापना की, शांतिनिकेतन में स्कूल निर्माण के समय जब वे आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तो उन्होंने देश भर में नाटकों का मंचन कर इसके लिए पैसा एकत्रित किया। उन्होंने Nobel Prize में मिली पूरी धनराशि को इस स्कूल में लगा दिया।

    पहले यह एक स्कूल था परंतु अब यह विश्व भारती विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है।


    रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार कब और क्यों दिया गया?
    गुरुदेव को 1913 में गीतांजलि काव्य कृति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने वाले प्रथम एशियाई व्यक्ति थे।

    साथ ही उन्हें 1915 में राजा जॉर्ज पंचम द्वारा नाइटहुड (शूरवीर की पदवी) से भी सम्मानित किया गया था परंतु उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध जताते हुए इसे सन 1919 में वापस कर दिया।

    रविन्द्र नाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि कैसे मिली?
    देश के कई महापुरुषों रविंद्र नाथ टैगोर के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे उनमें से एक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी भी थे। रविंद्र नाथ टैगोर ने ही महात्मा गांधी जी को महात्मा कहकर संबोधित किया जिसके बाद गांधी जी ने ही रवींद्रनाथ टैगोर को 'गुरुदेव' की उपाधि दी।

    रबींद्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त 1941 को कोलकाता (भारत) में हुई उस समय वे करीब 80 वर्ष के थे। परन्तु आज भी वे लोगों के दिलों अमर है, उनके जीवन हम सबको एक गहन सीख देता है। उन्होंने अपने जीवन की कम उम्र से मरते दम तक लोगों को प्रेरणा दी और इस धरती को धन्य कर गए।


    रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाएँ एवं कृतियाँ

    इनके परिवार में सभी सुशिक्षित तथा कला प्रेमी थे इसलिए उनकी थी कला में खास रुचि थी और शुरुआती पढ़ाई उन्होंने अपने घर पर ही थी और बाद में वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लेकिन वे एक साल के बाद ही घर वापस आ गए।


    रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी छोटी उम्र से लिखने का काम शुरू कर दिया था और इंग्लैंड से वापस आने के बाद उन्होंने घर के शांतिपूर्ण वातावरण में अपने लिखाई का कार्य शुरू कर दिया और देखते ही देखते उन्हें काफी अच्छी सफलता मिली।


    दुनिया भर में लोग उनकी कृतियों के दीवाने थे, उनकी अनेक रचनाओं का अनुवाद विभिन्न भाषाओं और अंग्रेजी भाषा में भी किया जा चुका हैं। रविंद्रनाथ टैगोर जी ने भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' और बांग्लादेश का राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला' की रचना की। उन्होंने 2000 से ज्यादा गीतों की भी रचना की।


    उनके उल्लेखनीय कार्यों में गीतांजलि, पोस्ट मास्टर, गीतांजलि, गोरा, घरे बाइरे, जन गण मन, रबीन्द्र संगीत, आमार सोनार बांग्ला, नौका डूबी जैसे कृतियाँ शामिल हैं।


    उनके द्वारा लिखी लधुकथाओं, कहानियों और उपन्यासों पर सत्यजीत रे तथा कई अन्य निर्देशकों ने फिल्में बनाई है। रबिन्द्रनाथ टैगोर कि कहानी ‘काबुलीवाला’ पर आधारित फिल्म है ‘काबुलीवाला’ तो वहीँ ‘नौका डूबी’ पर फिल्म ‘मिलन’ बनाई थी।


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    रबींद्रनाथ टैगोर के बारे में | About Rabindranath Tagore in Hindi

    कोलकाता के बंगाली ब्राह्मण परिवार में जन्मे रविंद्र नाथ टैगोर बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। बचपन में उन्हें रवि नाम से पुकारते थे, तो वहीं आज वे रबींद्रनाथ टैगोर, गुरुदेव, रवींद्रनाथ ठाकुर आदि नामों से विश्व भर में जाने जाते हैं।


    रबींद्रनाथ टैगोर जी ने कहा था कि आपको दुश्मन बनाने के लिए किसी से लड़ने की आवश्यकता नहीं है बस आप एक बार कामयाब हो जाओ दुश्मन तो आपको खैरात में मिलेंगे।

    स्थानीय नाम रबींद्रनाथ टैगोर
    जन्म 07 मई 1861, कलकत्ता
    पिता श्री देवेन्द्रनाथ टैगोर
    माता श्रीमति शारदा देवी
    पत्नी मृणालिनी देवी
    व्यवसाय लेखक, कवि, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार
    उपाधि गुरुदेव (महात्मा गाँधी जी द्वारा मिली)
    भाषा हिन्दी, बंगाली, अंग्रेजी
    प्रमुख कार्य गीतांजलि, जन गण मन आदि
    सम्मान साहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार
    मृत्यु 07 अगस्त 1941, कोलकाता
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    अन्तिम शब्द

    दोस्तों अब तो आप रवीन्द्रनाथ ठाकुर कि जयंती के बारे में समझ जान ही गए होंगे और आपने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी (Rabindranath Tagore Biography in Hindi) के बारे में भी जान लिया है, अगर आपको हमारी रबींद्रनाथ टैगोर जयंती 2020 कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है कि यह जानकारी (Information About Rabindranath Tagore in Hindi) अच्छी लगी तो उसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि देश के महान व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के बारे में पता चल सके।

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