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World Soil Day 2021: विश्व मृदा दिवस का इतिहास, थीम और मिट्टी का महत्व

World Soil Day 2021: मिट्टी के महत्व को लोगों और किसानों तक पहुंचाने के लिए हर साल 5 दिसंबर को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। आइये इसके बारें में विस्तार से जानते है...

    World Soil Day 2021: विश्व मृदा दिवस कब क्यों और कैसे मनाया जाता है? History, Theme और Importance

    वर्ल्ड सॉइल डे २०२१: हर साल 5 दिसंबर को विश्व स्तर पर विश्व मृदा या मिट्टी दिवस (World Soil Day) मनाया जाता है, इसका मुख्य मकसद लोगों को मिट्टी के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
    आज खेतों में किसानों द्वारा अत्याधिक रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाइयों का इस्तमाल किया जाता है, जिस से मिट्टी के जैविक गुणों में कमी आ रही है जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घटती जा रही है।

    इसीलिए लोगों को मिट्टी के बारे में सही जानकारी (Information) देना बहुत ज्यादा आवश्यक हो गया है।

    World Soil Day 2021 In Hindi
    World Soil Day 2021 In Hindi

    Soil Day 2021: विश्व मृदा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

    मिट्टी के महत्व को लोगों और किसानों तक पहुंचाने के लिए हर साल 5 दिसंबर को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर विश्व मृदा दिवस (World Soil Day) मनाया जाता है। इसे पहली बार 'Soils, foundation for family farming' थीम के साथ 5 दिसंबर 2014 को मनाया गया था।

    जनसंख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण मिट्टी के कटाव (Soil erosion) को कम करने की दिशा में काम करना और लोगों को मिट्टी के बारे में जागरूक करना इसका मुख्य उद्देश्य है।


    5 दिसंबर ही क्यों?
    5 दिसंबर की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि यह थाईलैंड के स्वर्गीय राजा 'एच.एम भूमिबोल अदुल्यादेज' के जन्मदिन से मेल खाती है वे इस पहल के मुख्य समर्थकों में से एक थे।


    वर्ल्ड सॉइल डे का इतिहास (History)

    FAO सम्मेलन ने सर्वसम्मति से 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 68वें सत्र द्वारा विश्व मृदा दिवस को 5 दिसंबर को मनाने की घोषणा की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ (IUSS) ने 2002 में ही 5 दिसंबर को हर साल वर्ल्ड साइल डे मनाने की मांग की थी।

    खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा भी थाईलैंड के नेतृत्व में विश्व मृदा दिवस की औपचारिक स्थापना को वैश्विक जागरूकता बढ़ाने वाले मंच के रूप में समर्थन दिया था। जिसके बाद पहला वर्ल्ड सॉइल डे 5 दिसम्बर वर्ष 2014 में मनाया गया।


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    विश्व मृदा दिवस 2021 की थीम (World Soil Day Theme)

    हर साल विश्व मृदा दिवस एक ख़ास विषय पर आधारित होता है जो दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है, जो लोगों के हित में होता है।

    खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक इस बार World Soil Day 2021 की Theme 'Halt soil salinization, Boost soil productivity' (मृदा लवणीकरण को रोकें, मृदा उत्पादकता को बढ़ावा दें) है। इससे पहले 2020 की थीम Keep soil alive, protect soil biodiversity' (मिट्टी को जीवित रखें, मिट्टी की जैव विविधता की रक्षा करें) थी।


    इस थीम का उद्देश्य दुनिया भर में सरकारों संगठनों समुदायों और व्यक्तियों को मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाना और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रोत्साहित करना है।

    इसके साथ ही मिट्टी के प्रबंधन में बढ़ती चुनौतियों तथा मिट्टी की जैव विविधता को नुकसान से बचाना भी इसका उद्देश्य है।


    World Soil Day Past Years Theme:
    • वर्ष 2014 में पहले विश्व मिट्टी दिवस की थीम 'Soils, foundation for family farming' थी।

    • 2015 में विश्व मिट्टी दिवस की थीम थी 'Soils, a solid ground for life'.

    • 2016 की थीम 'मिट्टी और दाल जीवन के लिए एक सहजीवन' (Soils and pulses, a symbiosis for life) थी।

    • 2017 की थीम 'ग्रह की देखभाल भूमि से शुरू होती है' (Caring for the Planet Starts From The Ground) थी।

    • 2018 की थीम 'मृदा प्रदूषण का समाधान हो' (Be the solution to soil pollution) थी।

    • पिछली साल 2019 में इसकी थीम 'मृदा कटाव रोके, हमारा भविष्य संवारे' (Stop soil erosion, Save our future) थी।

    क्यों जरूरी है मिट्टी का बचाव (importance of soil protection)

    › मिट्टी पृथ्वी पर रहने वाले जैव विविधता के 25% से अधिक का घर है, पृथ्वी पर जितने लोग रहते हैं उससे कई ज्यादा अधिक जीवित प्राणी स्वस्थ मिट्टी में रहते हैं।

    › मिट्टी में रहने वाले जीव पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए पूरे साल दिन रात काम करते हैं।

    › हमारे भोजन का 95 फ़ीसदी भाग मिट्टी से ही आता है।

    › मिट्टी में रहने वाले जीव कार्बन को स्टोर करने में मदद करते हैं।

    › हर साल इस ग्रह की मिट्टी का लगभग 50% केंचुओं की आंतों से होकर गुजरता है।


    आज दुनिया भर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जिससे पेड़ों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती है जिससे बाढ़ या तेज बारिश आने पर मिट्टी पानी सोख लेती है।

    परन्तु पेड़ों की कमी के चलते आज तेज बारिश आने पर मिट्टी पानी नहीं सोंख पाती जिसके फलस्वरूप बाढ़ जैसी आपदाएं तो आती ही है साथ ही बाढ़ के पानी के साथ मिट्टी भी बह जाती है।

    मिट्टी के बह जाने से भारत और कई देशों के किनारे सिकुड़ते हुए दिखाई देते हैं, किसी भी बढ़ती जनसंख्या वाले देश के लिए जगह की आपूर्ति काफी जरूरी है इस तरह देश का सिकुड़ना चिंता का विषय है इसीलिए हमें मृदा संरक्षण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।


    अंतिम शब्द

    मिट्टी के बारे में इतनी सब जानकारी हासिल करने के बाद अब आपको मिट्टी के महत्व और इसके बचाव के बारे में पता चल गया होगा उम्मीद करते हैं कि आप इस विश्व मृदा दिवस 2021 को मिट्टी संरक्षण और इसकी थीम का पालन करते हुए इसे मनाएंगे।

    यह जानकारी कैसी लगी कमेंट में बताना ना भूलें और दूसरों को भी इस बारे में जागरूक करने के लिए इस लेख को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और ट्विटर पर भी #SoilBiodiversity और #WorldSoilDay के साथ जरूर शेयर करें।

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