सावित्रीबाई फुले की 189वीं जयंती 3 जनवरी 2020: Savitribai Phule Jayanti Information in Hindi

    सावित्रीबाई फुले की 189वीं जयंती २०२०: Savitribai Phule Jayanti 2020 Information in Hindi

    Savitribai Phule Jayanti 2020 - Speech/Essay Information in Hindi: आज 03 जनवरी 2020 को भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सेविका और मराठी कवियित्री, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की 189वीं जयंती है, सावित्रीबाई फुले और उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले (Jyotiba Phule) का देश में किए गए समाज सुधार में बहुत बड़ा योगदान है, दोस्तों आज आप जिस तरह से देश में महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करता देख रहे है ऐसी स्तिथि उन्नीसवीं सदी के दौर में नहीं थी, भारत में उस समय देश में महिलाओं की स्थिति काफी बदतर थीं।
    Savitribai Phule Jayanti 2020 Jivani Biography Hindi Images
    Savitribai Phule Jayanti 2020 Speech Jivani Hindi Images

    उस समय भारत पुरुष प्रधान समाज हुआ करता था, तो वही दूसरी तरफ समाज में ऊँच-नीच, बाल विवाह, महिलाओं को शिक्षा से दूर रखना, सती प्रथा, आदि जैसी कई कुरीतियाँ अपने पाँव पसारे हुए थी। उस समय के हाल को आप इस तरह समझ सकते है कि महिलाओं को घर की दहलीज लांघना और सिर से घूंघट उठाकर बात करना भी नामुमकिन सा था।

    जिससे स्त्रियों का स्वाभिमान और आत्मविशवास पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका था। और वे इसी को अपनी किस्मत का लिखा मान चुकी थीं। ऐसी ही विषम परिस्तिथि में सावित्रीबाई फुले ने जन्म लेकर इस परिस्तिथि और महिलाओं और दलितों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खड़ी हुई और इक समाज सुधारक के तौर पर उन्होंने देश को समाज में हो रहे शोषण से मुक्ति दिलाने हेतु पुरजोर प्रयास किया।

    आइए अब आपको क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की 189वीं जयंती (Savitribai Phule Jayanti 2020 in Hindi) पर उनकी जीवनी (Savitribai Phule Biography in Hindi) यानि सावित्रीबाई फुले माहिती कौन थी के बारे में बताते है, जिसे आप सावित्रीबाई फुले भाषण, (Savitribai Phule Speech in Hindi) या निबंध (Essay in Hindi) के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते है, तो चलिए उनके द्वारा समाज में किए गए सुधारों पर भी प्रकाश डालते है.

    सावित्रीबाई फुले की जयंती पर जानिए जीवनी | Savitribai Phule Speech/Bhashan/Nibandh Information in Hindi

    1. कौन थी: सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) का पूरा नाम सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले था, वे भारत की पहली महिला शिक्षिका, प्राध्यापिका, समाज सुधारिका एवं मराठी की कवयित्री भी थीं। उन्होंने सन 1852 में लडकियों के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। और अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किए।

    2. जन्म: सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के पुणे में नैगांव गाँव के एक दलित किसान परिवार में हुआ। सावित्रीबाई के पिता का नाम खन्दोजी नेवसे तथा माँ का नाम लक्ष्मी था।

    3. विवाह: सावित्रीबाई फुले जब मात्र 9 वर्ष की थी तब उनका विवाह 1840 में ज्योतिबा (जोतिराव) फुले से हुआ था, जो उस समय 13 साल के थे। वैसे तो सावित्रीबाई और जोतिराव की अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन उन्होंने एक ब्राह्मण विधवा के पुत्र यशवंतराव को गोद लिया था।

    4. शिक्षा: सावित्रीबाई का जन्म एक ऐसे समाज में हुआ, जहाँ लडकियों का विद्यालय जाना वर्जित था, और इसे पाप माना जाता था, और जोतिराव भी अपनी जाति के कारण सातवीं कक्षा तक ही पढ़ पाए थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, उनके पति जोतीराव ने ही सावित्रीबाई को घर पर शिक्षित किया।

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      सावित्रीबाई ने जोतिराव के साथ अपनी प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद, उनकी आगे की शिक्षा भी ग्रहण की और उन्होंने ब्रिटिश शासन में दो शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी दाखिला लिया।

    5. लडकियों के लिए स्कूल की शुरुआत: उन्होंने जब लडकियो के लिए स्कूल की शुरुआत कि तो ऐसे तुच्छ समाज में उनका स्कूल पढ़ाने जाना कठिनाईयों से भरा था, जब वे स्कूल पढाने जाती थी तो लोग उन्हें पत्थर मरते और उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर आदि फेंकते परंतु वह अपने पथ से कभी नहीं हटी, वे इससे लड़ने के लिए हमेशा से ही खुद को तैयार करके रखती थी. और विद्यालय जाते समय अपने थैले में एक Extra साड़ी लेकर जाती थी और स्कूल पहुंचकर उस गन्दी साड़ी को बदल लिया करती थी.

    6. मृत्यु: सावित्रीबाई ने अपने जीवन का अंतिम समय भी लोगों की सेवा में ही बिताया, वे प्लेग महामारी के मरीज़ों की सेवा करती थीं। जिससे यह महामारी उन्हें प्लेग के छूत से ग्रस्त एक बच्चे की सेवा करने के दौरान लगी और सावित्रीबाई फुले की मृत्यु 10 मार्च 1897 को इसी चूहों के कारण होने वाली महामारी प्लेग से हुई।

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    सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले द्वारा किए गए सुधार:

    • सावित्रीबाई फुले ने भारत में पहला कन्या विद्यालय और किसान स्कूल की स्थापना की और देश की पहली प्रिंसिपल बनी।

    • उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 1848 में पुणे में एक विद्यालय की स्थापना की, जिसमें केवल 9 छात्राएं थी। और एक साल में दोनों ने मिलकर 5 नये विद्यालय खोलें।

    • उनका मुख्य उद्देश्य विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना था।

    • सावित्रीबाई और उनके पति ने मिलकर महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए काम किया।


    महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक तो थे ही साथ ही भारत के सामाजिक सुधारकों में से माने जाते है।

    सामाजिक मुश्किलें

    आज से 160 साल पहले बालिकाओं के लिये स्कूल खोलनेपर उन्हें पत्थर मारे गए और उन पर कीचड़, गोबर आदि फैका गया.

    उस समय बालिकाओं के लिए पढना एक पाप का काम माना जाता था, तो आप सोच सकते है कि कन्याओं के लिए विद्यालय खोलना कितना मुश्किल काम रहा होगा.

    लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी, ऐसे में सावित्रीबाई फुले उस दौर में न केवल खुद पढ़ीं, अपितु दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, जिसकी कल्पना कर पाना भी मुशकिल है.


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    अंतिम शब्द

    सावित्रीबाई ने जैसे अपने जीवन का मिशन पहले से ही तय किया हुआ था, उन्होंने अपने जीवन में कई उद्देश्यों को पूरा किया, वे मराठी की आदिकवियत्री भी थीं। Friends अब आपको क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की 189वीं जयंती (Savitribai Phule Jayanti 2020 in Hindi) पर उनकी जीवनी (Savitribai Phule Biography in Hindi) यानि सावित्रीबाई फुले माहिती कौन थी के बारे में पता चल गया होगा, जिसे आप सावित्रीबाई फुले भाषण, (Savitribai Phule Speech in Hindi) या निबंध (Essay in Hindi) के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते है, और उनके द्वारा समाज में किए गए सुधारों और योगदानों के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करे.
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