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स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 2021: आर्य समाज संस्थापक का जीवन परिचय

    Swami Dayananda Saraswati Jayanti 2021: आर्य समाज संस्थापक दयानंद सरस्वती जी की बायोग्राफी और सुविचार (Quotes)

    Dayananda Saraswati Birthday Date 2021: भारत में कई समाज सुधारकों, महात्माओं, महापुरुषों, देशभक्तों और शुभचिंतकों का जन्म हुआ और उन्होंने देश के लिए कई महान कार्य भी किए जिनमें से दयानंद सरस्वती जी भी एक थे।

    महर्षि दयानंद सरस्वती जी भारत के महान समाज सुधारक, देशभक्त, शुभचिंतक और आर्य समाज के संस्थापक भी थे। उनके विचारों से महात्मा गांधी जी जैसे कई वीर पुरुष प्रभावित थे।

    उन्होंने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और 1857 की क्रांति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    Swami Dayanand Saraswati Jayanti 2021 in Hindi
    Swami Dayanand Saraswati Jayanti 2021 in Hindi

    इस खास मौके पर आपको स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती के बारे में पूरी जानकारी (Swami Dayananda Saraswati Jayanti 2021) और Biography (जीवन परिचय) तथा कुछ सुविचार (Quotes) Images आज के इस लेख में मिलने वाली है।


    स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती कब है?

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार स्वामी दयानंद सरस्वती जी का जन्म फागुन मास में कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, इसीलिए उनकी जयंती (Birthday) का दिन हर साल अलग-अलग तारीख (Date) को पड़ता है।

    इस साल 2021 में 08 मार्च को स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती 198वीं जयंती मनाई जा रही है।


    स्वामी जी 19वीं सदी के महान समाज सुधारकों में से एक है जिन्होंने उस समय फैली बुराइयों और अन्धविश्वासों को दूर करने का काफी प्रयास किया।

    साथ ही बाल विवाह और सती प्रथा, जैसी कुरीतियों क भीा विरोध किया और हिंदू समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ डटकर खड़े रहे।

    समाज की इन्हीं कुरीतियों से निर्भय होकर समाज के खिलाफ खड़े रहने के कारण ही उन्हें सन्यासी योद्धा भी कहा जाता है।

    उन्होंने आर्य समाज की स्थापना कर इन कुरीतियों को दूर करने की कोशिश की, उन्होंने हिंदू ही नहीं अपितु दूसरे धर्मों जैसे इस्लाम और ईसाई धर्मों में फैली कुरीतियों का भी खंडन किया।


    Swami Dayananda Saraswati के बारे में

    1.नाममहर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती
    2.जन्म नाममूलशंकर तिवारी
    3.जन्म12 फरवरी 1824 टंकारा, गुजरात
    4.माता-पिताअमृत बाई – अंबाशंकर तिवारी
    5.धर्मसनातन धर्म (हिन्दू)
    6.गुरु/शिक्षकविरजानन्द
    7.कार्य-क्षेत्रस्वतंत्रता सेनानी, समाज-सुधारक, धर्मगुरु
    8.उपलब्धिआर्य समाज के संस्थापक, समाज सुधारक, 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान
    9.मृत्यु 30 अक्टूबर 1883 अजमेर, राजस्थान

    Swami Dayanand Saraswati जी का जीवन परिचय (Biography)

    1. जन्म: स्वामी दयानंद सरस्वती जी का जन्म 12 फरवरी 1824 को टंकारा (गुजरात) में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके के पिता 'अंबा शंकर तिवारी' एक नौकरी पेशा व्यक्ति थे, तथा उनकी माता जी का नाम अमृत बाई था। उनके बचपन का नाम मूल शंकर तिवारी था।

    2. सन्यास: स्वामी जी के बचपन का जीवन काफी अच्छे से बिता परंतु उनके जीवन में घटी एक घटना ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि अपनी 21 वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपना घर बार छोड़कर सन्यास ले लिया और एक सन्यासी बन गए जहां उन्हें उनके गुरु द्वारा वेदों शास्त्रों के शिक्षा मिली।

    3. ज्ञान और गुरु: दयानंद सरस्वती जी ने पंडित बनने के लिए संस्कृत, वेदों शास्त्रों एवं अन्य धार्मिक पुस्तकों का भी अध्ययन किया परंतु जीवन में ज्ञान की तलाश में वे स्वामी विरजानंद जी से मिले और उन्हें अपना गुरु मानकर मथुरा में ही वैदिक एवं योग शास्त्रों के साथ-साथ ज्ञान की प्राप्ति भी की।

      जब उन्होंने अपने गुरु स्वामी विरजानंद जी से गुरु दक्षिणा के विषय में पूछा तो उनके गुरूजी ने गुरु दक्षिणा के रूप में उनसे एक प्रण लेने को कहा, और बोले जब तक तुम जीवित रहेंगे तब तक वैदिक शास्त्रों का महत्व लोगों तक पहुंचाते रहोगे और इसे ही अपनी गुरु दक्षिणा बताया।

      स्वामी जी ने भी अपनी गुरु दक्षिणा के रूप में लिए गए संकल्प को बखूबी निभाया।


    4. स्वतंत्रता संग्राम: स्वामी जी ने सन्यास लेने के बाद से ही अंग्रेजो के खिलाफ बोलना शुरु कर दिया, देश भ्रमण करने पर उन्हें यह पता चला कि लोगों के अंदर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ काफी ज्यादा आक्रोश है। इसलिए उन्होंने भारत के सभी वर्ग के लोगों को आजादी के लिए जोड़ना शुरु किया।

      उन्होंने इसकी शुरुआत साधु-संतों को जोड़कर की जिससे साधारण लोग प्रेरणा ले सकें।

      हालांकि 1857 की क्रांति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा, उन्होंने 'स्वराज का नारा' दिया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया।

    आर्य समाज की स्थापना (Founder of Arya Samaj)

    महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने हिंदू समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए 10 अप्रैल 1875 को मुंबई के गिरगांव में आर्य समाज की स्थापना की। जिसका आदर्श वाक्य 'कृण्वन्तो विश्वमार्यम्' है और इसका हिंदी अर्थ 'विश्व को आर्य (श्रेष्ठ) बनाते चलो' है।

    आर्यसमाज के सभी सिद्धांत और नियम लोगों के कल्याण के लिए बनाए गए है। आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य संसार की भलाई करना, अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति पर ध्यान देना है।

    स्वामी दयानंद सरस्वती जी को सभी वेदों का सटीक ज्ञान था, साथ ही वह अपने जीवन को पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य, सन्यास और कर्म सिद्धांत के चार स्तंभों पर खड़ा मानते थे।


    हिंदी का महत्व:
    स्वामी जी हिंदी भाषा के समर्थक थे तथा कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही भाषा (हिंदी) चाहते थे। उनके पास हिंदू धर्म का जितना भी ज्ञान था वह उसे संपूर्ण भारत देश में फैलाना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने भारत भ्रमण भी किया।


    स्वामी दयानंद जी की मृत्यु कब और कैसे हुई?

    स्वामी जी को कुछ अंग्रेजी हुकूमत के षडयंत्रकारियों ने जहर देकर मारने की कोशिश की, परंतु योग पारंगत होने के कारण स्वामी जी को कुछ नहीं हुआ।

    स्वामी जी ने 30 अक्टूबर 1883 को दिवाली की शाम को अपनी 59 वर्ष की आयु में अपने अंतिम शब्द "प्रभु! तूने अच्छी लीला की, आपकी इच्छा पूर्ण हो.." के साथ अपना शरीर त्याग दिया।



    स्वामी दयानंद सरस्वती जी के जीवन में घटी एक कहानी:

    स्वामी दयानंद सरस्वती जी शुरू से ही अपने पिता का कहना मानते थे, क्योंकि वह एक ब्राह्मण थे इसीलिए उनके परिवार में हमेशा धार्मिक अनुष्ठान किए जाते थे। एक बार की बात है स्वामी जी के पिताजी ने उनसे महाशिवरात्रि का उपवास रख विधि विधान के साथ रात्रि जागरण व्रत करने को कहा।

    पिताजी के कहे अनुसार मूल शंकर (स्वामी जी) ने उपवास रखा और उनका पूरा परिवार रात्रि जागरण के लिए एक मंदिर में ठहरा, जहां रात्रि में उनके परिवार के सभी सदस्य सो गए, परंतु वह जागते रहे और यह प्रतीक्षा करते रहे कि कब भगवान आएंगे और इस प्रसाद को ग्रहण करेंगे।

    परंतु काफी देर तक इंतजार करने के बाद कोई नहीं आया और अर्ध रात्रि में उन्होंने देखा कि भगवान पर चढ़ाया प्रसाद वहां रहने वाले कुछ चूहों की टोली खा रही थी। यह देख वह काफी आश्चर्यचकित हुए और उनके मन में यह विचार आया कि जब भगवान खुद पर चढ़ाए गए प्रसाद की रक्षा नहीं कर सकते तो वे मानवता की रक्षा क्या करेंगे?

    जिसके बाद उनकी बहस उनके पिता से भी हुई। और उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि हमें ऐसे असहाय भगवानों की उपासना नहीं करनी चाहिए।


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    स्वामी दयानंद सरस्वती जी के अनमोल विचार (Swami Dayananda Saraswati Quotes)

    दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए, और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आएगा।
    Swami Dayanand Saraswati Quotes Photos In Hindi
    Swami Dayanand Saraswati Quotes Photos In Hindi
    अज्ञानी होना गलत नहीं है, अज्ञानी बने रहना गलत है।
    Swami Dayananda Saraswati Slogan Image
    Swami Dayananda Saraswati Slogan Image
    “काम करने से पहले सोचना... बुद्धिमानी,
    काम करते हुए सोचना... सतर्कता,
    और काम करने के बाद सोचना...
    मूर्खता है”
    Arya Samaj Founder Anmol Suvichar Pics
    Arya Samaj Founder Anmol Suvichar Pics

    आत्मा अपने स्वरुप में एक है,
    लेकिन उसके आस्तित्व अनेक है।
    Swami Dayananda Saraswati Thoughts in Hindi
    Swami Dayananda Saraswati Thoughts in Hindi
    “ये शरीर नश्वर है, हमे इस शरीर के जरीए सिर्फ एक मौका मिला है, खुद को साबित करने का कि, ‘मनुष्यता’ और ‘आत्मविवेक’ क्या है”

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    अन्तिम शब्द:

    उम्मीद है कि आपको आर्य समाज के फाउंडर महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की बायोग्राफी और जयंती तथा उनके योगदानों (Contributions) की यह जानकारी पंसद आई होगी

    अगर आपको Swami Dayanand Saraswati के Quotes Photos का यह लेख पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरूर शेयर करें।


    आप सभी को HaxiTrick.Com की तरफ से स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
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