-->

राष्ट्रिय युवा दिवस 2021: स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर जानिए National Youth Day के बारे में

    राष्ट्रिय युवा दिवस 2021: स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Birthday and National Youth Day)

    Swami Vivekananda Jayanti (Rashtriya Yuva Diwas): इस साल 12 जनवरी 2021 (मंगलवार) को हम 36वां युवा दिवस (National Youth Day) और स्वामी विवेकानंद जी की 158वीं जयंती (Birth Anniversary) मनाने जा रहे है।

    स्वामी विवेकानंद जी (जन्म: 12 जनवरी 1863 - मृत्यु: 4 जुलाई 1902) भारत के महान दार्शनिक, युवा संन्यासी, शुभचिंतक और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में विख्यात महापुरुष थे।

    Swami Vivekananda जी की Birth Anniversary को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है।

    Yuva Diwas Swami VivekaNanda Jayanti
    Yuva Diwas Swami VivekaNanda Jayanti 2021

    स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम विवेकानंद नहीं था उन्हें यह नाम कैसे मिला? आइए विवेकानंद जी की जयंती पर उनकी Biography के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं।


    राष्ट्रीय युवा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

    भारत में प्रतिवर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है। नेशनल यूथ डे मनाने का फैसला भारत की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1984 में लिया गया जिसके बाद 12 जनवरी 1985 को पहला युवा दिवस मनाया गया।

    Yuva Diwas मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को ऊर्जावान बनाना और उन्हें सद्बुद्धि और सही मार्ग पर अग्रसर करना है। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने हमेशा से ही युवाओं को देश का भविष्य और अपनी आशाओं को युवा वर्ग पर टिका बताया है।


    बताते चलें कि विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है।


    Swami Vivekananda Quotes in Hindi
    Swami Vivekananda Quotes in Hindi

    स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन (नेशनल यूथ डे) कैसे मनाते है?

    स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन को युवा दिवस के तौर पर मनाए जाने का इतिहास रहा है प्रत्येक वर्ष इस खास मौके पर स्कूलों, विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में उनके विचार एवं उपदेशों को छात्रों तक पहुंचाया जाता है तथा कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इनमें निबंध लेखन, भाषण, कला एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएं शामिल होती है।

    इस दिन विवेकानंद जी की जयंती होती है इसीलिए इस खास मौके पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया जाता है, उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं के आदर्श और प्रेरणा स्रोत है।

    उनके अनुयायियों एवं अन्य लोगों द्वारा साहित्य एवं प्रदर्शनी लगाई जाती है पूजा-पाठ, अनुष्ठान तथा योगासन, सुविचार और युवा सम्‍मेलन आयोजित किए जाते हैं।

    साथ ही 12 जनवरी से 19 जनवरी तक 'राष्ट्रीय युवा सप्ताह' का भी कार्यक्रम होता है परंतु इस बार कोरोनावायरस महामारी के चलते ज्यादातर कार्यक्रम नहीं किए जा सकेंगे।


    राष्ट्रीय युवा दिवस 2021 थीम (Youth Day Theme)

    National Youth Day हर साल एक ख़ास विषय पर आधारित होता है इस साल राष्ट्रीय युवा दिवस 2021 की थीम अभी आनी बाकी है। तो वहीं पिछली साल 2020 की थीम ‘फिट यूथ फिट इंडिया’ (Fit Youth Fit India) थी।

    और वर्ष 2019 की National Youth Day की Theme Channelizing Youth Power for Nation Building रखी गयी थी।


    यह भी पढ़े: गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बारें में, क्यों कहलाते हैं ‘हिंद दी चादर’

    स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायक सुविचार (Yuva Diwas Quotes)

    स्वामी विवेकानंद जी ने ‘उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए’, जैसे प्रेरणादायक विचारों को युवाओं के जहन में उतारा। वे भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल लोगों के प्रमुख प्रेरणास्रोत थे।


    सबसे बड़ा पाप यह सोचना है कि आप कमजोर हैं।

    अपने आप में विश्वास रखो सारी शक्ति तुम में है, सांप का जहर भी शक्तिहीन होता है यदि आप इसे मजबूती से नकार सकते हैं।

    दिन में एक बार खुद से बात करें अन्यथा आप इस दुनिया में एक उत्कृष्ट व्यक्ति से मिलने से चूक सकते हैं

    Swami Vivekananda Anmol Vichar
    Swami Vivekananda Anmol Vichar

    जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।

    स्वामी विवेकानंद कौन थे (Swami Vivekananda Biography in Hindi)

    स्वामी विवेकानंद जी भारत के दार्शनिक, शुभचिंतक, युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत, समाज सुधारक, युवा संन्यासी और एक महान देशभक्त थे, उनका जन्म कोलकाता के एक कायस्थ परिवार में 12 जनवरी 1863 को हुआ उनके बचपन का नाम 'नरेंद्र नाथ दत्त' था।

    उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था जो कोलकाता हाई कोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे और उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था वह एक धार्मिक विचारों वाली महिला थी।


    शिक्षा (Education):
    वे बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थे 1871 में वे ईश्वरचंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में पढ़ाई के लिए स्कूल गए।
    1879 में वे प्रेसीडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने वाले इकलौते छात्र थे।

    उन्होंने ज्यादातर सभी चीजों का अध्ययन किया वह दर्शनशास्त्र, इतिहास, समाज कला, साहित्य, धर्म, वेद, धार्मिक पुस्तकें (जैसे श्रीभगवद गीता, रामायण, महाभारत) तथा हिंदू शास्त्रों को भी पढ़ा।

    वह भारतीय शास्त्रीय संगीत, खेल कूद और व्यायाम (Yoga) में भी काफ़ी आगे थे, उन्होंने 1881 में ललित कला की परीक्षा पास कर 1884 में आर्ट्स से ग्रेजुएशन के डिग्री पूरी की।


    यह भी पढ़े: शहीद भगत सिंह जी की जयंती और जीवनी

    सन्यासी जीवन:
    विवेकानंद जी वर्ष 1881 में ही गुरू रामकृष्ण परमहंस से कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली माता मंदिर में मिले, जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन 'गुरूदेव रामकृष्ण परमहंस' को समर्पित कर दिया जिसके कारण वे गुरु सेवा और गुरु भक्ति के लिए पूरे संसार में जाने गए।

    नरेंद्र नाथ दत्त (विवेकानंद) ने अपनी 25 वर्ष की आयु में ही अपना घर-बार छोड़ सन्यास ले लिया और गेरुआ वस्त्र धारण किया, सन्यास लेने के बाद ही नरेंद्र नाथ दत्त 'स्वामी विवेकानंद' कहलाए।

    उन्होंने 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के पास बेलूर में गंगा तट पर अपने गुरू/शिक्षक रामकृष्ण को समर्पित 'रामकृष्ण मठ' की स्थापना की।


    विश्व धर्म परिषद में प्रतिनिधित्व:
    स्वामी विवेकानंद जी ने संयास लेने के बाद पूरे भारत वर्ष का पद भ्रमण (पैदल यात्रा) किया, उन्होंने 31 मई 1893 को विश्व यात्रा शुरू की जिसमें वह जापान का दौरा करते हुए चाइना और कनाडा से होकर अमेरिका के 'शिकागो' शहर पहुंचे।

    जिस समय स्वामी विवेकानंद जी भारत का प्रतिनिधित्व करने शिकागो पहुँचे, उस समय भारत के गुलाम होने के कारण भारतीय लोगों को काफी निम्न दृष्टि से देखा जाता था।

    लेकिन जब उन्होंने विश्व धर्म परिषद् में अपने भाषण की शुरुआत अमेरिका के भाइयों और बहनों कहकर की तो तालियों की गूंज काफी देर तक रही और उनके विचारों से परिषद् में बैठे विद्वान काफी प्रभावित हुए, और वहाँ के लोग भी उनके के Fan बन गए।


    यह भी पढ़े: विश्व हिंदू परिषद द्वारा शौर्य दिवस क्यों मनाया जाता है?

    विवेकानंद जी की मृत्यु कब हुई? उनकी पुण्यतिथि कब है?

    स्वामी विवेकानंद जी को दमा और शुगर की शिकायत थी जिसके कारण उनकी मृत्यु काफी कम आयु में हो गई। उन्होंने 40 साल से कम आयु में ही 4 जुलाई 1902 को बेलूर में स्थित रामकृष्ण मठ में ध्यान मग्न अवस्था में ही महासमाधि धारण कर अपने प्राण त्याग दिए।

    जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार बेलूर में गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनके गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस के दूसरी ओर किया गया। हर वर्ष 4 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि होती है।


    युवा दिवस क्या है?

    युवा दिवस देश के युवाओं को समर्पित एक दिन है यह दिन युवाओं का देश की उन्नति और विकास में योगदान तथा भागीदारी को दर्शाता है।

    साथ ही यह युवाओं को जागृत करने और प्रेरणा से भर देने वाला दिन है, इसलिए हर साल राष्ट्रीय स्तर पर 12 जनवरी को और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 12 अगस्त को युवा दिवस मनाया जाता है।


    राष्ट्रीय युवा दिवस का क्या महत्व है?

    स्वामी विवेकानंद जी भारत के युवाओं को देश की ताकत और भविष्य मानते थे। राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के ऐसे ही युवाओं के अंदर ऊर्जा जागृत करता है और आने वाली पीढ़ी और भविष्य को प्रेरित कर देश को विकास की ओर ले जाने के लिए अग्रसर करता है।

    यह दिन स्वामी विवेकानंद जी के महान विचारों (Thoughts) एवं आदर्शों का प्रचार-प्रसार करने और इन्हें अपने जीवन में लागू करने का एक खास और महत्वपूर्ण दिन है।



    अंतिम शब्द

    भारत के युवाओं के लिए विवेकानंद जी से अच्छा कोई अन्य प्रेरणा स्रोत और नेता नहीं हो सकता ऐसे में उनकी जयंती को नेशनल यूथ डे के रूप में मनाया जाना हमारे लिए सौभाग्य और गर्व का दिन है।

    यदि आपको Vivekananda Jayanti और उनकी बायोग्राफी की यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करें।



    आप सभी को युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
    NEXT ARTICLE Next Post
    PREVIOUS ARTICLE Previous Post
    -->
    NEXT ARTICLE Next Post
    PREVIOUS ARTICLE Previous Post